मुंबई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने बुधवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की दुखद मृत्यु के मामले में निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। संगठन ने इस बात पर जोर दिया है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव का बयान
एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि संगठन के प्रतिनिधि इस विषय पर लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि बिना पूरी जानकारी और तथ्यों की पुष्टि के कोई भी जल्दबाजी में निर्णय लेना उचित नहीं होगा। इसलिए संपूर्ण मामले की पारदर्शी जांच आवश्यक है और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
आईआईटी बॉम्बे एलुमनाई एसोसिएशन की अपील
आईआईटी बॉम्बे एलुमनाई एसोसिएशन (आईआईटीबीए) ने मामले की तेज और निष्पक्ष जांच का समर्थन करते हुए आग्रह किया है कि इस संवेदनशील विषय पर किसी भी प्रकार की अटकलें या अनुचित निष्कर्ष न निकाले जाएं। एसोसिएशन ने एक बयान में कहा कि संस्थान इस समय अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा है। छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित व न्यायपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों को मजबूत करने और समुदाय में विश्वास बहाली के लिए सहयोग देने की बात कही।
मृतक छात्र के परिजनों की मांग व आरोप
22 वर्षीय बी.टेक छात्र साहिल वाकोडे 18 सितंबर की शाम हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे। साहिल के माता-पिता ने संस्थान के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे और प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। छात्र की मां सोनाली वाकोडे का आरोप है कि उनके बेटे को पिछले तीन महीनों से जातिगत आधार पर मानसिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित किया जा रहा था। पिता रवींद्र वाकोडे ने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
उल्लेखनीय है कि छात्रों और कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बाद प्रोफेसर डूला को प्रशासनिक डीन के पद से हटा दिया गया है और उनके खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पूर्व छात्रों की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम के बीच पूर्व छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता सुधींद्र कुलकर्णी ने मामले में दर्ज धाराओं के संदर्भ में निष्पक्षता की अपील की है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्रों के शैक्षणिक दबाव को कम करने, मानसिक सहयोग प्रदान करने तथा वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए विशेष मार्गदर्शन व्यवस्था को मजबूत करने पर निरंतर ध्यान देना चाहिए।
घटना की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल के साथ यह दुखद हादसा मध्य-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कथित रूप से फोन के इस्तेमाल से जुड़ी एक घटना के कुछ ही घंटों बाद घटित हुआ। घटना के उपरांत कैंपस में उपजे आक्रोश और विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है।

