‘CEC को तुरंत हटाया जाना चाहिए’: कमिश्नरों की SIR चिंताओं पर रिपोर्ट के बाद विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लामबंद

विपक्षी नेताओं ने बुधवार को इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (Election Commission) के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए. इंडियन एक्सप्रेस (IE) की जांच में पता चला कि तीन में से दो इलेक्शन कमिश्नर, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इलेक्टोरल रोल स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी दिक्कतों पर चिंता जताई थी. जिसके बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार Gyanesh Kumar फौरन हटाने की मांग की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में Election Commission के काम को लेकर क्या दावा किया गया

जांच से पता चला कि संधू और जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्तियां दर्ज कराईं, जिनमें से चार बार एक ही दिन में, ECI के नाम पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए फैसलों के खिलाफ. IE ने कई मामलों पर केंद्रित विवादों की रिपोर्ट दी, जिसमें फॉर्म 6 में बदलाव भी शामिल था, जिसमें नए वोटरों को यह बताना ज़रूरी था कि क्या वे, उनके माता-पिता या दादा-दादी “लास्ट SIR” रोल में थे, जिसे दोनों कमिश्नरों ने अनधिकृत बताया और चेतावनी दी कि यह पहली बार वोट देने वालों को परेशान करने जैसा है.

विपक्ष पहले से ही SIR प्रक्रिया के तरीके और समय पर सवाल उठा रहा है

SIR, एक इलेक्टोरल रोल सफाई अभियान, पिछले साल जून में बिहार से शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य मरे हुए लोगों और “अवैध प्रवासियों” सहित फर्जी, डुप्लिकेट और अयोग्य वोटरों को हटाना था. इसकी विपक्ष ने आलोचना की, जिसने आरोप लगाया कि यह काम सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को फायदा पहुंचाने के लिए एक रणनीतिक वोटर रोल सफाई अभियान है.

ECI को कोई ‘अदृश्य हाथ’ चला रहा है- मनीष तिवारी

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने IE जांच का हवाला देते हुए X पर लिखा कि अगर बताए गए दिखने वाले तथ्य सही हैं, तो ऐसा लगता है कि ECI को कोई ‘अदृश्य हाथ’ चला रहा है. उन्होंने आगे कहा कि अगर कथित तौर पर नियमों का पालन नहीं किया गया और ऐसे फैसले लिए गए जो एकमत या बहुमत से नहीं लिए गए, तो सभी फैसले अपने आप में मनमाने और मनमानी वाले हैं, अगर पूरी तरह से गैरकानूनी नहीं हैं.
तिवारी ने कहा कि यह शायद महाभियोग की कार्रवाई पर गंभीरता से विचार करने का सही मामला है, लेकिन इससे भी ज़रूरी बात यह है कि बुनियादी सवाल यह है कि ECI की विश्वसनीयता फिर से कैसे वापस आएगी.

माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले!- अखिलेश यादव

वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को लेकर आई रिपोर्ट को गंभीर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की अपील की. उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज़ कराई है. इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं. एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और ख़तरनाक हालात हैं. कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है. ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले! ’

CEC को तुरंत हटाया जाना चाहिए- अभिषेक बनर्जी

वहीं टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने तो सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग ही कर डाली उन्होंने एक्स पर लिखा, “CEC को तुरंत हटाया जाना चाहिए और कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश दिया जाना चाहिए. एक पॉलिटिकल पार्टी को कथित तौर पर फ़ायदा पहुंचाने के लिए लाखों वोटरों को वोट देने से वंचित करना हमारी डेमोक्रेसी की बुनियाद पर हमला है. जो लोग इसके लिए ज़िम्मेदार हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.
पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद, भारत की सभी विपक्षी पार्टियों ने CJI और SC के जजों को चिट्ठी लिखकर गंभीर चिंताएं जताईं. लेकिन, उन आरोपों की न तो जांच की गई और न ही उन्हें जांच के काबिल समझा गया जिसके वे हकदार थे.
जब डेमोक्रेटिक प्रोसेस पर असर डालने वाले गंभीर सवाल बार-बार उठाए जाते हैं और फिर भी उन पर कोई सुनवाई नहीं होती, तो इससे इंस्टीट्यूशनल इंपार्शियलिटी पर सवाल उठते हैं.
सुप्रीम कोर्ट नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता. बात वहीं खत्म होती है. क्या CJI की अगुवाई वाली बेंच कोई एक्शन लेगी?”

Gyanesh Kumar को हटाया जाए- CPI(M) MP जॉन ब्रिटास

CPI(M) MP जॉन ब्रिटास ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “…सिर्फ़ ज्ञानेश कुमार हैं, जो तानाशाह हैं, जो मिस्टर मोदी और मिस्टर अमित शाह के कहने पर पूरे इलेक्शन प्रोसेस को कंट्रोल कर रहे हैं. कमीशन बेकार हो गया है क्योंकि कमीशन के दो मेंबर ज्ञानेश कुमार के कई विवादित फ़ैसलों पर अपना विरोध और नाराज़गी दिखा रहे हैं. पिछले 10 महीनों में, 14 बार उन्होंने ऑफिशियली SIR की कई बातों पर एतराज़ जताया है, जैसे बड़े पैमाने पर नाम हटाना, जोड़ना, फॉर्म 6, इस देश में SIR के तौर पर होने वाली हर तरह की चीज़ें. मेरी मांग है कि ज्ञानेश कुमार को हटाया जाए और जो नोटिस हमने 24 अप्रैल को राज्यसभा चेयरमैन को दिया था, उसे फिर से जारी किया जाए, यानी चीफ इलेक्शन कमिश्नर को हटाने के लिए.”

ECI को ठीक नहीं किया गया तो बाकी सभी मुद्दे बेकार हैं- सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी (AAP) के सौरभ भारद्वाज ने IE रिपोर्ट को 2025 के दिल्ली असेंबली इलेक्शन से अपनी पार्टी के पुराने आरोपों से जोड़ा. उन्होंने कहा कि तब से लोग AAP की तरफ झुकाव रखने वाले असली वोटर्स को रहस्यमय तरीके से हटाने और नकली वोटर्स को जोड़ने के बारे में बात कर रहे हैं. उन्होंने एक्स पर लिखा, “सभी विपक्षी पार्टियों को इस मुद्दे पर टिके रहना चाहिए और पहले इसे ठीक करना चाहिए. अगर ECI को ठीक नहीं किया गया तो बाकी सभी मुद्दे बेकार हैं.”

अप्रैल 2026 में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए दिया था नोटिस

अप्रैल में, राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करने वाले विपक्ष के नोटिस को खारिज कर दिया था. नोटिस में “पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण” व्यवहार, जानबूझकर “चुनावी धोखाधड़ी की जांच में रुकावट डालना” और “बड़े पैमाने पर लोगों को वोट से वंचित करना” जैसे आरोप शामिल थे.

ये भी पढ़ें-‘SIR समेत सभी फैसले एकमत से लिए गए’, चुनाव आयोग के सूत्रों ने आयोग में अंदरूनी विरोध की रिपोर्ट को खारिज किया

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