” वोट चोरी भारतीय लोगों के खिलाफ एक अपराध है…देशद्रोह का काम किया है. इंसाफ़ होगा”, SIR खुलासे के बाद बोले राहुल गांधी

चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के मनमानी फैसलों और उसको लेकर बाकी दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर छपी रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग पर अपने हमले तेज कर दिए हैं.
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी Rahul Gandhi जो हमेशा से चुनाव आयोग को बीजेपी की हाथ की कठपुतली कहता रहा है ने इस रिपोर्ट के बाद कहा कि ” वोट चोरी भारतीय लोगों के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है … देशद्रोह का काम किया है. इंसाफ़ मिलेगा”

Rahul Gandhi ने वीडियो पोस्ट कर चुनाव आयोग पर साधा निशाना

सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर नेता विपक्ष और मोदी सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ एक मुखर आवाज़ रहे राहुल गांधी ने कहा कि, ” वोट चोरी भारतीय लोगों के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है. BJP, RSS और EC जिन्होंने इसे ऑर्गनाइज़ किया, उन्होंने देशद्रोह का काम किया है. इंसाफ़ मिलेगा”

राहुल गांधी इस तरह की बात पहले भी लोक सभा में कह चुकें है. कांग्रेस ने आज फिर उनके लोकसभा भाषण के वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किए हैं.

ज्ञानेश कुमार मोदी के हाथ की कठपुतली है- कांग्रेस

इससे पहले बुधवार सुबह कांग्रेस के एक्स हैंडल पर सबसे पहले पोस्ट डाली गई थी जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को मोदी के हाथ की कठपुतली बताया गया था और कहा गया था कि वक्त आने पर जवाबदेही तय होगी.
पोस्ट में लिखा था, ” मोदी के चहेते ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में अपनी मनमर्जी चला रहे हैं. इस बारे में खुद दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है. शिकायत में साफ कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्त – सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी नहीं दी जाती. उनसे सलाह नहीं ली जाती. उनसे बिना पूछे या बताए हुए फैसले लिए जा रहे हैं. ”
पोस्ट में आगे कहा गया,” हम पहले भी कहते आए हैं – मोदी ने चुनाव आयोग पर कब्जा कर रखा है. ज्ञानेश कुमार मोदी के हाथ की कठपुतली है. इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट से ये बात साबित होती है. मोदी और ज्ञानेश ने मिलकर देश के लोकतंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है. लेकिन ये बात याद रखना – वक्त आने पर सबका हिसाब होगा, जवाबदेही तय होगी. इस अपराध की सजा जरूर मिलेगी.”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में क्या कहा गया

इंडियन एक्सप्रेस की जांच में दावा किया गया कि उसने नवंबर 2025 और अगस्त 2026 के बीच संधू और जोशी द्वारा दर्ज की गई लिखित आपत्तियों की जांच की है.
आपत्तियों में वोटर रजिस्ट्रेशन प्रोसेस के कुछ सबसे ज़रूरी हिस्से शामिल थे. इनमें नए वोटर जोड़ना, वोटर लिस्ट से नाम हटाना, वोटर डेटाबेस बनाए रखना और वोटर से जुड़े फैसलों के खिलाफ अपील करना शामिल था.
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों कमिश्नरों ने सवाल उठाया कि क्या कुछ फैसले और ऑर्डर उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्तियों की कॉपी CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थी.

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इन प्रमुख मुद्दों पर दर्ज कराई गई थी आपत्तियां

फॉर्म 6 को लेकर क्या थी आपत्तियां: फॉर्म 6 वह एप्लीकेशन है जिसका इस्तेमाल कोई व्यक्ति नए वोटर के तौर पर रजिस्टर करने के लिए करता है. जुलाई में, SIR से जुड़े सवालों को शामिल करने के लिए फॉर्म में बदलाव किया गया था.
नए एप्लिकेंट से पूछा गया कि क्या उनका अपना नाम, या माता-पिता या दादा-दादी का नाम, पिछले SIR के वोटर रोल में था.
आवेदक को फॉर्म जमा करने से पहले सवाल का जवाब देना था. इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा कि फॉर्म 6 चुनावी नियमों के तहत तय किया गया था और उन नियमों में बदलाव किए बिना इसे बदला नहीं जा सकता था. बाद में संधू ने आपत्ति का समर्थन किया. रिपोर्ट में कहा गया कि यह सवाल 21 सितंबर तक फॉर्म पर बना रहा.

पश्चिम बंगाल, गोवा को लेकर क्या था मुद्दे: पश्चिम बंगाल में, संधू ने सवाल किया कि ज्यूडिशियल जांच के बाद जिन वोटर्स के नाम रखे गए थे, उन्हें हटाने की अपील को किसने ऑथराइज़ किया.
रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा में, 97 वोटर्स को इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स ने एलिजिबल पाया, लेकिन उन्हें फाइनल रोल में नहीं जोड़ा जा सका क्योंकि सॉफ्टवेयर अधिकारियों को अपने फैसले रिकॉर्ड करने की इजाज़त नहीं दे रहा था.
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों कमिश्नरों ने EC के IT सिस्टम से जुड़े बदलावों को लेकर कैबिनेट सेक्रेटरी से अलग-अलग संपर्क किया.

वोटर डेटा कंट्रोल पर भी उठाए गए थे सवाल: दोनों कमिश्नरों ने यह भी सवाल उठाया कि वोटर डेटा को कौन एक्सेस और बदल सकता है. EC वोटर लिस्ट को मेंटेन करने के लिए डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल करता है. ERONet का इस्तेमाल इलेक्टोरल-रोल के काम के लिए किया जाता है, जबकि ECINet एक नया प्लेटफॉर्म है जो चुनाव से जुड़ी कई सर्विसेज़ को एक साथ लाता है.

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