चंडीगढ़। चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ सर्जरी कर 20 वर्षीय युवक की जान बचाई है। पगड़ी बांधते समय युवक ने अनजाने में दो पिन निगल ली थीं, जिसके बाद उसे भोजन निगलने में तीव्र कष्ट होने लगा।
एक्स-रे जांच में दोनों धातु की पिन स्पष्ट दिखाई दीं, परंतु एंडोस्कोपी प्रक्रिया के दौरान केवल एक ही पिन निकाली जा सकी। दूसरी पिन ग्रास नली (खाने की नली) को भेदते हुए हृदय के बाएं वेंट्रिकल की मांसपेशी में जा धंसी थी। पीजीआई के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने समय पर जटिल ऑपरेशन कर 4 सेंटीमीटर लंबी पिन को बाहर निकाला।
यह दुर्लभ चिकित्सीय मामला 'इंडियन जर्नल ऑफ थोरैसिक एंड कार्डियोवैस्कुलर सर्जरी' के जनवरी 2026 अंक में भी प्रकाशित हुआ है। इस सफल सर्जरी में डॉ. संकेथ एडेम, डॉ. त्सेरिंग सांगडुप, डॉ. कृष्ण प्रसाद गौरव और डॉ. अक्षय खेनी सहित छह डॉक्टरों की टीम शामिल रही।
एंडोस्कोपी में ओझल हुई दूसरी पिन
चिकित्सकों के अनुसार, जब मरीज को चंडीगढ़ पीजीआई लाया गया, तब एक्स-रे रिपोर्ट में दो मेटल पिन दिख रही थीं। एंडोस्कोपी के माध्यम से एक पिन सफलता पूर्वक बाहर निकाल ली गई, लेकिन दूसरी पिन दिखाई नहीं दी। इसके बाद तत्काल हाई-रिजॉल्यूशन सीटी स्कैन कराया गया, जिससे पता चला कि पिन ग्रास नली को पार कर पेरिकार्डियम (हृदय की बाहरी झिल्ली) तक पहुंच गई है। तत्पश्चात इकोकार्डियोग्राफी से स्पष्ट हुआ कि पिन का सिरा बाएं वेंट्रिकल की मांसपेशी में धंसा हुआ है और वहां हल्का रक्तस्राव भी हुआ है। खतरे की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आपातकालीन सर्जरी का निर्णय लिया गया।
छठी पसली के मध्य चीरा लगाकर निकाली गई पिन
कार्डियोथोरेसिक सर्जनों ने मरीज की छाती के बाएं ओर छठी पसली के बीच से एक सूक्ष्म चीरा लगाकर सर्जरी की। इस मार्ग से हृदय की बाहरी संरचना तक पहुंचकर 4 सेमी लंबी पिन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ऑपरेशन के तुरंत बाद मरीज को वेंटिलेटर सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ी और उसे ऑपरेशन टेबल पर ही सामान्य स्थिति में लाया गया।
संक्रमण से सुरक्षा के लिए मरीज को एंटीबायोटिक दिए गए। सर्जरी के दूसरे दिन चेस्ट ड्रेन हटा दिया गया तथा तीसरे दिन युवक को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। डिस्चार्ज के बाद की जांचों में मरीज का हृदय पूरी तरह सामान्य पाया गया।
चिकित्सा जगत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला
नुकीली वस्तुओं के पाचन तंत्र से भटककर हृदय जैसे संवेदनशील अंग तक पहुंचने के मामले अत्यंत दुर्लभ होते हैं। पगड़ी की पिन का खाने की नली से होकर बाएं वेंट्रिकल तक पहुंचने का यह दुनिया में पहला दर्ज मामला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एंडोस्कोपी में नुकीली वस्तु न दिखे, तो यह कदापि न समझें कि वह शरीर से बाहर निकल गई है। ऐसी परिस्थितियों में एडवांस सीटी स्कैन और इकोकार्डियोग्राफी जैसी विस्तृत जांचें बेहद आवश्यक होती हैं।
मुंह में नुकीली वस्तुएं दबाने की असावधानी पड़ सकती है भारी
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि पिन, सुई या सेफ्टी पिन जैसी तीखी वस्तुओं को मुंह में दबाना या पकड़ना अत्यंत जोखिम भरा हो सकता है। गलती से निगल जाने पर ये वस्तुएं भोजन नली, आमाशय अथवा आंतों को छेद सकती हैं। यदि कोई व्यक्ति गलती से ऐसी वस्तु निगल ले, तो स्वयं उल्टी कराने का प्रयास न करें और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में पहुंचे।

