JSSC-CGL अभ्यर्थियों को बड़ी राहत,नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर रोक बरकरार

JPSC Jharkhand High Court रांची : झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा विवाद फिलहाल जारी है, लेकिन चयनित अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है. झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर पहले से लगी रोक को बरकरार रखा है. इसका मतलब है कि संबंधित भर्तियों से चयनित और वर्तमान में पदों पर कार्यरत अभ्यर्थी फिलहाल अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे.

मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को होगी. अदालत में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया. इसके बाद याचिकाकर्ताओं को सरकार के जवाब पर प्रति-उत्तर दाखिल करने के लिए समय दिया गया।

JPSC Jharkhand High Court:किन भर्तियों पर जारी रहेगी राहत?

हाईकोर्ट में जिन नियुक्तियों को लेकर विवाद चल रहा है, उनमें JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL, CDPO और Food Safety Officer (FSO) जैसी भर्तियां शामिल हैं। इन परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त अभ्यर्थियों को सरकार के नियुक्ति रद्द करने के फैसले के बाद नौकरी जाने की चिंता थी।

अदालत की ओर से फिलहाल नियुक्तियों को रद्द करने वाली सरकारी अधिसूचना पर रोक जारी रखने का फैसला किया गया है। इसलिए अगली सुनवाई तक चयनित कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं होगा।

सरकार ने कोर्ट में दाखिल किया जवाब

शुक्रवार की सुनवाई में राज्य सरकार ने अपना शपथ पत्र अदालत के समक्ष पेश किया। अब याचिकाकर्ताओं को इस जवाब पर अपना प्रति-उत्तर दाखिल करना है। इसके बाद अदालत मामले के अलग-अलग पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी।

15 सितंबर की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए सीमित समय दिया था। उस समय सरकार की ओर से अतिरिक्त समय की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने चार सप्ताह की मांग स्वीकार नहीं की और 48 घंटे में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

जांच की निगरानी करेंगे रिटायर्ड जज

मामले में केवल नियुक्तियों का सवाल ही नहीं है, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच भी महत्वपूर्ण है. इसी को देखते हुए हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया की निगरानी की व्यवस्था की है.

रिपोर्टों के मुताबिक, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को जांच की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं जांच के लिए एक नोडल अधिकारी की व्यवस्था भी की गई है. अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच के दौरान किसी ऐसे चयनित अभ्यर्थी को अनावश्यक परेशानी न हो, जिसके खिलाफ व्यक्तिगत स्तर पर कोई दोष स्थापित नहीं हुआ है.

अदालत की कार्यवाही से यह भी स्पष्ट है कि जांच में कथित अनियमितताओं और सभी चयनित अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता. रिपोर्टों में अदालत की यह टिप्पणी भी सामने आई है कि सभी नियुक्तियों को एक साथ गलत नहीं माना जा सकता.

आखिर क्या है पूरा विवाद?

झारखंड में JPSC और JSSC की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर विवाद चल रहा है. इस बीच राज्य सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों के संबंध में कार्रवाई की थी.

सरकार के इस फैसले से उन अभ्यर्थियों की नौकरी पर असर पड़ने की आशंका पैदा हुई, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति प्राप्त की थी और अपने पदों पर काम कर रहे हैं. इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

20 अगस्त के आसपास हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार के नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाई थी. बाद की सुनवाइयों में भी यह राहत जारी रही.

छात्र आंदोलन और चयनित अभ्यर्थियों के बीच अलग-अलग चिंता

इस पूरे विवाद में दो अलग पक्षों की चिंताएं सामने आई हैं. एक तरफ प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठी है, दूसरी तरफ परीक्षा पास करके नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो उसका असर उन सभी लोगों पर नहीं डाला जाना चाहिए, जिनके खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर कोई आरोप या दोष साबित नहीं हुआ है.

इसी वजह से हाईकोर्ट के सामने जांच और नियुक्तियों की वैधता के साथ-साथ प्राकृतिक न्याय का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है. अदालत ने पिछली सुनवाइयों में नियुक्त अभ्यर्थियों को बिना उचित प्रक्रिया अपनाए हटाने के सवाल पर भी विचार किया है.

7 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी नजर

फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार के नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर रोक जारी रखी है. चयनित अभ्यर्थियों को अगली सुनवाई तक राहत मिली हुई है और वे अपने पदों पर काम जारी रख सकेंगे.

अब 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी. उस दौरान सरकार के शपथ पत्र, याचिकाकर्ताओं के प्रति-उत्तर और जांच से जुड़े पहलुओं पर अदालत आगे विचार कर सकती है. हालांकि, अंतिम रूप से नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रिया की वैधता पर फैसला अभी नहीं हुआ है.

इसलिए फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों के लिए स्थिति यह है कि नौकरी रद्द करने का सरकारी आदेश प्रभावी नहीं है और हाईकोर्ट की अंतरिम रोक जारी है.

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