4 मेडिकल कॉलेजों में 91% आरक्षण पर रोक, मायावती की SC में जाने की मांग

UP Medical Colleges Mayawati लखनऊ : उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS दाखिले के लिए लागू की गई करीब 91 फीसदी आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवाद बढ़ गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस व्यवस्था के अमल पर रोक लगाते हुए फिलहाल सामान्य वैधानिक आरक्षण व्यवस्था के तहत काउंसलिंग जारी रखने की अनुमति दी है. अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार से हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की मांग की है.

मामला अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में NEET-UG के जरिए MBBS दाखिले से जुड़ा है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन कॉलेजों में दाखिले के लिए फिलहाल SC के लिए 21%, ST के लिए 2% और OBC के लिए 27% आरक्षण के आधार पर काउंसलिंग आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि काउंसलिंग के जरिए होने वाले दाखिले मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे.

UP Medical Colleges Mayawati:91% आरक्षण की व्यवस्था पर क्यों उठा विवाद?

मामले की जड़ इन चार मेडिकल कॉलेजों में राज्य कोटे की सीटों के लिए तैयार की गई सीट मैट्रिक्स में है. अदालत के सामने पेश रिकॉर्ड के अनुसार चारों कॉलेजों में राज्य कोटे की कुल 340 सीटों में 248 सीटें SC, 20 ST और 44 OBC के लिए आरक्षित थीं, जबकि 28 सीटें अनारक्षित थीं. यानी इन सीटों में आरक्षित वर्गों के लिए हिस्सेदारी करीब 91 प्रतिशत बन रही थी.

यह व्यवस्था सामान्य राज्य आरक्षण व्यवस्था से अलग थी. इसी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. अदालत के समक्ष यह सवाल उठा कि राज्य कोटे की MBBS सीटों पर इस तरह की आरक्षण व्यवस्था उत्तर प्रदेश के संबंधित आरक्षण कानून और लागू संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप है या नहीं.

काउंसलिंग पर कोर्ट ने क्या कहा?

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 91 फीसदी आरक्षण वाली व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाई है. हालांकि, इससे मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया पूरी तरह रोक नहीं दी गई है.

अदालत ने राज्य सरकार को अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू आरक्षण प्रतिशत के आधार पर काउंसलिंग जारी रखने की अनुमति दी है. इसके तहत SC 21%, ST 2% और OBC 27% आरक्षण के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. हालांकि, इन दाखिलों का अंतिम परिणाम हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही के फैसले के अधीन रहेगा.

मायावती ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद मायावती ने शुक्रवार को यूपी सरकार से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग की. उनका कहना है कि यदि सरकार ने हाईकोर्ट में यह स्पष्ट तरीके से दलील रखी होती कि इन मेडिकल कॉलेजों की स्थापना में SC वर्ग के लिए निर्धारित स्पेशल कंपोनेंट प्लान (SCP) के फंड का इस्तेमाल हुआ था, तो मामले को अलग नजरिए से देखा जा सकता था.

मायावती के मुताबिक, इन कॉलेजों में SC वर्ग के लिए अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था को सामान्य 50 फीसदी आरक्षण सीमा से अलग व्यवस्था के रूप में अदालत के सामने मजबूती से रखा जाना चाहिए था. उन्होंने सरकार की कानूनी पैरवी को लेकर भी सवाल उठाए और अब सुप्रीम कोर्ट में अपील की मांग की है.

किन चार मेडिकल कॉलेजों का मामला?

विवाद जिन संस्थानों में MBBS दाखिले से संबंधित है, उनमें शामिल हैं:

  • राजकीय मेडिकल कॉलेज, अंबेडकरनगर
  • राजकीय मेडिकल कॉलेज, कन्नौज
  • राजकीय मेडिकल कॉलेज, जालौन
  • राजकीय मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर

अदालत के रिकॉर्ड में इन कॉलेजों की स्थापना और इनके लिए विशेष योजना के तहत उपलब्ध कराए गए फंड तथा पूर्व में तय आरक्षण व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है. 2025 के एक विस्तृत आदेश में अदालत के सामने यह जानकारी रखी गई थी कि कुछ कॉलेजों की स्थापना के लिए Special Component Plan से धनराशि मिली थी और शुरुआती सरकारी आदेशों में SC/ST, OBC और सामान्य वर्ग के लिए अलग अनुपात निर्धारित किया गया था.

पहले भी कोर्ट में उठा था मामला

 दरअसल ये विवाद नया नहीं है. इससे पहले भी इन चार मेडिकल कॉलेजों में विशेष आरक्षण व्यवस्था को लेकर अदालत में मामला पहुंचा था. 2025 के अदालती रिकॉर्ड में चारों कॉलेजों की सीट मैट्रिक्स और विशेष योजना के तहत तय आरक्षण का विस्तृत उल्लेख किया गया था. उस समय भी यह सवाल उठा था कि इन कॉलेजों में सामान्य आरक्षण व्यवस्था से अलग अधिक आरक्षण किस कानूनी आधार पर लागू किया जा सकता है.

मौजूदा मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि राज्य सरकार ने पिछली कार्यवाही के दौरान आरक्षण व्यवस्था को वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप करने का आश्वासन दिया था, लेकिन मौजूदा शैक्षणिक सत्र में फिर से करीब 91 फीसदी आरक्षण वाली व्यवस्था सामने आ गई.

अपर मुख्य सचिव को भी नोटिस

हाईकोर्ट ने मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को शो-कॉज नोटिस भी जारी किया है. अदालत ने पूछा है कि पिछली कार्यवाही में दिए गए आश्वासन के अनुपालन के संबंध में उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए.

इससे साफ है कि मामला केवल आरक्षण प्रतिशत तक सीमित नहीं है, बल्कि अदालत के सामने सरकार की पिछली प्रतिबद्धता और उसके अनुपालन का सवाल भी है.

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण चार मेडिकल कॉलेजों में 91 फीसदी आरक्षण वाली व्यवस्था लागू नहीं हो सकेगी. काउंसलिंग को 21% SC, 2% ST और 27% OBC के आधार पर आगे बढ़ाने की अनुमति है. हालांकि, दाखिले अंतिम न्यायिक फैसले के अधीन रहेंगे.

अब राजनीतिक स्तर पर मायावती ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग की है. यदि राज्य सरकार इस मामले में आगे कानूनी चुनौती देती है, तो सुप्रीम कोर्ट में मुख्य सवाल यह होगा कि विशेष योजना के तहत स्थापित इन मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था का कानूनी आधार क्या है और क्या उसे सामान्य आरक्षण व्यवस्था से अलग माना जा सकता है.

फिलहाल अंतिम स्थिति अदालतों के अगले आदेशों पर निर्भर है.इसलिए MBBS दाखिले की प्रक्रिया में शामिल छात्रों के लिए हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश महत्वपूर्ण बना हुआ है.

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