Sridevi Property Dispute:दिवंगत बॉलीवुड अभिनेत्री श्रीदेवी की चेन्नई स्थित पारिवारिक संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. करीब 4.77 एकड़ जमीन से जुड़े इस मामले में शीर्ष अदालत ने पक्षकारों को आपसी बातचीत और मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने का सुझाव दिया है। कोर्ट ने संपत्ति की मौजूदा स्थिति बनाए रखने का निर्देश भी दिया है.
मामले की सुनवाई जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की पीठ के समक्ष हुई. उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड और रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद चेन्नई के शोलिंगनल्लूर इलाके में स्थित उस जमीन से जुड़ा है, जिसे श्रीदेवी, उनकी मां और बहन ने 1988 में अलग-अलग सेल डीड के जरिए खरीदा था.
Sridevi Property Dispute:1988 में खरीदी गई थी जमीन
यह संपत्ति चेन्नई के शोलिंगनल्लूर गांव और ईस्ट कोस्ट रोड के आसपास के इलाके में स्थित है. रिकॉर्ड के मुताबिक, 19 अप्रैल 1988 को संबंधित जमीन के एक हिस्से की बिक्री से जुड़े दस्तावेज सामने आए थे. बाद में श्रीदेवी और उनके परिवार से जुड़े अन्य दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति का स्वामित्व कपूर परिवार के पक्ष में दर्ज रहा.
श्रीदेवी का फरवरी 2018 में निधन हो गया था. इसके बाद संपत्ति से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में उनके पति बोनी कपूर और बेटियों जाह्नवी कपूर तथा खुशी कपूर के नाम दर्ज किए गए. इस संपत्ति से जुड़ा एक हिस्सा कपूर परिवार के फार्महाउस के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है.
कहां से शुरू हुआ संपत्ति विवाद?
विवाद तब सामने आया जब एम.सी. शिवकामी, एम.सी. नटराजन और उनकी मां चंद्रभानु ने चेंगलपट्टू की अदालत में मुकदमा दायर किया. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि विवादित जमीन मूल रूप से उनके परिवार के सदस्य एम.सी. संबंद मुदलियार से जुड़ी थी.
उनका दावा है कि एम.सी. संबंद मुदलियार ने 1943 में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी थी और बाद में पारिवारिक उत्तराधिकार के आधार पर याचिकाकर्ताओं का भी इस संपत्ति में हिस्सा बनता है. उन्होंने 1988 में हुए जमीन के लेन-देन को चुनौती देते हुए संपत्ति में 1/5 हिस्सेदारी का दावा किया.
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से संबंधित बिक्री दस्तावेजों को रद्द करने और संपत्ति का बंटवारा करने की मांग की थी.
बोनी कपूर और बेटियों ने दी चुनौती
मामले में कपूर परिवार की ओर से निचली अदालत में चल रही कार्यवाही को चुनौती दी गई. बोनी कपूर और उनकी बेटियों जाह्नवी कपूर तथा खुशी कपूर ने दलील दी कि दशकों पुराने लेन-देन को इतने लंबे समय बाद चुनौती देना कानूनन स्वीकार्य नहीं है.
कपूर परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ताओं के दावे से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य पहले की कानूनी कार्यवाही में सामने आ चुके थे और उनके उत्तराधिकारी होने के दावे को लेकर भी कानूनी सवाल उठ चुके हैं.
मद्रास हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
अप्रैल 2026 में मद्रास हाई कोर्ट की जस्टिस टी.वी. थामिलसेल्वी की पीठ ने कपूर परिवार के पक्ष में फैसला देते हुए निचली अदालत में दायर मुकदमे को खारिज कर दिया था.
हाई कोर्ट ने माना था कि 1988 में हुए लेन-देन को लगभग चार दशक बाद चुनौती दी गई. अदालत ने लिमिटेशन यानी मुकदमा दायर करने की निर्धारित कानूनी समय-सीमा का भी उल्लेख किया. हाई कोर्ट के मुताबिक, इतने लंबे अंतराल के बाद बिक्री दस्तावेजों को चुनौती देने का दावा कानून की कसौटी पर टिकता नहीं है.
अदालत ने याचिकाकर्ताओं के उत्तराधिकारी होने के दावे और पहले की कार्यवाही से जुड़े तथ्यों को भी अपने आदेश में महत्वपूर्ण माना था. हाई कोर्ट ने कहा था कि मुकदमे को आगे बढ़ाना कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग की स्थिति पैदा कर सकता है.
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?
मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के बाद एम.सी. शिवकामी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
उनकी ओर से दलील दी गई कि हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर गहराई से विचार करते हुए ऐसा किया, जो उनके मुताबिक ट्रायल कोर्ट के स्तर पर साक्ष्यों की जांच के बाद होना चाहिए था. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके दावे को केवल प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए था.
उन्होंने उत्तराधिकार से जुड़े अपने दावों और परिवार की वंशावली से संबंधित तर्क भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे.
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का रास्ता सुझाया
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ ने पक्षकारों के बीच आपसी समाधान की संभावना तलाशने पर जोर दिया. अदालत ने संकेत दिया कि किसी पूर्व हाई कोर्ट जज को मध्यस्थ नियुक्त कर पक्षकारों के बीच बातचीत कराई जा सकती है.
मध्यस्थता का उद्देश्य अदालत के बाहर बातचीत के जरिए विवाद का समाधान तलाशना है. इसका मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति के स्वामित्व पर अंतिम फैसला सुना दिया है. फिलहाल विवाद का कानूनी समाधान लंबित है.
जमीन की मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश भी दिया है. इसका अर्थ है कि अगली सुनवाई तक विवादित संपत्ति की मौजूदा स्थिति में ऐसा कोई बदलाव नहीं किया जाएगा जिससे मामले में किसी पक्ष के अधिकार प्रभावित हों.
संपत्ति विवाद से जुड़े इस मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को प्रस्तावित है. तब तक मध्यस्थता की प्रक्रिया और पक्षकारों के बीच संभावित समझौते की दिशा में हुई प्रगति भी महत्वपूर्ण रहेगी.
4.77 एकड़ जमीन क्यों बनी चर्चा का विषय?
श्रीदेवी के निधन के बाद उनकी संपत्ति और विरासत से जुड़े मामले समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. चेन्नई की यह जमीन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह श्रीदेवी के शुरुआती पारिवारिक संपत्ति संबंधों से जुड़ी बताई जाती है और अब उनके पति बोनी कपूर तथा बेटियों से जुड़े स्वामित्व रिकॉर्ड के बीच दूसरे पक्ष ने हिस्सेदारी का दावा किया है.
हालांकि, इस मामले में अंतिम स्वामित्व अधिकार को लेकर अभी सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आया है. मद्रास हाई कोर्ट पहले ही निचली अदालत में दायर मुकदमे को खारिज कर चुका है, जबकि अब सुप्रीम कोर्ट ने पक्षकारों को मध्यस्थता के जरिए समाधान तलाशने का अवसर दिया है.

