UPI tax : नई दिल्ली: UPI पेमेंट को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक सवाल तेजी से चर्चा में है—क्या अब ₹2,000 से ज्यादा का UPI पेमेंट करने पर 0.5 फीसदी टैक्स या चार्ज देना होगा? बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस के इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि फिलहाल ऐसा कोई सरकारी टैक्स या 0.5 फीसदी शुल्क लागू नहीं किया गया है.
दरअसल, 14 सितंबर 2026 को भुगतान व्यवस्था से जुड़े नियमों में बदलाव के बाद ₹2,000 तक के कुछ डिजिटल लेनदेन पर शुल्क लगाने पर रोक को स्पष्ट किया गया है. इसके बाद यह चर्चा शुरू हुई कि क्या ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजेक्शन पर अब शुल्क लगाया जा सकेगा. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार और भुगतान क्षेत्र की कंपनियों के बीच बड़े UPI मर्चेंट पेमेंट पर संभावित शुल्क को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन दर और व्यवस्था अभी अंतिम नहीं हुई है.
UPI tax: 0.5 फीसदी UPI टैक्स की बात कितनी सही?
अमित मालवीय ने उस दावे को खारिज किया है जिसमें कहा जा रहा है कि ₹2,000 से ज्यादा के हर UPI भुगतान पर 0.5 फीसदी टैक्स लगेगा.
उनके मुताबिक अगर केवल गणित के तौर पर 0.5 फीसदी दर मान ली जाए तो ₹5,000 के भुगतान पर ₹25 और ₹10,000 के भुगतान पर ₹50 बनते हैं लेकिन यह किसी मौजूदा सरकारी शुल्क सूची का हिस्सा नहीं है.
यानी फिलहाल ₹5,000 या ₹10,000 का UPI पेमेंट करने पर सरकार की ओर से 0.5 फीसदी टैक्स काटे जाने का कोई नियम लागू नहीं हुआ है.
फिर ₹2,000 की सीमा क्यों चर्चा में है?
असल में हालिया नियामकीय बदलाव ने UPI और डिजिटल पेमेंट के शुल्क ढांचे को लेकर एक नई स्थिति पैदा की है। Reuters के मुताबिक नए नियमों के तहत ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर बैंकों द्वारा शुल्क लगाने पर रोक बरकरार है, जबकि इससे अधिक के लेनदेन के लिए शुल्क की संभावना का रास्ता खुला है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ₹2,000 से ऊपर के हर UPI भुगतान पर शुल्क तत्काल लागू हो गया है।
वित्तीय सेवा विभाग की मौजूदा व्यवस्था में भी ₹2,000 तक के BHIM-UPI P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी भुगतान को लेकर सरकार की प्रोत्साहन व्यवस्था का उल्लेख है।
बड़े मर्चेंट पेमेंट पर MDR की हो रही चर्चा
पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा MDR यानी Merchant Discount Rate है.यह समझना जरूरी है कि MDR और सरकारी टैक्स एक ही चीज नहीं हैं.
Reuters के अनुसार भुगतान कंपनियों और बैंकों के साथ ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर संभावित शुल्क को लेकर बातचीत चल रही है. रिपोर्ट में करीब 0.4 फीसदी की संभावित दर का जिक्र है, लेकिन यह अभी अंतिम सरकारी दर नहीं है.
इसका मतलब यह हुआ कि फिलहाल चर्चा मुख्य रूप से दुकानदार या कारोबारी को किए जाने वाले बड़े UPI भुगतान पर संभावित शुल्क को लेकर है, न कि हर आम UPI यूजर से सीधे टैक्स वसूलने को लेकर.
क्या दोस्त या परिवार को पैसे भेजने पर भी चार्ज लगेगा?
अभी ऐसा कोई नियम सामने नहीं आया है कि किसी व्यक्ति को ₹5,000, ₹10,000 या इससे अधिक UPI भेजने पर 0.5 फीसदी सरकारी टैक्स देना पड़ेगा.
P2P यानी Person-to-Person भुगतान और P2M यानी Person-to-Merchant भुगतान के बीच अंतर करना यहां बेहद जरूरी है. संभावित MDR की चर्चा मुख्य रूप से मर्चेंट पेमेंट को लेकर है.
इसलिए दोस्त, रिश्तेदार या परिवार के किसी सदस्य को UPI से पैसे भेजने पर ₹2,000 की सीमा पार करते ही 0.5 फीसदी टैक्स कटने की बात फिलहाल सही नहीं है.
सरकार UPI को बढ़ावा देने के लिए देती रही है इंसेंटिव
भारत में UPI को कम लागत वाला डिजिटल पेमेंट माध्यम बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से प्रोत्साहन योजनाएं भी चलाई जाती रही हैं.
वित्तीय सेवा विभाग के अनुसार सरकार ने RuPay डेबिट कार्ड और ₹2,000 तक के BHIM-UPI P2M ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव योजना लागू की है. इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सिस्टम ऑपरेटरों और ऐप प्रोवाइडरों को प्रोत्साहित करना रहा है.
यानी UPI के मौजूदा मॉडल में सरकार की नीति केवल शुल्क वसूली तक सीमित नहीं रही है, बल्कि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय समर्थन भी दिया गया है.
0.5 फीसदी और 0.4 फीसदी में क्या है फर्क?
सोशल मीडिया पर 0.5 फीसदी शुल्क को लेकर जो गणना वायरल हो रही है, वह अभी काल्पनिक दर पर आधारित है. दूसरी तरफ Reuters ने संभावित MDR के तौर पर करीब 0.4 फीसदी की चर्चा का उल्लेख किया है लेकिन दोनों ही बातों को मौजूदा अनिवार्य सरकारी टैक्स समझना सही नहीं होगा.
जब तक सरकार, RBI या संबंधित भुगतान व्यवस्था की ओर से अंतिम दर और उसे लागू करने का तरीका स्पष्ट नहीं किया जाता, तब तक ₹2,000 से ऊपर के हर UPI भुगतान पर कोई निश्चित प्रतिशत शुल्क लगने की बात कहना जल्दबाजी होगी.
UPI यूजर्स के लिए अभी क्या है असली स्थिति?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹2,000 से अधिक UPI भुगतान पर 0.5 फीसदी सरकारी टैक्स लागू होने की खबर सही नहीं है. नए नियमों ने बड़े मर्चेंट UPI भुगतान पर भविष्य में MDR लागू करने की संभावना जरूर बढ़ाई है. इस मुद्दे पर बैंकों, पेमेंट कंपनियों और संबंधित पक्षों के बीच चर्चा चल रही है.

