UCC Uttar Pradesh : लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता यानी UCC (Uniform Civil Code) को लेकर सियासी हलचल तेज होती दिखाई दे रही है. योगी सरकार में मंत्री और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने UCC को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उनकी सरकार इसे लागू करने के लिए तैयार है. उनके इस बयान के बाद यूपी में चुनाव से पहले UCC लागू किए जाने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है.
#WATCH | Lucknow, UP | On Union Home Minister Amit Shah saying UCC in all 21 NDA states before 2029, BJP leader Bhupendra Singh Chaudhary says, “When the manifesto was released on April 14, 2024, our party prominently included the issue of the Uniform Civil Code (UCC)… Our… pic.twitter.com/dtjPDHbsZ6
— ANI (@ANI) September 15, 2026
भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के दौरान जारी अपने संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता को प्रमुखता से शामिल किया था. उन्होंने कहा कि पार्टी की प्रतिबद्धता UCC को लेकर स्पष्ट है और सरकार इसे लागू करने के लिए तैयार है.
हालांकि, भूपेंद्र चौधरी ने UCC लागू करने की कोई निश्चित तारीख या समयसीमा नहीं बताई है. इसलिए उनके बयान को फिलहाल सरकार की तैयारी और बीजेपी की राजनीतिक प्राथमिकता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
UCC Uttar Pradesh : महिलाओं के अधिकारों का दिया हवाला
UCC के समर्थन में भूपेंद्र चौधरी ने महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि बीजेपी का मानना है कि जब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं होती, तब तक महिलाओं को उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा और अधिकार देना संभव नहीं है.
बीजेपी नेता का तर्क है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की वजह से नागरिक मामलों में अलग-अलग व्यवस्थाएं मौजूद हैं. UCC के जरिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दूसरे व्यक्तिगत मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करने की बात की जाती है.
अमित शाह के बयान के बाद यूपी में बढ़ी हलचल
UCC को लेकर भूपेंद्र चौधरी का बयान ऐसे समय आया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में NDA शासित राज्यों में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही है.
अमित शाह के बयान के बाद बीजेपी शासित और NDA के राज्यों में UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है. उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ 2027 में विधानसभा चुनाव का सामना करने जा रहा है, ऐसे में यहां UCC का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
क्या 2027 चुनाव से पहले लागू होगा UCC?
भूपेंद्र चौधरी के बयान से यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या योगी सरकार 2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में UCC लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकती है.
हालांकि, फिलहाल उपलब्ध बयान में सरकार की ओर से कानून लागू करने की कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है. उत्तर प्रदेश में UCC लागू करने के लिए विधायी प्रक्रिया, प्रारूप तैयार करने और विभिन्न पक्षों से जुड़े कानूनी एवं सामाजिक पहलुओं पर विचार की जरूरत होगी.
बीजेपी के एजेंडे में लंबे समय से UCC
समान नागरिक संहिता बीजेपी के प्रमुख वैचारिक और चुनावी मुद्दों में शामिल रही है. 2024 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में भी पार्टी ने UCC का वादा किया था. अब केंद्र की ओर से NDA शासित राज्यों में इसे आगे बढ़ाने की बात सामने आने के बाद राज्य स्तर पर भी इसकी चर्चा बढ़ रही है.
उत्तराखंड देश में UCC लागू करने वाला पहला राज्य बना था. इसके बाद कुछ अन्य बीजेपी शासित राज्यों ने भी इसकी दिशा में कदम बढ़ाए हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी.
यूपी की सियासत में क्या होगा असर?
अगर उत्तर प्रदेश में UCC को लेकर सरकार कोई ठोस कदम उठाती है तो इसका असर 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीति पर पड़ सकता है. बीजेपी इसे समानता और महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर पेश कर सकती है, जबकि विपक्ष इसके प्रावधानों, सामाजिक प्रभाव और विभिन्न समुदायों पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठा सकता है.
फिलहाल भूपेंद्र चौधरी का बयान इतना जरूर स्पष्ट करता है कि UCC बीजेपी और योगी सरकार के एजेंडे से बाहर नहीं हुआ है. अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार इसे लेकर कब औपचारिक प्रक्रिया शुरू करती है और क्या विधानसभा चुनाव से पहले इस पर कोई ठोस फैसला सामने आता है.

