BCCI का नया नियम: मैच खेलोगे तभी मिलेगा सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट? खिलाड़ियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

BCCI Central Contract : नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अपने खिलाड़ियों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रहा है. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो टीम इंडिया के खिलाड़ियों के लिए सिर्फ शानदार प्रदर्शन और सीनियरिटी ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि मैचों के लिए उपलब्धता और फिटनेस भी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में अहम भूमिका निभा सकती है.

 खबरों के मुताबिक बोर्ड के स्तर पर फिलहाल इस प्रस्ताव पर अभी शुरुआती बातचीत चल रही है. इसका मकसद खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा समय तक फिट रखना और टीम के लिए उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

BCCI Central Contract: क्या है BCCI का नया प्रस्ताव?

मौजूदा व्यवस्था में खिलाड़ियों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का निर्धारण कई पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाता है. इनमें खिलाड़ी का प्रदर्शन, टीम में भूमिका, अनुभव और पिछले प्रदर्शन जैसे कारक अहम होते हैं.

अब BCCI इस व्यवस्था में मैचों के लिए उपलब्धता को भी एक महत्वपूर्ण मानदंड के तौर पर शामिल करने पर विचार कर रहा है.

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, बोर्ड ऐसा फॉर्मूला तैयार करने पर विचार कर रहा है, जिसमें पूरे सीजन के दौरान खिलाड़ी की फिटनेस और टीम के लिए उसकी उपलब्धता का आकलन किया जा सके.

कितने मैच खेलने होंगे?

फिलहाल यह तय नहीं हुआ है कि अगर नया नियम आता है तो खिलाड़ी को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए कितने मैचों के लिए उपलब्ध रहना होगा.

संभावना है कि BCCI एक न्यूनतम सीमा तय करे. यानी किसी खिलाड़ी को एक सीजन में निर्धारित संख्या में मैचों के लिए उपलब्ध रहना जरूरी हो सकता है.

हालांकि, यह अभी केवल विचार के स्तर पर है। BCCI ने इस संबंध में कोई अंतिम नियम या आधिकारिक संख्या घोषित नहीं की है.

चोटिल खिलाड़ियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

इस प्रस्ताव की चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय क्रिकेट टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी चोट और फिटनेस संबंधी समस्याओं के कारण अलग-अलग मौकों पर टीम से बाहर रहे हैं.

क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए खिलाड़ियों की फिटनेस BCCI के लिए लगातार अहम मुद्दा बनी हुई है. बोर्ड चाहता है कि जो खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के लिए चुने जाते हैं, वे उपलब्ध रहने की स्थिति में ज्यादा से ज्यादा मुकाबले खेल सकें.

हालांकि, चोट जैसी परिस्थितियां खिलाड़ी के नियंत्रण में नहीं होतीं। ऐसे में यदि उपलब्धता को कॉन्ट्रैक्ट की शर्त बनाया जाता है, तो चोट के कारण बाहर रहने वाले खिलाड़ियों के लिए नियम किस तरह लागू होगा, यह बड़ा सवाल होगा.

क्या नियम लागू हो गया है?

नहीं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक BCCI ने अभी ऐसा कोई नियम लागू नहीं किया है.

आजतक के स्पोर्ट चैनल स्पोर्ट्स तक से बातचीत में BCCI के एक सूत्र ने बताया कि यह विचार अभी शुरुआती चरण में है. बोर्ड के भीतर इस पर चर्चा की जा रही है और यह देखा जा रहा है कि इस तरह की व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक और उचित होगा या नहीं.

खिलाड़ियों के लिए क्या बदल सकता है?

अगर BCCI भविष्य में इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो खिलाड़ियों के लिए सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की तस्वीर कुछ हद तक बदल सकती है.

खिलाड़ियों को प्रदर्शन के साथ-साथ अपनी फिटनेस और टीम के लिए उपलब्धता पर भी ज्यादा ध्यान देना होगा. खासकर ऐसे खिलाड़ी जो लगातार चोटिल होते हैं या व्यक्तिगत कारणों से कई मुकाबलों से बाहर रहते हैं, उनके लिए यह व्यवस्था चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

दूसरी तरफ BCCI का तर्क यह हो सकता है कि सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट पाने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम की योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं और इसलिए उनकी उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण मानदंड होनी चाहिए.

क्या सिर्फ मैच खेलना ही बनेगा कॉन्ट्रैक्ट की गारंटी?

ऐसा कहना फिलहाल सही नहीं होगा. प्रस्तावित व्यवस्था में भी खिलाड़ी का प्रदर्शन, टीम में उसकी भूमिका और अन्य मौजूदा मानदंड खत्म होंगे या नहीं, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है.

संभावित बदलाव का फोकस उपलब्धता को एक अतिरिक्त महत्वपूर्ण मानदंड बनाने पर है. यानी भविष्य में किसी खिलाड़ी का कॉन्ट्रैक्ट तय करते समय यह भी देखा जा सकता है कि वह चयन के योग्य होने के बावजूद कितने मुकाबलों के लिए उपलब्ध रहा.

BCCI क्यों करना चाहता है बदलाव?

भारतीय क्रिकेट का अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम लगातार व्यस्त है. टेस्ट, वनडे और टी20 के अलावा खिलाड़ियों पर घरेलू क्रिकेट और अन्य प्रतियोगिताओं का भी दबाव रहता है.

ऐसे में BCCI खिलाड़ियों की फिटनेस और वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर लगातार नई नीतियों पर विचार करता रहा है. सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट को खिलाड़ियों की उपलब्धता से जोड़ने का संभावित कदम भी इसी दिशा में देखा जा सकता है.

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि BCCI ने इस प्रस्ताव को अंतिम रूप नहीं दिया है. आने वाले समय में बोर्ड की चर्चा और निर्णय के बाद ही साफ होगा कि खिलाड़ियों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में उपलब्धता को किस तरह शामिल किया जाता है.

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