दिल्ली हाई कोर्ट ने MCD को सत्य निकेतन Satya Niketan में बिल्डिंग गिरने की घटना की सबसे ऊंचे एग्जीक्यूटिव लेवल पर जांच करने का निर्देश दिया है और इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया है.
गिरी बिल्डिंग सही और ज़रूरी परमिशन के साथ बनी थी या नहीं इसकी जांच करे MCD- HC
कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच में खास तौर पर यह देखा जाए कि गिरी हुई बिल्डिंग सही और ज़रूरी परमिशन के साथ बनाई गई थी या नहीं, अधिकारियों की तरफ से किसी भी गलती या नाकामी के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों की पहचान की जाए, और ज़िम्मेदार पाए गए लोगों के खिलाफ प्रस्तावित या की गई कार्रवाई का ब्यौरा दिया जाए.
कोर्ट ने MCD को यह भी निर्देश दिया कि वह एक हफ़्ते के अंदर अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी PG अकोमोडेशन का पूरी तरह से इंस्पेक्शन करे.
इंस्पेक्शन में यह देखा जाएगा कि क्या जगह ज़रूरी परमिशन और लागू बिल्डिंग बाय-लॉज़ के हिसाब से चलाई जा रही है, साथ ही हर PG अकोमोडेशन में रहने वाले स्टूडेंट्स की संख्या भी तय की जाएगी.
‘अगर… तो इसे टाला जा सकता था’: दिल्ली HC
कोर्ट ने कहा कि अगर अधिकारी सतर्क रहते और उन्हें सौंपी गई कानूनी ज़िम्मेदारियों को पूरी लगन से निभाते, तो ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना को, पहली नज़र में, टाला जा सकता था.
इन निर्देशों के अलावा, कोर्ट ने MCD से एक एफिडेविट फाइल करने को कहा, जिसमें बताया गया हो कि क्या दिल्ली में PG रहने की जगह और होटलों को कंट्रोल करने वाले कोई कानूनी या एग्जीक्यूटिव नियम हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी को भी एक एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें बताया गया हो कि उसके एफिलिएटेड कॉलेजों में कितने बाहर के स्टूडेंट्स को एडमिशन मिला है और कितने हॉस्टल यूनिवर्सिटी या सरकार चला रही है.
Satya Niketan मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को
मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी. सुनवाई के दौरान, केंद्र, दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और MCD की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अधिकारी बचाव अभियान में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.
उन्होंने कहा कि सरकार एक्टिवली स्थिति पर नज़र रख रही है और सभी संबंधित लोगों के हित में सभी फ़ैसले लेगी.
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