Dimagi Naxal:अपने शुरुआती दिनों से ही आरएसएस का एक ऐसा सिस्टम रहा है कि विजयादशमी यानी दशहरे पर उसके सर संघचालक जो भाषण देते हैं, उसे संघ के स्वयंसेवक के लिए पूरे साल की गाइडलाइंस माना जाता है. जब कम्युनिकेशन के इतने आसान तरीके नहीं थे तब से ये सिस्टम बना हुआ है और हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चूंकि संघ से ही भाजपा में आए हैं तो वो भी पीएम बनने के बाद से कुछ खास मौकों पर ऐसे ही शब्द देते आए हैं जिन्हें बीजेपी के पूरे सिस्टम यानी अध्यक्ष से लेकर आम कार्यकर्ता तक फॉलो करता है.
Dimagi Naxal-स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने दिया नया शब्द
आम तौर पर आरएसएस या बीजेपी में जब तक कोई नया शब्द नहीं आता, तब तक उसी शब्द से काम चलता रहता है. कई तरह के शब्द आए हैं. जैसे लुटियंस गैंग , खान मार्केट गैंग, आंदोलनजीवी, अर्बन नक्सल, कपड़ों से पहचानो और कुछ ऐसे शब्द जिन्हें पीएम के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं होता तो ऐसे शब्द अपने सिस्टम के जरिए डाले गए जैसे टुकड़े-टुकड़े गैंग, टूलकिट गैंग, अवॉर्ड वापसी गैंग…कुछ और ऐसे शब्द छूट भी गए होंगे, लेकिन इस बार लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा शब्द दे दिया जिसपर उनकी पार्टी के लोग ही सवाल उठाने लगे है.शब्द है- ‘दिमागी नक्सल’
भाजपा ने विरोधियों को दिया नया नाम !
उसके बाद से पूरी बीजेपी और बीजेपी का ईको सिस्टम अपने सारे विरोधियों को दिमागी नक्सल मान बैठा है और उनका इलाज करने की बात कह रहा है. चाहे वो कॉकरोच जनता पार्टी हो, कांग्रेस हो, आम आदमी पार्टी हो, टीएमसी हो या समाजवादी पार्टी. इतना ही नहीं, छात्रों और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को भी एक लाइन से दिमागी नक्सल करार दिया जा रहा है. जिस स्वतंत्र भारद्वाज को जंतर मंतर पर एक प्रदर्शनकारी का सिर फोड़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया है उसने भी ये कबूल किया है कि वो जंतर-मंतर पर दिमागी नक्सलियों का इलाज करने गया था लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि अब बीजेपी के अंदर से ही दिमागी नक्सल शब्द के खिलाफ आवाज उठी है.
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लिखा लेख और पूछा सवाल
बीजेपी के नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मुद्दे पर एक आर्टिकल लिखकर प्रधानमंत्री मोदी से कहा है कि ऐसा नहीं चल सकता. आपको बताना होगा कि दिमागी नक्सल है कौन?
कैप्टन ने दिमागी नक्सल शब्द पर ऐतराज करते हुए प्रधानमंत्री मोदी से कहा है कि इसे स्पष्ट रूप से परिभाषित करें.
उन्होंने लिखा कि- नक्सली संगठन सिर्फ बंदूक उठाने वाले कैडरों के भरोसे नहीं चलता. इस भर्ती के लिए फंडिंग,प्रचार,पनाह और लॉजिस्टिक्स से जुड़े लोग भी नेटवर्क तक मदद पहुंचाते हैं. साजिश रचने में मदद करते हैं. उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूर होनी चाहिए लेकिन नौकरी की मांग करने वाले युवा, परीक्षा के लिए प्रदर्शन करने वाले छात्र, सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले आम लोग या फिर किसान मात्र विरोध करने पर दिमागी नक्सल नहीं हो जाते. किसी को सिर्फ उसकी असहमति या विरोध के आधार पर उग्रवादी मानना गलत होगा.
इस आर्टिकल से जाहिर है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह समझ रहे हैं कि दिमागी नक्सल वाले प्रोपेगैंडा के पीछे असली मकसद क्या है, वो ये भी जानते हैं कि इन 12 सालों में लेबल लगाकर लोगों को एक तरीके से बदनाम कर, गलत पहचान देकर निशाना बनाने का चलन रहा है, इसलिए उन्होंने इसी पर हमला किया है और साफ-साफ कहा है कि सरकार की आलोचना करना नक्सलवाद नहीं माना जा सकता. शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना भी नक्सलवाद नहीं है.कैप्टन ने अपने आर्टिकल के माध्यम से पूछा है कि ‘दिमागी नक्सलवाद की कैटेगरी कानूनी तरीके से जाहिर की जा रही असहमति से कैसे अलग है? नक्सल शब्द का इस्तेमाल हल्के में नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि राजनीतिक शब्द कभी-कभी अपने असली संदर्भ तक सीमित नहीं रहते. इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह साफ करना चाहिए कि दिमागी नक्सलवाद शब्द का क्या मतलब है?’
ये बिल्कुल सही बात है क्योंकि कोई ये साफ साफ नहीं बता रहा है कि दिमागी नक्सल कौन है और उन्हें अलग-थलग करने का क्या मतलब है, क्या तरीका है अलग थलग करने का.
मोदी सरकार ने आईपीसी यानी इंडियन पीनल कोड की जगह जो बीएनएस-भारतीय न्याय संहिता लागू की है उसमें दिमागी नक्सल कानूनन किसी अपराध की श्रेणी में नहीं आता.
पीएम मोदी ने जब अपने राजनीतिक विरोधियों को अर्बन नक्सल कहा, तब संसद में विपक्ष ने गृह मंत्री से पूछा था कि अर्बन नक्सल की परिभाषा क्या है? तो गृह मंत्री से जवाब आया था कि अर्बन नक्सल जैसी कोई चीज़ नहीं है, इसकी कोई परिभाषा नहीं है. इसलिए कैप्टन लिख रहे हैं कि दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल सरकार के आलोचकों या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के लिए नहीं किया जाना चाहिए.
सरकार से सवाल करना हर नागरिक का अधिकार – कैप्टन अमरिंदर सिंह
मतलब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस पूरे कैंपेन या नैरेटिव के गुब्बारे में एक ऐसा छेद कर दिया है जिससे पूरा गुब्बारा फुस्स हो गया है. उन्होंने पीएम मोदी से कहा है कि डेमोक्रेसी में सरकार की आलोचना करना या उससे सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है. संविधान और कानून का पालन करना सबके लिए जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ ये थोड़ी ही है कि नागरिकों को सरकार के प्रति बिना सवाल किए वफादारी दिखानी होगी. वो नागरिक है, एक लोकतांत्रिक देश का नागरिक है जिसके वोट से सरकार बनती है और हट जाती है, वो किसी राजा की प्रजा थोड़ी है जिसे हर कीमत पर राजा और उसके सिस्टम-पॉलिसी को मानना ही होगा.
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से जो भाषण दिया था उसमें साफ कहा था कि हथियारों वाला नक्सलवाद कमजोर हो चुका है,लेकिन दिमागी नक्सल अब भी अवसर की तलाश में हैं. इस भाषण के बाद ही विपक्ष ने इस शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे. उन्होंने ये खतरा जताया था कि पहले ही सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले युवाओं, बुद्धिजीवियों और विचारकों को निशाना बनाया जा रहा है. दिमागी नक्सल शब्द की आड़ में उन्हें और परेशान किया जाएगा. पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने तो इस शब्द का विरोध करते हुए एक्स पर खुद को गर्व से दिमागी नक्सल बताया था. इसलिए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पूछा है कि प्रधानमंत्री के लाल किले से बोले गए शब्दों का विशेष महत्व होता है. इसलिए आम नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि सरकार जिस श्रेणी की बात कर रही है,उसकी स्पष्ट परिभाषा क्या है.
कैप्टन अमरिंदर के लेख से बढ़ेगी भाजपा की परेशानी ?
पीएम मोदी के नैरेटिव के खिलाफ ये आवाज पंजाब से उठी है इसलिए भी ये बहुत गंभीर बात है क्योंकि पंजाब का जो सियासी मिजाज है वो आजतक बीजेपी के अनुकूल नहीं रहा है. बीजेपी दूसरे राज्यों में जो करती रही है वो वाला समीकरण पंजाब में कामयाब नहीं हो पाया है. जैसे बिहार में जेडीयू का पिछलग्गू बनकर वो सत्ता में आ गई या महाराष्ट्र में शिवसेना को तोड़कर सत्ता हासिल कर ली, हरियाणा में भी यही मॉडल बन गया है लेकिन वैसा पंजाब में नहीं हो पा रहा है. उसका लॉन्ग टर्म सहयोगी शिरोमणि अकाली अब बहुत कमजोर हो चुका है और बीजेपी वहां छोटे भाई से बड़ा भाई बनने की कोशिश कर रही है, इसलिए कैप्टन से लेकर कांग्रेस के कई नेताओं को तोड़ा गया है ताकि पंजाब को भी देश के बाकी राज्यों की तरह अपने सिस्टम से चलाया जा सके लेकिन कैप्टन का ये आर्टिकल बता रहा है कि बीजेपी और पीएम मोदी पंजाब को लेकर किसी तरह का कोई मुगालता ना पाले. पूर्व मुख्यमंत्री का ये लेख भाजपा के लिए पंजाब में परेशानी शबब बन सकता है .

