नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर पेपर लीक मामले में प्रदर्शन के दौरान दलित छात्रा निशु आजाद के पिता संजय पर हुए हमले के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कथित हमलावर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सांसद पप्पू यादव, नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद और कांग्रेस के कई नेता भी थाने पहुंचे और पुलिस प्रशासन पर ढिलाई बरतने का आरोप लगाया।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के बाद यह मामला अचानक चर्चा में आ गया। इस वीडियो में कथित हमलावर खुद को हमले से जोड़ते हुए राजनीतिक संपर्कों का हवाला दे रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने दिल्ली पुलिस से आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कौन है आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज?
कथित हमलावर स्वतंत्र भारद्वाज मूल रूप से बिहार के दरभंगा का निवासी है और दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला मिलने के बाद दिल्ली आया था। वह खुद को हिंदूवादी कार्यकर्ता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बताता है और ऑनलाइन मंचों पर सक्रिय रहता है।
सामने आए वीडियो में भारद्वाज कथित तौर पर संजय पर हमले का जिक्र करते हुए यह दावा करता सुना गया कि उसने निशु के पिता का सिर फोड़ा था और उन्हें 60 टांके लगे थे। वीडियो में वह इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 307 से जोड़ता है और दावा करता है कि दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा के फोन के बाद उसे छोड़ दिया गया था। इसके साथ ही वह चिराग पासवान को भी अपना बड़ा भाई बताता सुनाई देता है।
छात्रा निशु आजाद का कहना है कि जुलाई में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके पिता संजय पर जानलेवा हमला हुआ, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। निशु का आरोप है कि घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज होने और डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है।

