JSSC-CGL पेपर लीक केस में बड़ा खुलासा, 200 से ज्यादा सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ

JSSC CGL Paper Leak Case रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तर यानी JSSC-CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच लगातार आगे बढ़ रही है. सीआईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए तथ्य सामने आ रहे हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसी अब तक 200 से अधिक सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ कर चुकी है. इन अभ्यर्थियों से परीक्षा में उनकी सफलता, संपर्कों और कथित तौर पर पेपर लीक से जुड़े लिंक को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है.

JSSC CGL Paper Leak Case: 200 से ज्यादा सफल अभ्यर्थी CID के रडार पर

रिपोर्ट के मुताबिक सीआईडी उन सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ कर रही है, जिनके संबंध में स्वतंत्र स्रोतों या ई-मेल के माध्यम से शिकायतें अथवा संदिग्ध जानकारी प्राप्त हुई है. जांच टीम इन शिकायतों का सत्यापन कर रही है.

बुधवार को भी करीब 20 सफल अभ्यर्थियों से पूरे दिन पूछताछ की गई. इसके बाद गुरुवार को भी कुछ अभ्यर्थियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया. सीआईडी का फोकस यह पता लगाने पर है कि परीक्षा से पहले किसी अभ्यर्थी को प्रश्नपत्र या उसके हिस्से की जानकारी मिली थी या नहीं और यदि मिली थी तो वह जानकारी किस नेटवर्क के जरिए पहुंची.

महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ पूछताछ के दायरे में आने का मतलब यह नहीं है कि सभी अभ्यर्थी आरोपी हैं. जांच एजेंसी संदिग्ध परिस्थितियों और शिकायतों का सत्यापन कर रही है.

26 आरोपियों की गिरफ्तारी, जांच का दायरा बढ़ा

JSSC-CGL पेपर लीक मामले में सीआईडी की कार्रवाई भी तेज हुई है. एक रिपोर्ट के अनुसार अब तक 26 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 200 संदिग्धों तथा अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. हाल के दिनों में सफल अभ्यर्थियों की गिरफ्तारियां भी हुई हैं.

जांच एजेंसी अब केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है. परीक्षा एजेंसी से जुड़े लोगों, प्रश्नपत्र की छपाई, पैकेजिंग, सीलिंग और उसके सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है.

गुड़गांव से लेकर प्रश्नपत्र की छपाई तक जांच

सीआईडी की जांच में प्रश्नपत्र की पूरी यात्रा को महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक प्रश्नपत्र का प्रकाशन गुड़गांव में हुआ था. इसी सिलसिले में सीआईडी की टीम वहां भी जांच कर चुकी है.

जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर उसकी छपाई, सीलिंग और कोषागार में जमा होने तक किन-किन लोगों की पहुंच थी. इसी दौरान किसी स्तर पर प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग हुई या नहीं, यह जांच का अहम हिस्सा है.

सोमांश प्रकाश से पूछताछ में अहम जानकारी

इस मामले में सीआईडी ने सोमांश प्रकाश और उसके सहयोगी राहुल कुमार को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था. रिपोर्ट के मुताबिक सोमांश ने प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर उसके कथित लीक होने तक की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी है.

जांच एजेंसी अब इन बयानों को दूसरे आरोपियों और दस्तावेजों से मिलाकर देख रही है. इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित पेपर लीक की योजना किस स्तर पर बनी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे.

20 से ज्यादा फर्जी नियुक्तियों वाले सिंडिकेट का भी खुलासा

JSSC-CGL मामले की जांच में एक और गंभीर जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार सीआईडी को ऐसे कथित सिंडिकेट का पता चला है, जिसके जरिए 20 से अधिक अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का आरोप है.

जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क में शामिल लोगों की पहचान करने और यह पता लगाने में जुटी है कि इन नियुक्तियों के लिए कथित तौर पर किस तरह की व्यवस्था की गई थी. इस एंगल की जांच से मामला केवल पेपर लीक तक सीमित न रहकर कथित नियुक्ति सिंडिकेट तक पहुंचता दिखाई दे रहा है.

परीक्षा एजेंसी के कर्मचारियों की गिरफ्तारी ने बढ़ाए सवाल

इससे पहले सीआईडी ने JSSC-CGL पेपर लीक मामले में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी वेबेल के दो कर्मचारियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया था. दोनों कर्मचारियों के पास परीक्षा से जुड़े संवेदनशील कार्यों तक पहुंच होने की बात सामने आई थी.

इन गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि परीक्षा प्रक्रिया में किस स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हुई और क्या किसी अंदरूनी व्यक्ति ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र तक पहुंच उपलब्ध कराई.

सरकार पहले ही रद्द कर चुकी है JSSC-CGL परीक्षा

JSSC-CGL विवाद का राजनीतिक और प्रशासनिक असर भी बड़ा रहा है. छात्रों के लंबे आंदोलन के बीच झारखंड सरकार ने 17 अगस्त 2026 को JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला किया था. सरकार ने TDPL से जुड़ी परीक्षाओं और उससे संबंधित गतिविधियों की भी जांच कराने की घोषणा की थी.

सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए एक समिति गठित करने की बात भी कही थी. इससे साफ है कि मामला केवल एक परीक्षा की कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है.

TDPL कनेक्शन भी जांच के केंद्र में

जांच के दौरान TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL की भूमिका भी जांच के घेरे में आई है. एजेंसी के कामकाज, विभिन्न परीक्षाओं के संचालन और टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं.

रिपोर्टों में यह आरोप सामने आया है कि परीक्षा संचालन से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं में कथित तौर पर अनियमितताएं हुईं और कमीशन तथा टेंडर से जुड़े लेन-देन की भी जांच की जा रही है. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी.

अब आगे क्या होगा?

अब सीआईडी की जांच के सामने मुख्य सवाल तीन हैं—पहला, कथित पेपर लीक की वास्तविक शुरुआत कहां से हुई; दूसरा, प्रश्नपत्र तक किस-किस व्यक्ति की पहुंच थी; और तीसरा, क्या कथित तौर पर पहले से जानकारी पाने वाले अभ्यर्थियों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों के बीच कोई संगठित नेटवर्क था ?

200 से अधिक सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ और कथित फर्जी नियुक्तियों के नेटवर्क की जांच के बाद आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे हो सकते हैं.

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