UP Rain Update लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मानसून इस बार लगातार अपना असर दिखा रहा है. अगस्त में हुई रिकॉर्ड बारिश के बाद सितंबर की शुरुआत भी तेज बारिश के साथ हुई है. प्रदेश में अगस्त 2026 की बारिश ने कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। खास तौर पर प्रयागराज और बांदा में अगस्त की बारिश 1901 के बाद अब तक की सबसे अधिक रही. वहीं 1 सितंबर को भी प्रदेश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में कई स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है.
UP Rain Weather Update:125 साल बाद अगस्त में प्रयागराज-बांदा में इतनी बारिश
मौसम के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अगस्त 2026 के दौरान औसतन 291.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 235.5 मिलीमीटर है. यानी प्रदेश में अगस्त के दौरान सामान्य से करीब 24 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई.
अगस्त 2026 प्रदेश के लिए 21वीं सदी के सबसे अधिक बारिश वाले अगस्त में दूसरे स्थान पर रहा. इससे पहले वर्ष 2018 में अगस्त के दौरान 293.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रयागराज में अगस्त के दौरान 631.6 मिलीमीटर और बांदा में 646 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई. दोनों जिलों में 1901 से उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार अगस्त महीने में इससे अधिक बारिश कभी दर्ज नहीं की गई थी.
बंगाल की खाड़ी के सिस्टम ने बढ़ाई मानसूनी सक्रियता
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अगस्त में लगातार बारिश की सबसे बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव वाले क्षेत्र रहे. अगस्त के दौरान ऐसे सात लो-प्रेशर सिस्टम बने, जिनमें से तीन मजबूत होकर अवदाब में बदल गए.
इन मौसमी प्रणालियों के लगातार सक्रिय रहने से उत्तर प्रदेश में मानसून कमजोर नहीं पड़ा और अलग-अलग चरणों में प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश होती रही. इसका असर नदियों के जलस्तर, शहरी जलभराव और ग्रामीण इलाकों में भी देखने को मिला.
सितंबर के पहले दिन भी जमकर बरसे बादल
अगस्त के रिकॉर्ड के बाद सितंबर ने भी बारिश के साथ दस्तक दी. 1 सितंबर को प्रतापगढ़ के कुंडा में 147 मिलीमीटर और सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज में 140 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. इसके अलावा कानपुर, बांदा, आजमगढ़, गाजीपुर, चित्रकूट, रायबरेली और बरेली समेत कई इलाकों में भी अच्छी बारिश हुई.
कानपुर में अनकिंगहाट क्षेत्र में 129.6 मिलीमीटर, बांदा के बदौसा में 110.8 मिलीमीटर और आजमगढ़ में 101.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई.
लखनऊ में दो घंटे की बारिश ने बढ़ाई मुश्किल
राजधानी लखनऊ में भी सितंबर के पहले दिन बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया. सुबह से ही बादल छाए रहे और कई इलाकों में बारिश हुई. शाम के समय तेज बारिश के कारण कई सड़कों पर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई.
चिनहट में 59 मिलीमीटर, 1090 चौराहे पर 54 मिलीमीटर और राजभवन क्षेत्र में 45.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. जलभराव के कारण कई स्थानों पर यातायात की रफ्तार प्रभावित हुई. हालांकि बारिश के बाद तापमान में गिरावट आने से लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली.
आज 21 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के 21 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इनमें बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, रायबरेली, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर शामिल हैं.
इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर मेघगर्जन और वज्रपात की भी आशंका है. ऐसे में मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है.
अगले 3-4 दिन दक्षिणी और पूर्वी यूपी में ज्यादा बारिश
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन से चार दिनों तक दक्षिणी उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं. पूर्वी और दक्षिणी जिलों में कई स्थानों पर अच्छी बारिश होने की संभावना है.
इसके मुकाबले पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्यांचल में बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने का अनुमान है. यानी सितंबर में पूरे प्रदेश में बारिश का पैटर्न एक जैसा नहीं रहने वाला है.
सितंबर में कहां ज्यादा और कहां कम बारिश?
मौसम विभाग के मासिक पूर्वानुमान के मुताबिक सितंबर के दौरान दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है. मध्य और दक्षिणी हिस्सों में बारिश सामान्य के आसपास रहने की संभावना है.
वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया गया है. इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में पूर्वी और दक्षिणी यूपी के जिलों में बारिश और जलभराव का खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा बना रह सकता है.
बारिश से किसानों को राहत, लेकिन जलभराव और बाढ़ का खतरा भी
लगातार बारिश का असर खेती पर मिला-जुला हो सकता है. जहां पर्याप्त बारिश से खरीफ फसलों को फायदा मिल सकता है, वहीं अत्यधिक बारिश खेतों में जलभराव की समस्या पैदा कर सकती है. निचले इलाकों में फसलों को नुकसान और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका भी बनी रहती है.
उत्तर प्रदेश में पहले से कई इलाकों में नदियों के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति को लेकर प्रशासन निगरानी कर रहा है. ऐसे में अगले कुछ दिन मौसम और नदी-नालों के जलस्तर के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.
क्यों महत्वपूर्ण है इस बार का मानसून?
इस साल उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता का एक बड़ा कारण बंगाल की खाड़ी से लगातार बनने वाली मौसम प्रणालियां रही हैं. अगस्त में सात लो-प्रेशर सिस्टम बनने से बारिश का दौर बार-बार मजबूत हुआ.
अब सितंबर की शुरुआत में भी दक्षिणी और पूर्वी यूपी में बारिश जारी रहने के अनुमान ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. खासकर उन जिलों में जहां पहले से नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है, वहां भारी बारिश की स्थिति में बाढ़ और जलभराव की समस्या गंभीर हो सकती है.
उत्तर प्रदेश में सितंबर की शुरुआत ने यह संकेत दे दिया है कि मानसून अभी पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है. अगस्त में प्रयागराज और बांदा में 1901 के बाद रिकॉर्ड बारिश और सितंबर के पहले दिन प्रतापगढ़ व सोनभद्र में भारी बारिश ने मौसम की सक्रियता को स्पष्ट कर दिया है.
अगले तीन से चार दिन दक्षिणी और पूर्वी यूपी के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं. मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है.

