नोएडा| उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में डूब क्षेत्र (फ्लड प्लेन) के अंतर्गत आने वाले इलाकों में बिजली विभाग द्वारा चलाए जा रहे ताबड़तोड़ कार्रवाई के विरोध में स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। पिछले चार दिनों से बिजली विभाग द्वारा हजारों की संख्या में बिजली कनेक्शन काटे जाने से परेशान निवासियों ने विधायक पंकज सिंह के कार्यालय का जोरदार घेराव किया और अपनी पीड़ा साझा की।
किन इलाकों में की गई बिजली काटने की कार्रवाई?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिजली विभाग का यह अभियान मुख्य रूप से नोएडा के छिजारसी, चोटपुर और बेहलोलपुर जैसे डूब क्षेत्रों में चलाया गया है, जहाँ हजारों घरों की बिजली आपूर्ति ठप कर दी गई है। बिजली न होने के कारण इन इलाकों में रहने वाले आम लोगों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी गुजारने में भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि उन्होंने कई वर्ष पूर्व अपनी जमीनों और मकानों की रजिस्ट्री कराई थी और वे इन क्षेत्रों में लंबे समय से स्थायी रूप से निवास कर रहे हैं। ऐसे में अचानक की गई इस कार्रवाई से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
विधायक के समक्ष रखी गई प्रमुख माँगें
कार्यालय का घेराव करने पहुँचे स्थानीय नागरिकों ने विधायक के सामने अपनी मुख्य माँतें रखीं:
क्षेत्र के सभी निवासियों को शहर के अन्य हिस्सों की तरह नियमित और 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की जाए।
घरों में चल रही अस्थायी व्यवस्था को समाप्त कर वैध व पक्के बिजली मीटर उपलब्ध कराए जाएं।
प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि वे यहाँ लंबे समय से रह रहे हैं, इसलिए उन्हें उनकी मूलभूत सुविधाओं से वंचित न किया जाए। विधायक पंकज सिंह द्वारा इस मामले में उचित समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद सभी निवासी अपने घरों को वापस लौट गए।
अवैध मीटरों के खिलाफ बिजली विभाग का अभियान
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे बिजली विभाग का तर्क है कि डूब क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को लेकर एक बड़ी समस्या बनी हुई थी। इन अनधिकृत इलाकों में कुछ निजी सिंडिकेट्स द्वारा अवैध तरीके से सब-मीटर और अवैध नेटवर्क के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जा रही थी। इसी अवैध और अनियंत्रित बिजली वितरण के खिलाफ विभाग ने शिकंजा कसते हुए यह बड़ा अभियान चलाया है, जिसके तहत बड़े पैमाने पर अवैध कनेक्शन काटे गए हैं। प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर इस समस्या के स्थायी समाधान की तलाश की जा रही है ताकि वैध उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।

