मुरैना। मुरैना जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना के तहत एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां एक ही मजदूर की तस्वीर का इस्तेमाल अलग-अलग नामों से दो या दो से अधिक फर्जी जॉब कार्ड बनाने के लिए किया गया है।यह मामला मुख्य रूप से मुरैना के इमलिया गाँव और पोरसा जनपद पंचायत के विजयगढ़ जैसी ग्राम पंचायतों से जुड़ा हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ जिला कलेक्ट्रेट में लिखित आवेदन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।फर्जीवाड़े का मुख्य तरीका (Modus Operandi)तस्वीरों की हेराफेरी: जमीनी स्तर पर अधिकारियों और बिचौलियों ने एक ही मजदूर की अलग-अलग एंगल से फोटो खींची। इसके बाद उन तस्वीरों को अलग-अलग फर्जी नामों के जॉब कार्ड पर लगा दिया गया ताकि कागजों पर ज्यादा मजदूर दिखाए जा सकें।फर्जी हाजिरी और भुगतान: महिलाओं या अन्य ग्रामीणों को सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए कार्यस्थल पर बुलाया जाता था। इसके बाद नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप पर उनकी फर्जी हाजिरी लगा दी जाती थी और उनके नाम पर आने वाले पैसों का गबन कर लिया जाता था।मृतकों के नाम पर मजदूरी: इमलिया गाँव के एक शिकायतकर्ता धर्मवीर मौर्य के अनुसार, गाँव के मृतक और अनुपस्थित लोगों के जॉब कार्ड का भी दुरुपयोग कर सरकारी धन निकाला गया है।मामले में अब तक की कार्रवाई और स्थितिअधिकारियों पर आरोप: ग्रामीणों ने ग्राम रोजगार सहायक और सरपंचों पर सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। विजयगढ़ पंचायत के ग्राम रोजगार सहायक को पूर्व में भी दोषी पाए जाने पर हटाया गया था।प्रशासन का रुख: जनपद पंचायत पोरसा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने का आश्वासन दिया है।

