गॉल में भारतीय टीम का इम्तिहान, गिल के लिए आसान नहीं होगी जीत की राह

गॉल (श्रीलंका): पिछले चार सौ वर्षों से अधिक समय से कई साम्राज्यों के उत्थान और पतन का गवाह रहे ऐतिहासिक गॉल किले की प्राचीर के ठीक सामने अब नई पीढ़ी की भारतीय क्रिकेट टीम को अपना विजय साम्राज्य स्थापित करने की कड़ी चुनौती का सामना करना है। यदि भारतीय टीम को आगामी वर्ष जून के महीने में द ओवल में खेले जाने वाले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल मुकाबले में अपनी जगह पक्की करनी है, तो उसे श्रीलंकाई सरजमीं पर इस किले को उसी रणनीति के साथ फतह करना होगा, जिस प्रकार साल 1588 में पुर्तगालियों द्वारा निर्मित इस गॉल फोर्ट को 1649 में डच और 1796 में अंग्रेजों ने अपने अधिकार में लिया था।

हिन्द महासागर की भयंकर लहरों का डटकर मुकाबला करने वाले इस मजबूत गॉल फोर्ट को वर्ष 2004 की विनाशकारी सुनामी ने झकझोर कर रख दिया था। ठीक उसी तरह, गॉल अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के मैदान पर खेले गए अपने पिछले पांच में से तीन टेस्ट मुकाबले हारने वाली भारतीय टीम को भी श्रीलंकाई टीम के खिलाफ कुछ वैसी ही आक्रामक और दमदार वापसी करनी होगी। इसका मुख्य कारण यह है कि मेजबान श्रीलंका ने इस मैदान पर खेले गए कुल 49 टेस्ट मैचों में से 27 मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की है, जबकि उन्हें यहां मात्र 15 मैचों में हार का मुंह देखना पड़ा है।

आलोचनाओं के घेरे में टीम और कोच गौतम गंभीर

मौजूदा समय में भारतीय टेस्ट टीम और मुख्य कोच गौतम गंभीर आलोचनाओं के दौर से गुजर रहे हैं। हाल ही में यह टीम अपने घर पर न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज में 0-3 से करारी शिकस्त झेल चुकी है। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका ने भी भारत की धरती पर आकर मेहमान टीम को मात दी थी। क्रिकेट जगत में अब यह सवाल भी जोर-शोर से उठने लगा है कि क्या गौतम गंभीर टेस्ट फॉर्मेट के लिए एक सही कोच हैं या नहीं।

यदि भारतीय टीम को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचना है, तो उसे अपनी आगामी नौ टेस्ट पारियों में से कम से कम सात मुकाबलों में हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी। वर्तमान समीकरणों के अनुसार, भारतीय टीम इनमें से केवल एक ही मैच में हार का जोखिम उठा सकती है, अन्यथा यह टीम लगातार दूसरी बार डब्ल्यूटीसी के फाइनल मुकाबले से बाहर हो जाएगी। यही वजह है कि टीम प्रबंधन के लिए गॉल के इस मैदान पर जीत हासिल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। आगामी 23 तारीख को कोलंबो में इस सीरीज का दूसरा और अंतिम टेस्ट खेला जाएगा। इसके बाद भारतीय टीम इस वर्ष के अंत तक न्यूजीलैंड दौरे पर दो टेस्ट मैच और अगले साल अपनी घरेलू सरजमीं पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की महत्वपूर्ण सीरीज खेलेगी।

प्लेइंग-11 तय, अभ्यास में बहाया पसीना

पहला टेस्ट मैच शुरू होने से निर्धारित समय से 11 दिन पहले ही श्रीलंका पहुंच चुकी भारतीय टीम ने अभ्यास के दौरान अपनी फिटनेस और रणनीति पर पूरा जोर दिया है। टीम ने अब तक केवल दो दिन ही अभ्यास से विश्राम लिया है, जबकि कोलंबो में तीन दिन का एक अभ्यास मैच खेलने के साथ-साथ लगातार नेट प्रैक्टिस भी की है। मुख्य कोच गौतम गंभीर अच्छी तरह जानते हैं कि यदि इस बार तैयारी में कोई कोर्इ कसर छूटी, तो उन्हें और टीम को भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ेगा।

भारतीय टीम ने गुरुवार को गॉल अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की पिच पर जमकर अभ्यास किया। यहाँ मौसम पल-पल करवट बदलता है और हिंद महासागर की ओर से आने वाली ठंडी व तेज हवाएं भी रणनीतिक योजनाओं में बड़ा असर डालती हैं। गुरुवार की सुबह जहाँ मूसलाधार बारिश हुई, वहीं दोपहर में तेज धूप खिल गई और शाम ढलते-ढलते बादलों ने पूरे आसमान को अपने आगोश में ले लिया। इन सभी मौसमी और पिचों की परिस्थितियों का बारीकी से आकलन करने के बाद भारतीय टीम ने अपनी अंतिम एकादश (प्लेइंग-11) को पूरी तरह से अंतिम रूप दे दिया है।

बिना घास वाली भूरी और सूखी पिच के मिजाज को देखते हुए भारतीय टीम दो तेज गेंदबाजों—प्रसिद्ध कृष्णा और मोहम्मद सिराज, तथा तीन अनुभवी स्पिनरों—कुलदीप यादव, रवींद्र जडेजा और मानव सुथार के संयोजन के साथ मैदान पर उतरेगी। टीम के अब तक के अभ्यास सत्रों से यह स्पष्ट हो गया है कि पारी की शुरुआत केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल करेंगे, जबकि तीसरे क्रम पर देवदत्त पडिक्कल उतरेंगे। इसके बाद विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत चौथे या पांचवें और ध्रुव जुरैल मध्य क्रम में बल्लेबाजी की कमान संभालेंगे। स्टार बल्लेबाज साई सुदर्शन के चोटिल होने के कारण टीम में वापसी करने वाले सरफराज खान को इस मैच की प्लेइंग-11 में मौका मिलने की फिलहाल कोई संभावना नजर नहीं आ रही है।

गेंदबाजी आक्रमण में तीन बाएं हाथ के स्पिनर

भारतीय टीम इस मुकाबले में तीन विशिष्ट बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजों के अनूठे संयोजन के साथ उतरेगी। कुलदीप यादव जहाँ अपनी कलाई के जादू से रहस्यमयी स्पिन गेंदबाजी करते हैं, वहीं रवींद्र जडेजा अपनी अचूक सटीकता के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा, मानव सुथार पारंपरिक और क्लासिकल लेफ्ट-आर्म स्पिन की शैली की याद दिलाते हैं।

भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने इस संबंध में बात करते हुए कहा कि भले ही हमारे पास तीन बाएं हाथ के स्पिनर हैं, लेकिन उन सभी की गेंदबाजी का तरीका और कौशल एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न है। उन्होंने कहा कि कुलदीप एक आक्रामक गेंदबाज हैं, जिनके अनुभव और उच्च श्रेणी की प्रतिभा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुथार को पिच से अपेक्षाकृत अधिक टर्न मिलता है और जडेजा अपनी कंजूस तथा सटीक गेंदबाजी के लिए मशहूर हैं। यह एक बेहद संतुलित और अच्छी पिच है, और मेरा मानना है कि जैसे-जैसे यह टेस्ट मैच आगे बढ़ेगा, पिच का मिजाज काफी रोमांचक होता चला जाएगा।

इस मुकाबले से जुड़ी कुछ खास और रोचक बातें

  • यह मुकाबला भारतीय क्रिकेट टीम के टेस्ट इतिहास का 600वां टेस्ट मैच होगा।

  • गॉल अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के इतिहास का यह 50वां टेस्ट मैच होगा।

  • भारतीय टीम लगभग 7 साल यानी 2017 के बाद श्रीलंका की धरती पर कोई टेस्ट सीरीज खेल रही है।

  • उस 2017 के दौरे पर खेलने वाले खिलाड़ियों में से केवल केएल राहुल और रवींद्र जडेजा ही वर्तमान टीम का हिस्सा हैं।

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