जब सचिन ने मैनचेस्टर में भरी थी हुंकार, यहीं से शुरू हुआ शतकों के शतक का सफर

नई दिल्ली: क्रिकेट इतिहास में शतकों का शतक—यानी 100 अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ने का अनूठा रिकॉर्ड केवल एक ही महान बल्लेबाज के नाम दर्ज है, और वह हैं सचिन रमेश तेंदुलकर। सचिन के अलावा आज तक दुनिया का कोई अन्य बल्लेबाज इस ऐतिहासिक मुकाम के आसपास भी नहीं पहुंच पाया है। मास्टर ब्लास्टर सचिन के इस स्वर्णिम सफर की शुरुआत आज ही के दिन मैनचेस्टर के प्रसिद्ध ओल्ड ट्रेफर्ड मैदान से हुई थी।

इंग्लैंड के खिलाफ रचा गया था इतिहास

सचिन तेंदुलकर ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक इंग्लैंड के खिलाफ उसी देश की धरती पर लगाया था। यह ऐतिहासिक उपलब्धि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में हासिल की थी। ओल्ड ट्रेफर्ड में 9 अगस्त से 14 अगस्त के बीच दोनों टीमों के बीच दूसरा टेस्ट मुकाबला खेला गया था। उस दौर में टेस्ट मैच छह दिनों के होते थे, जिसमें बीच में एक दिन विश्राम (रेस्ट डे) का प्रावधान होता था। इस मुकाबले के आखिरी दिन यानी 14 अगस्त को युवा सचिन ने दबाव से भरी पारी खेलते हुए शानदार शतक जड़ा और भारत को आसन्न हार से बचाकर मैच ड्रॉ करा लिया था।

मुश्किल में घिरी थी भारतीय टीम

इस मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए मेजबान टीम के रूप में मजबूत स्कोर खड़ा किया। इंग्लैंड की ओर से माइक एथरटन ने 131, रॉबिन स्मिथ ने 121 और कप्तान ग्राहम गूच ने 116 रनों की बेहतरीन पारियां खेलीं, जिसके दम पर टीम ने 519 रनों का विशाल स्कोर बनाया।

इसके जवाब में भारतीय टीम ने पहली पारी में कड़ा संघर्ष किया। कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने शानदार 179 रनों की पारी खेली, जिसकी बदौलत भारत ने 432 रन बनाए। हालांकि, टीम पहली पारी के आधार पर इंग्लैंड के स्कोर से 87 रन पीछे रह गई थी। इसके बाद इंग्लैंड ने अपनी दूसरी पारी 4 विकेट के नुकसान पर 320 रनों पर घोषित कर दी।

सचिन और प्रभाकर ने बचाई टीम की लाज

भारत के सामने मैच जीतने के लिए 408 रनों का बेहद कठिन लक्ष्य था। मैच के आखिरी दिन भारत ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की, लेकिन नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से स्थिति गंभीर हो गई। एक समय भारत का स्कोर 183 रनों पर 6 विकेट हो चुका था और हार मंडराने लगी थी।

ऐसे संकटपूर्ण समय में छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे युवा सचिन तेंदुलकर ने मनोज प्रभाकर के साथ मिलकर मोर्चा संभाला। दोनों ने सूझबूझ से खेलते हुए दिन का खेल खत्म होने तक कोई और विकेट नहीं गिरने दिया। सचिन ने अपने करियर का पहला टेस्ट शतक जड़ते हुए नाबाद पारी खेली। उन्होंने 189 गेंदों का सामना किया और 17 चौकों की मदद से 119 रन बनाए। वहीं, मनोज प्रभाकर ने भी बेहतरीन साथ निभाते हुए 128 गेंदों पर 8 चौकों की मदद से नाबाद 67 रन बनाए।

मैच के अंत में भारत ने अपनी दूसरी पारी में 6 विकेट पर 343 रन बनाए थे। सचिन और मनोज प्रभाकर के बीच सातवें विकेट के लिए 156 रनों की ऐतिहासिक नाबाद साझेदारी हुई। ओल्ड ट्रेफर्ड के मैदान पर सचिन ने शतकों का जो सिलसिला शुरू किया, वह आगे चलकर 100 शतकों के ऐतिहासिक आंकड़े पर जाकर थमा।

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