CM Dhami के सामने खिलाड़ी का ‘रिश्वत’ वाला बयान, फिर थोड़ी देर में क्यों जारी करना पड़ा दूसरा वीडियो ?

UK Player Bribe Statement देहरादून: खेल संस्थानों में किस कदर भ्रष्टाचार का बोलबाला है , इसका खुलासा बुधवार को एक महिला ताइक्वांडो खिलाडी ने किया.वो भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के एक कार्यक्रम में पूरी मीडिया के सामने. खिलाड़ी ने बताया कि उसे अंतराष्ट्रीय खेल मे हिस्सा लेने के लिए चुना गया लेकिन जब उसके विदेश जाने की बात हुई तो उससे 1.5 लाख रुपये रिश्वत में मांगे गये.

 प्रदेश  के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने इस छात्रा के बयान के बाद  मामला सोशल मीडिया पर पर गर्मा गया. छात्रा के बयान का वीडियो वायरल होने के बाद खेल व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठने लगे. सुनिये छात्रा ने पहले अपने वीडियो में क्या कहा –

UK Player Bribe Statement इंटरनेट पर वायरल 

खिलाड़ी का ये बयान इंटरनेट पर देखते देखते वायरल हो गया, लेकिन थोड़ी देर बाद ही उसी खिलाड़ी का एक वीडियो अपलोड हुआ जिसमें वो अपना बयान बदलती और सफाई देती नजर आई.

दूसरे वीडियो में छात्रा ने स्पष्ट किया कि उसके पहले बयान से गलतफहमी पैदा हुई। उसके मुताबिक, यह मामला किसी सरकारी अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगने का नहीं था, बल्कि एक निजी संस्था के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए होने वाले खर्च से संबंधित था.

सीएम धामी के सामने क्या बोली थी छात्रा?

दरअसल, देहरादून के सीएनआई गर्ल्स स्कूल में सोमवार को आयोजित युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम के दौरान छात्रा को मुख्यमंत्री धामी के सामने अपनी बात रखने का मौका मिला था.

छात्रा ने भावुक होकर बताया था कि उसका चयन ताइक्वांडो की एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ था, लेकिन उससे करीब डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई. उसने कहा था कि पैसे नहीं देने के कारण वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकी.

छात्रा के इस बयान के बाद कार्यक्रम में कुछ देर के लिए माहौल गंभीर हो गया था. मुख्यमंत्री धामी ने भी छात्रा को बैठने के लिए कहा था.

इस बयान की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और देखते ही देखते इसे खेलों में कथित भ्रष्टाचार तथा खिलाड़ियों से पैसे मांगे जाने के मामले के तौर पर प्रचारित किया जाने लगा.

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर किसी खिलाड़ी से अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में खेलने के लिए पैसे मांगे जा रहे हैं, तो फिर सरकारी खेल नीति और खिलाड़ियों को मिलने वाली सहायता का लाभ उन्हें क्यों नहीं मिल रहा?

मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि उत्तराखंड सरकार लगातार राज्य के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुविधाएं तथा प्रोत्साहन देने की बात कहती रही है.

हाल ही में मुख्यमंत्री धामी ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने वाले पदक विजेताओं और प्रशिक्षकों को सम्मानित करते हुए कहा था कि सरकार खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, उपकरण, पोषण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है.

दूसरे वीडियो में छात्रा ने क्या सफाई दी?

मामला तूल पकड़ने के बाद बुधवार को छात्रा का एक दूसरा वीडियो सामने आया. इसमें उसने पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करते हुए बताया कि वह Taekwondo Council of India नाम की निजी संस्था के माध्यम से प्रशिक्षण ले रही थी.

छात्रा के अनुसार, इसी संस्था के माध्यम से उसका अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ था. प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए यात्रा और अन्य खर्च समेत कुल लागत करीब 3.70 लाख रुपये बताई गई थी.

उसने बताया कि संबंधित निजी संस्था की ओर से करीब 1.70 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग किए जाने की बात थी, जबकि करीब 1.50 से 1.60 लाख रुपये की राशि उसे स्वयं जुटानी थी.

छात्रा ने दूसरे वीडियो में यह भी स्पष्ट किया कि जिस रकम की व्यवस्था उसे खुद करनी थी, उसके बारे में वह कार्यक्रम में अपनी बात पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर पाई थी. इसी वजह से उसके बयान को अलग अर्थ में लिया गया.

क्या सरकारी विभाग ने रिश्वत मांगी थी?

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में फिलहाल ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि किसी सरकारी अधिकारी या उत्तराखंड सरकार के खेल विभाग के कर्मचारी ने छात्रा से डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी.

रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि मामला एक निजी संस्था के माध्यम से आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के खर्च से संबंधित था. इसलिए इसे सीधे सरकारी चयन प्रक्रिया में रिश्वतखोरी का मामला बताना सही नहीं होगा.

हालांकि, छात्रा के पहले वीडियो और बाद में आए स्पष्टीकरण के कारण सोशल मीडिया पर सवाल अभी भी बने हुए हैं. खासतौर पर यह सवाल उठ रहा है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जाने वाले खिलाड़ियों के लिए आर्थिक सहायता और चयन प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है.

सरकार की खेल नीति पर भी नजर

उत्तराखंड सरकार की ओर से खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं और सुविधाओं की बात कही गई है. मुख्यमंत्री धामी ने हाल में कहा था कि सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड को देश के अग्रणी खेल राज्यों में स्थापित करना है.

सरकार के अनुसार, प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, उपकरण, पोषण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी, छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है. महिला खिलाड़ियों, दिव्यांग खिलाड़ियों और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को भी विशेष प्रोत्साहन देने की बात कही गई है.

ऐसे में इस प्रकरण ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा किया है कि निजी स्तर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को आर्थिक मदद किस तरह और किन नियमों के तहत मिलती है.

पहले बयान से बनी ‘रिश्वत’ की धारणा, दूसरे वीडियो से बदली तस्वीर

पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि पहले वीडियो में छात्रा के बयान से रिश्वत मांगने की धारणा बनी, जबकि दूसरे वीडियो में उसने मामले को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए खुद वहन की जाने वाली राशि से जोड़कर स्पष्ट किया. अब सवाल ये भी उठ रहे हैं कि खिलाड़ी को आखिरकार दूसरा वीडियो क्यों बनाना पड़ा और सफाई क्यों देनी पड़ी, जबकि उम्मीद ये की जानी चाहिये थी कि सरकार ये जांच करती कि आखिर अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चयनित ये खिलाड़ी खेल में हिस्सा लेने क्यों नहीं जा पाई. जब राज्य सरकार अपने खिलाडियों को प्रोत्साहन देने का दावा करती है तो आखिर किन परिस्थितियों में खिलाड़ी को मेडल जीतने का इतना बड़ा मौका छोड़ना पड़ा ?

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