Vande Mataram Amendment Bill 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक कानूनी संरक्षण मिल गया है. अब वंदे मातरम के गायन को जानबूझकर रोकना या उसमें बाधा डालना दंडनीय अपराध होगा.
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस कानून और आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पूर्ण गायन को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन कानून के जरिए सम्मान और धैर्य को लागू नहीं किया जा सकता.
The President has assented to the #VandeMataram Amendment, passed without discussion in Parliament, which requires the singing of the National Song in full at the start and ending of any official function, in addition to the National Anthem.
As one who greatly respects both,…— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) August 11, 2026
Vande Mataram Amendment Bill 2026 : शशि थरूर ने उठाया ‘व्यावहारिकता’ का सवाल
थरूर ने कहा कि संशोधन संसद में बिना चर्चा के पारित हुआ और इसके तहत सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रगीत के पूर्ण संस्करण के गायन की व्यवस्था की गई है.
कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में कहा कि वह वंदे मातरम के शुरुआती दो पद और पूरा राष्ट्रगान गा सकते हैं. हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हर सरकारी कार्यक्रम में लंबे समय तक लोगों से खड़े रहने की अपेक्षा करना व्यावहारिक है.
थरूर का तर्क है कि जन गण मन को गाने में करीब 52 सेकंड लगते हैं, जबकि वंदे मातरम के पूर्ण आधिकारिक संस्करण की अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकंड है.
‘क्या सम्मान कानून के जरिए लागू किया जा सकता है?’
थरूर ने अपने एक्स पोस्ट में ‘मानवीय स्वभाव’ का जिक्र करते हुए कहा कि कार्यक्रमों में लोगों से लंबे समय तक खड़े रहने की अपेक्षा करने के व्यावहारिक पहलू पर भी विचार होना चाहिए.
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और किसी राज्य का राज्यगीत भी शामिल हो, तो दर्शकों को शुरुआत और समापन दोनों मौकों पर कई मिनट तक खड़े रहना पड़ सकता है.
उनका कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान होना जरूरी है, लेकिन सम्मान को केवल कानूनी बाध्यता के जरिए सुनिश्चित करने की कोशिश उलटा असर भी डाल सकती है. थरूर ने इससे पहले भी आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पूरे संस्करण को अनिवार्य किए जाने की आवश्यकता पर सवाल उठाए थे.
वंदे मातरम को मिला राष्ट्रीय गान जैसा कानूनी संरक्षण
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वंदे मातरम को अब Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत वैधानिक सुरक्षा मिलेगी. कानून में संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान जानबूझकर बाधा डालने या उसका अपमान करने को दंडनीय बनाना है.
मौजूदा कानूनी व्यवस्था में राष्ट्रीय गान के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें बाधा डालने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है. संशोधन के जरिए वंदे मातरम को भी इसी कानूनी ढांचे में लाया गया है.
संसद के दोनों सदनों से पास हुआ था बिल
Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 को जुलाई में संसद के मानसून सत्र के दौरान पारित किया गया था. राज्यसभा ने 29 जुलाई को विधेयक को मंजूरी दी थी, जबकि लोकसभा ने इसे 30 जुलाई को पारित किया था। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ यह कानून प्रभावी हो गया है.
इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई 2026 में वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान के समान वैधानिक संरक्षण देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.
सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम को लेकर पहले ही जारी हैं नए नियम
वंदे मातरम को लेकर कानूनी संशोधन से पहले ही केंद्र सरकार ने इसके आधिकारिक गायन को लेकर प्रोटोकॉल जारी किया था. गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक, निर्धारित सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पूर्ण आधिकारिक संस्करण का गायन/वादन किया जाना है और जब इसे राष्ट्रीय गान के साथ प्रस्तुत किया जाए तो वंदे मातरम पहले और जन गण मन उसके बाद होगा. पूर्ण संस्करण की अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकंड बताई गई है.
थरूर के बयान पर सियासी बहस तेज
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद थरूर की टिप्पणी ने एक बार फिर राष्ट्रगीत को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है. बीजेपी नेताओं ने पहले भी थरूर की पूर्ण वंदे मातरम के गायन पर आपत्ति को लेकर उनकी आलोचना की है.
वहीं, थरूर लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि उन्हें वंदे मातरम के सम्मान से कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि उनका सवाल इसे हर आधिकारिक कार्यक्रम में पूर्ण रूप से अनिवार्य करने की व्यावहारिकता को लेकर है.
अब क्या बदला?
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इस मामले में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि वंदे मातरम को अब सिर्फ प्रोटोकॉल या सरकारी दिशा-निर्देशों के स्तर पर ही नहीं, बल्कि कानूनी संरक्षण भी प्राप्त हो गया है.
यानी राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसका अपमान करने की स्थिति में संशोधित कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, थरूर की टिप्पणी ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाने के लिए कानूनी प्रावधान और सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यावहारिकता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान के समान कानूनी संरक्षण मिल गया है. सरकार का उद्देश्य राष्ट्रगीत के सम्मान और गरिमा को मजबूत करना है, जबकि शशि थरूर ने इसके पूर्ण गायन को लेकर व्यावहारिकता और मानवीय पहलू पर सवाल उठाए हैं. अब यह मुद्दा कानून के साथ-साथ राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का भी केंद्र बन गया है.

