RBI ने चार साल में पहली बार बढ़ाई रेपो रेट, 25 पॉइंट की बढ़ोतरी से बढ़ सकती है लोन EMI

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बुधवार को अपना बेंचमार्क रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.5% कर दिया. यह लगभग चार साल में पहली बार रेट में बढ़ोतरी है, क्योंकि मज़बूत आर्थिक ग्रोथ के बावजूद महंगाई का दबाव बढ़ रहा है.
छह सदस्यों वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने एकमत से पॉलिसी रेट बढ़ाने के लिए वोट किया और अपना रुख “न्यूट्रल” से बदलकर “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” कर लिया, जिससे महंगाई को कंट्रोल करने पर ज़्यादा फोकस का संकेत मिला.

RBI ने महंगाई पर चिंता जताई

मॉनेटरी पॉलिसी स्टेटमेंट देते हुए, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “MPC ने कहा कि जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट की वजह से ग्लोबल माहौल मुश्किल बना हुआ है. फिर भी, भारतीय इकॉनमी मज़बूत रही है और इकॉनमिक मोमेंटम बड़े पैमाने पर बना हुआ है. इसके अलावा, इकॉनमी के मज़बूत बने रहने की उम्मीद है.”
मल्होत्रा ने महंगाई के आउटलुक पर भी चिंता जताई और कहा, “मौजूदा डेटा को देखते हुए, यह भी साफ़ है कि महंगाई और इसका आउटलुक पिछले साल की तरह अच्छा नहीं है. हेडलाइन CPI महंगाई अगले तीन क्वार्टर में, जिसमें यह भी शामिल है, औसतन लगभग 5.8% रहने की उम्मीद है, और इस फाइनेंशियल ईयर के लिए कोर महंगाई 4.4% रहने का अनुमान है.”

ग्लोबल रिस्क के बावजूद RBI ने ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया

RBI मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की मीटिंग के नतीजे बताते हुए, मल्होत्रा ने कहा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन, इंटरनेशनल कमोडिटी की बढ़ी हुई कीमतें, ग्लोबल ट्रेड में और रुकावटें और ग्लोबल फाइनेंशियल हालात सख्त होने से भारत के ग्रोथ आउटलुक पर असर पड़ सकता है.
मल्होत्रा ने कहा, “इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, इस साल रियल GDP ग्रोथ 7.1 परसेंट रहने का अनुमान है, जिसमें Q2 7.2 परसेंट, Q3 6.9 परसेंट और Q4 6.8 परसेंट रहेगी.”
उन्होंने कहा कि 40-बेसिस-पॉइंट का ऊपर का बदलाव बड़ी ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद इकोनॉमिक एक्टिविटी की मजबूती को दिखाता है.

पिछली तिमाही के मुकाबले ग्रोथ कुछ धीमी हुई

मल्होत्रा ने कहा कि पहली तिमाही में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8% रही, जिसे मज़बूत प्राइवेट कंजम्पशन और मज़बूत इन्वेस्टमेंट एक्टिविटी का सपोर्ट मिला, जो लगभग 12% बढ़ी. नेट एक्सपोर्ट ने भी ग्रोथ में अच्छा योगदान दिया.
मल्होत्रा ने कहा, “हमने ग्लोबल मुश्किलों के बीच भी मज़बूती दिखाई, जैसा कि Q1 में 7.8 परसेंट की रियल GDP ग्रोथ से साफ है.”
उन्होंने कहा कि दूसरी तिमाही के हाई-फ़्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स बताते हैं कि इकोनॉमिक एक्टिविटी ने रफ़्तार बनाए रखी है, हालांकि पिछली तिमाही के मुकाबले ग्रोथ कुछ धीमी हुई है.
कॉस्ट प्रेशर के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी स्थिर रही है, जबकि सर्विसेज़ एक्टिविटी बड़े पैमाने पर बनी हुई है, जिसे मज़बूत घरेलू और बाहरी डिमांड का सपोर्ट मिला है. Q2 में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज़ PMI दोनों ही एक्सपेंशन ज़ोन में रहे, हालांकि Q1 से एक्सपेंशन की रफ़्तार धीमी हो गई.
प्राइवेट कंजम्पशन भी मोटे तौर पर मज़बूत रहा, जिसे डिस्क्रिशनरी खर्च से मदद मिली, जबकि फिक्स्ड इन्वेस्टमेंट में मज़बूती दिख रही थी.

फरवरी 2023 के बाद पहली रेपो रेट बढ़ोतरी

पिछली रेपो रेट बढ़ोतरी फरवरी 2023 में हुई थी, जब RBI ने रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.50 परसेंट कर दिया था. सेंट्रल बैंक ने 2025 में अपना रेट-कट साइकिल शुरू करने से पहले 2023-24 तक रेट में कोई बदलाव नहीं किया.

पॉलिसी रेपो रेट अभी 5.25 परसेंट है

PTI पोल में ज़्यादातर पार्टिसिपेंट्स ने बुधवार के पॉलिसी रिव्यू में 25-बेसिस-पॉइंट रेट बढ़ोतरी के साथ-साथ एक हॉकिश टोन की उम्मीद की थी. हालांकि, इस पर राय बंटी हुई है कि क्या RBI भी अपना पॉलिसी स्टैंड बदलेगा.
ज़्यादातर एक्सपर्ट्स ने कहा कि रेट में बढ़ोतरी जल्द ही होगी, जबकि कुछ को लगा कि सेंट्रल बैंक आने वाले रिव्यू में बढ़ोतरी रोक सकता है.
सरकार ने RBI को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित रिटेल महंगाई को 4 परसेंट पर रखने का आदेश दिया है, जिसमें दोनों तरफ 2 परसेंट पॉइंट का टॉलरेंस बैंड होगा.
जुलाई में 4.45 परसेंट से अगस्त में रिटेल महंगाई बढ़कर 4.82 परसेंट हो गई.

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