नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शनिवार के रोज एक सामाजिक कार्यकर्ता ने यह दावा किया कि स्थानीय प्रशासन द्वारा उन्हें उनके ही निवास स्थान पर रोक लिया गया। यह कथित प्रतिबंध तब सामने आया जब वे एक विशेष सरकारी ईंधन नीति के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की तैयारी कर रहे थे।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए हिरासत के वीडियो
संबंधित व्यक्ति ने ऑनलाइन मंचों के माध्यम से कुछ दृश्य और जानकारियां सार्वजनिक कीं। उनका यह आरोप था कि प्रशासनिक अमला सुबह-सुबह उनके आवास पर पहुंच गया और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया, हालांकि इस दौरान उनके पास कोई लिखित आधिकारिक दस्तावेज नहीं था।
प्रस्तावित विरोध कार्यक्रमों पर लगाई गई रोक
आगामी दिनों में निर्धारित विभिन्न पदयात्राओं और प्रदर्शनों से पहले ही अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए आयोजकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था। कार्यकर्ताओं का यह तर्क था कि उनका यह कृत्य पूरी तरह शांतिपूर्ण था, किंतु प्रशासन कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जता रहा था।
ईंधन मिश्रण नीति को लेकर छिड़ा हुआ है विवाद
यह पूरा घटनाक्रम वर्तमान में लागू ई-20 ईंधन नीति के विरोध से जुड़ा हुआ है। इस नीति के तहत उपभोक्ताओं के समक्ष पारंपरिक विकल्पों के सीमित होने की बात कही जा रही है, जिस पर वाहन मालिकों और विभिन्न समूहों द्वारा लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है।
पारंपरिक ईंधनों के विकल्पों की मांग
विरोध जता रहे समूहों की मुख्य मांग यह है कि बाजार में केवल एक निश्चित मिश्रण वाला ईंधन थोपने के बजाय आम जनता को अन्य पारंपरिक विकल्प भी उपलब्ध कराए जाएं। जानकारों का मानना है कि इस तरह के नियमों से पुरानी गाड़ियों के रखरखाव और कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है।

