नई दिल्ली — सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करने, कोर्ट रूम में कागजात फेंकने, सुरक्षाकर्मी के साथ मारपीट करने और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार किए गए दो कानून के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को शर्तों के साथ जमानत प्रदान कर दी है।
क्या था पूरा मामला और गंभीर आरोप
अदालत की कार्यवाही के दौरान इन दोनों छात्रों द्वारा कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया था। बात यहीं खत्म नहीं हुई, बल्कि आरोप है कि उन्होंने कोर्ट रूम के अंदर ही महत्वपूर्ण कागजात फेंके और ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी के साथ हाथापाई व मारपीट की, जिससे अदालत का कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था।
अदालत ने की सख्त टिप्पणी और सुनवाई
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस तरह के आचरण को बेहद गैर-जिम्मेदाराना और न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ बताया। हालांकि, वकीलों की दलीलें सुनने और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए बेंच ने नरमी बरतते हुए जमानत अर्जी पर विचार किया।
जमानत के साथ लगाई गई कड़ी शर्तें
कानून के इन छात्रों को रिहाई देते हुए अदालत ने स्पष्ट हिदायत दी है कि भविष्य में वे इस प्रकार के किसी भी अनुशासनहीन कृत्य में शामिल नहीं होंगे। कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने या दोबारा इस तरह की हरकत करने पर उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।
कानूनी हलकों में चर्चा का विषय
यह घटना न्यायिक परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था और कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों के आचरण को लेकर एक बड़ी बहस का विषय बन गई है। इस मामले ने कोर्ट रूम के अंदर वकीलों, इंटर्न्स और विधिक छात्रों के लिए अनुशासन के नियमों को और अधिक कड़ा करने की जरूरत पर बल दिया है।

