100-150 अज्ञात समेत 15 नामजद पर केस, मदननगर हिंसा मामले में पुलिस का बड़ा एक्शन

सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मदननगर गांव में पुलिस पार्टी पर हुए सनसनीखेज और हिंसक हमले के मामले में स्थानीय पुलिस ने एक बड़ी और कड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस गंभीर मामले में पुलिस ने 15 नामजद आरोपियों सहित लगभग 100 से 150 अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ विभिन्न संगीन धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।

आरोपियों पर पुलिस बल पर जानलेवा हमला करने, हिंसक बलवा फैलाने, शासकीय कार्य में गंभीर बाधा उत्पन्न करने तथा कानून की अवहेलना करने जैसी कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इस बड़ी घटना के सामने आने के बाद से पूरे इलाके में पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है और फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है।

क्या था पूरा मामला और कैसे भड़की हिंसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 24 जुलाई को प्रतापपुर थाने की एक पुलिस टीम एक पुराने और पेंडिंग आपराधिक मामले में वांछित पांच आरोपियों को पकड़ने के लिए मदननगर गांव पहुंची थी।

  • जैसे ही पुलिस टीम आरोपियों की सुरागकशी कर रही थी, अचानक वहां बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट हो गए और पुलिस की इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध करने लगे।

  • देखते ही देखते यह विरोध एक उग्र और हिंसक झड़प में तब्दील हो गया।

आरोप है कि आक्रोशित भीड़ ने पूरी योजना के साथ लाठी-डंडों, फरसा और टांगी जैसे घातक हथियारों से पुलिस टीम पर अचानक हमला बोल दिया। इस अचानक हुए खूनी संघर्ष और हमले में एसडीओपी (SDOP) समेत 24 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। हालात को पूरी तरह बेकाबू होते देख तुरंत भारी मात्रा में अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर रवाना किया गया, जिसके बाद पुलिसकर्मियों को सुरक्षित उस इलाके से बाहर निकाला जा सका।

सैकड़ों ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

घटना के बाद पुलिस अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की सूक्ष्मता से विस्तृत जांच की, जिसके आधार पर प्रतापपुर थाना पुलिस ने 15 मुख्य नामजद आरोपियों के साथ-साथ 100 से 150 अन्य अज्ञात ग्रामीणों को भी इस आपराधिक कृत्य में शामिल मानते हुए आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ बलवा, सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने और नुकसान पहुंचाने के आरोप में मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है।

वीडियो फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों से हो रही है पहचान

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश अभी जारी है। घटनास्थल पर रिकॉर्ड किए गए विभिन्न वीडियो फुटेज, सोशल मीडिया क्लिप्स, मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी व डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस हिंसक हमले में शामिल अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। पुलिस प्रशासन ने कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि कानून को अपने हाथ में लेने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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