मेदिनीनगर। बदलते दौर के साथ परिवार नियोजन को लेकर समाज और युवा पीढ़ी की सोच में एक बड़ा और सकारात्मक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। पलामू जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में अब पारंपरिक रूढ़ियों को पीछे छोड़कर लोग आधुनिक विज्ञान को अपना रहे हैं। जहां पहले शादियों से ठीक पूर्व केवल युवक-युवती की कुंडली मिलान को ही सबसे बड़ी प्राथमिकता दी जाती थी, वहीं अब लोग आने वाली भावी पीढ़ी के उत्तम स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए आनुवांशिक जांच को अधिक तवज्जो दे रहे हैं।
आने वाली पीढ़ी को आनुवांशिक बीमारियों से सुरक्षित रखने का बढ़ा चलन
पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर आए इस वैचारिक बदलाव का मुख्य उद्देश्य होने वाले बच्चों को जन्मजात और गंभीर आनुवांशिक बीमारियों के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित रखना है। आज का जागरूक युवा वर्ग विवाह बंधन में बंधने या माता-पिता बनने से पहले जेनेटिक टेस्टिंग कराने को अपनी जिम्मेदारी समझ रहा है। इस आधुनिक चिकित्सीय जांच के प्रति बढ़ते रुझान के कारण चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भी एक नई जागरूकता का संचार हुआ है, जो भविष्य के स्वस्थ समाज की एक मजबूत आधारशिला रख रहा है।
गर्भधारण की योजना बना रहे दंपतियों के बीच प्री-कन्सेप्शन जेनेटिक टेस्टिंग की बढ़ी मांग
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, विशेष रूप से ऐसे दंपति जो निकट भविष्य में माता-पिता बनने या गर्भधारण की योजना बना रहे हैं, उनके बीच 'प्री-कन्सेप्शन जेनेटिक टेस्टिंग' यानी गर्भधारण पूर्व आनुवांशिक जांच की मांग में अप्रत्याशित रूप से भारी तेजी आई है। युवा जोड़े अब अपनी मर्जी से स्त्री रोग विशेषज्ञों और जेनेटिक काउंसलर्स के पास पहुंचकर इस विशिष्ट जांच के तकनीकी पहलुओं को समझ रहे हैं और स्वेच्छा से आगे बढ़कर विभिन्न प्रकार के ब्लड टेस्ट और स्क्रीनिंग करवा रहे हैं।
पति-पत्नी के आनुवांशिक कैरियर होने और बच्चों में बीमारी ट्रांसफर होने का चलता है पता
इस आधुनिक आनुवांशिक जांच के फायदों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि इस प्रक्रिया के माध्यम से यह बेहद सटीकता से पता लगाया जा सकता है कि पति या पत्नी में से कोई किसी छिपी हुई आनुवांशिक बीमारी का वाहक अर्थात कैरियर है या नहीं। कई बार माता-पिता सामान्य और पूरी तरह स्वस्थ दिखते हैं, लेकिन उनके जींस में कुछ दोष मौजूद होते हैं। यह जांच समय रहते यह स्पष्ट कर देती है कि उनके होने वाले शिशु में वह गंभीर बीमारी पहुंचने की कितनी प्रतिशत संभावना है।
थैलेसीमिया और हीमोफीलिया जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाव में मददगार है आधुनिक विज्ञान
इस जेनेटिक स्क्रीनिंग के जरिए थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, सिकल सेल एनीमिया और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी बेहद दर्दनाक और लाइलाज आनुवांशिक बीमारियों के संक्रमण को अगली पीढ़ी में जाने से प्रभावी रूप से रोका जा सकता है। समय रहते मिली इस सटीक वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर डॉक्टर दंपतियों को सुरक्षित गर्भधारण के आधुनिक विकल्पों और सही उपचार की सलाह देते हैं। समाज में तेजी से फैल रही यह वैज्ञानिक चेतना आने वाले समय में स्वास्थ्य के बजट को कम करने और देश को एक सेहतमंद व निरोगी भविष्य देने में बेहद मददगार साबित होगी।

