दिग्गज गायिका एस. जानकी नहीं रहीं, पीएम मोदी बोले- संगीत जगत की अपूरणीय क्षति

नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत के एक सुनहरे युग का अंत हो गया है। 'दक्षिण की कोकिला' के नाम से दुनिया भर में मशहूर और देश की महान पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने शनिवार को कर्नाटक के मैसूर स्थित एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से फिल्म उद्योग और संगीत प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगीत जगत की इस अपूरणीय क्षति पर गहरा दुख प्रकट किया है और इसे भारतीय संस्कृति के लिए एक बड़ा नुकसान बताया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर शोक व्यक्त करते हुए जानकी अम्मा को नमन किया। उन्होंने लिखा कि एस. जानकी अम्मा का जाना संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। विभिन्न भारतीय भाषाओं में गाए गए उनके जादुई गीत कई पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में गूंजते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज से हर मानवीय भावना को जीवंत कर दिया, और उनकी गायकी आने वाले लंबे समय तक संगीत प्रेमियों को प्रेरित करती रहेगी। पीएम ने उनके शोक संतप्त परिवार और देश-विदेश में फैले करोड़ों प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

20 भाषाओं में 48 हजार से अधिक गानों का रिकॉर्ड

एस. जानकी भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा और महानतम गायिकाओं में शुमार थीं, जिन्होंने अपनी आवाज से भाषाई सीमाओं को तोड़ दिया। उन्होंने अपने पूरे करियर में कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी समेत करीब 20 विभिन्न भारतीय भाषाओं में 48,000 से अधिक गानों को अपनी आवाज दी। इस बेमिसाल उपलब्धि ने उन्हें भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा गीत रिकॉर्ड करने वाली शीर्ष पार्श्व गायिकाओं की कतार में ला खड़ा किया। उन्होंने अपने करियर में सबसे ज्यादा गाने कन्नड़ भाषा में गाए, जिसके बाद मलयालम भाषा का स्थान आता है।

1957 से शुरू हुआ सुरों का सफर

जानकी अम्मा के छह दशक लंबे गौरवशाली सफर की शुरुआत वर्ष 1957 में तमिल फिल्म 'विधियिन विलायट्टू' से हुई थी। इसी साल उन्होंने मलयालम सिनेमा में भी कदम रखा और अपनी असाधारण प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए करियर के पहले ही साल में छह अलग-अलग भाषाओं में गाने रिकॉर्ड कर सबको हैरान कर दिया। इसके बाद 1970 के दशक तक आते-आते वे मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की सबसे लोकप्रिय और मजबूत महिला आवाज बन गईं। उस दौर के शायद ही कोई ऐसे बड़े संगीत निर्देशक रहे होंगे, जिन्होंने जानकी अम्मा की जादुई आवाज का उपयोग न किया हो।

पुरस्कारों से सजा छह दशकों का करियर

अपने बेहतरीन और अद्वितीय करियर में एस. जानकी को देश-विदेश में ढेरों सम्मान मिले। उन्हें संगीत में उत्कृष्ट योगदान के लिए 4 बार प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' (National Film Awards) से नवाजा गया, जबकि अलग-अलग राज्यों द्वारा उन्हें कुल 33 'राज्य फिल्म पुरस्कारों' से सम्मानित किया गया। वर्ष 1970 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ गायिका का पहला 'केरल राज्य फिल्म पुरस्कार' मिला था, जिसके बाद कई सालों तक इस पुरस्कार श्रेणी पर उनका एकछत्र राज रहा। उनकी सुरीली आवाज और गाए गए अमर गीत भारतीय संगीत के इतिहास में हमेशा एक अमूल्य धरोहर बनकर जीवित रहेंगे।

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