मलबे के नीचे साथ थमीं बिमला-सुनील की सांसें, हादसे ने पूरे गांव को रुलाया

सोनीपत। गोहाना के गांव महमूदपुर में मंगलवार देर रात एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने न केवल पूरा गांव झकझोर दिया, बल्कि एक मिसाल बन चुके अटूट रिश्ते का भी हमेशा के लिए अंत कर दिया। इस हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई। जेठानी बिमला और देवरानी सुनील का रिश्ता सगी बहनों से भी बढ़कर था, जो हर सुख-दुख में साए की तरह एक-दूसरे के साथ रहीं। किस्मत का खेल ऐसा रहा कि जीवन भर साथ निभाने वाली इन दोनों महिलाओं ने अपनी अंतिम सांस भी एक ही मलबे के नीचे एक साथ ली।

ठंड से बचने के लिए आंगन में सोने का फैसला बना आखिरी

क्षेत्र में पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही हल्की बारिश के कारण रात के समय तापमान गिर गया था और हल्की ठंड का अहसास हो रहा था। मंगलवार की रात बिमला और सुनील पुराने मकान के सामने बने टिन शेड के नीचे सो रही थीं, लेकिन ठंड बढ़ने पर उन्होंने अपनी चारपाइयां वहां से उठाईं और पुराने मकान के अंदर आंगन में बिछा लीं। किसी को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि ठंड से बचने का उनका यही फैसला जिंदगी का आखिरी फैसला साबित होगा और रात में ही कमजोर शहतीर टूटने से पूरी छत उनके ऊपर भरभराकर गिर गई।

दस वर्ष पूर्व देवरानी ने जेठानी को गोद दिया था अपना बेटा

बिमला और सुनील के बीच का प्रेम केवल सामान्य बोलचाल तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके आपसी त्याग की चर्चा पूरे क्षेत्र में होती थी। बिमला की तीन बेटियां थीं लेकिन कोई बेटा नहीं था, जिसके चलते करीब 10 वर्ष पहले देवरानी सुनील ने अपने बड़े बेटे दीपक को अपनी जेठानी की गोद में सौंप दिया था ताकि उन्हें कभी बेटे की कमी महसूस न हो। इस बड़े फैसले के बाद दोनों परिवारों के बीच का स्नेह और ज्यादा गहरा हो गया, जिसके बाद से दोनों परिवार मिलकर करीब 28 एकड़ जमीन पर एक साथ खेती-बाड़ी का पूरा काम संभालते थे।

पति के निधन के बाद हर कदम पर बनीं एक-दूसरे का संबल

वर्ष 2015 में बिमला के पति राजेंद्र सिंह के आकस्मिक निधन के बाद देवरानी सुनील ने अपनी जेठानी को कभी अकेलेपन का अहसास नहीं होने दिया। बिमला शुगर की गंभीर मरीज थीं, इसलिए उनकी दवाइयों से लेकर खान-पान और स्वास्थ्य की पूरी देखभाल की जिम्मेदारी सुनील खुद उठाती थी। दोनों का उठना-बैठना, खाना-पीना और सोना हमेशा साथ में ही होता था। इस समय बिमला की तीनों बेटियों और गोद लिए बेटे दीपक की शादी हो चुकी है, जबकि सुनील का छोटा बेटा संदीप भी इसी संयुक्त परिवार के साथ रहता है।

मलबे के भारी दबाव के साथ ही थम गईं समय की सुइयां

इस दर्दनाक हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुराने मकान की छत पर करीब डेढ़ फीट मोटी मिट्टी की परत बिछी हुई थी, जिसका वजन कमजोर हो चुकी शहतीर और कड़ियां बर्दाश्त नहीं कर सकीं। दो साल पहले मकान की मरम्मत भी कराई गई थी, लेकिन घून और दीमक के कारण अंदर से खोखली हो चुकी लकड़ी अचानक टूट गई। इस हादसे के वक्त आंगन की दीवार पर टंगी वह घड़ी भी मलबे की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे देवरानी-जेठानी की थमती सांसों के साथ ही समय की सुइयां भी हमेशा के लिए

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