Monday, July 6, 2026
Home Breaking News पश्चिम बंगाल में सुवेंदु सरकार की नई पहल,शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल होंगे...

पश्चिम बंगाल में सुवेंदु सरकार की नई पहल,शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल होंगे श्यामा प्रसाद मुखर्जी

0
13
Shyama Prasad Mukherjee
Shyama Prasad Mukherjee

Shyama Prasad Mukherjee कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रख्यात शिक्षाविद् और महान राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से राज्य के सभी स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके राष्ट्रवादी विचारों और राष्ट्र निर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज के समय में नई पीढ़ी को डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व और उनकी विचारधारा से रूबरू कराना बेहद जरूरी है.

Shyama Prasad Mukherjee की जयंती पर मुख्यमंत्री का बड़ा संदेश

इस खास मौके पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी कोलकाता के प्रसिद्ध मित्रा इंस्टीट्यूशन पहुंचे, जहां उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. गौरतलब है कि डॉ. मुखर्जी ने इसी विद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी. इस दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों में ‘नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) की भावना जगाने की बात कही और कहा कि देश को सर्वोपरि रखने का उनका संदेश आज के दौर में भी पूरी तरह प्रासंगिक है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मित्रा इंस्टीट्यूशन के विकास और वहां की बुनियादी सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं. उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि एक दूरदर्शी शिक्षाविद् थे, जिन्होंने युवाओं को हमेशा राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया.

भाजपा मुख्यालय में भी दी गई श्रद्धांजलि

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर कोलकाता स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मुख्यालय में भी एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया. भाजपा नेताओं ने डॉ. मुखर्जी के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश की एकता, अखंडता, सांस्कृतिक पहचान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया. पार्टी पदाधिकारियों ने भी उनके इन महान विचारों को आज के युवाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की जरूरत पर विशेष बल दिया.