बिजली संकट से परेशान जनता सड़कों पर उतरी, टायर जलाकर विरोध

हाजीपुर। बिदुपुर पावर सब-स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों में पिछले 36 घंटों से लगातार जारी बिजली कटौती ने स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया। चिलचिलाती गर्मी और भारी उमस से बेहाल ग्रामीणों का गुस्सा गुरुवार सुबह फूट पड़ा। बिजली और पानी की भारी किल्लत से आक्रोशित सैकड़ों लोगों ने बिदुपुर सब-स्टेशन के नजदीक पहुंचकर हाजीपुर-महनार मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीचों-बीच टायर जलाकर बिजली विभाग के खिलाफ उग्र नारेबाजी की, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

अफसरों ने काटे फोन; बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग, बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी मुश्किलें

आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि करीब डेढ़ दिन से बिजली गायब होने के कारण घरों में लगे इनवर्टर और बैटरियां पूरी तरह बैठ चुकी हैं। बिजली न होने से पानी की मोटरें नहीं चल पा रही हैं, जिसके चलते टंकियां खाली हो गई हैं और इलाके में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस नारकीय स्थिति के बीच सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। लोगों ने बताया कि समस्या की शिकायत के लिए जब उन्होंने बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) से लेकर सब-डिविजनल ऑफिसर (एसडीओ) तक को फोन मिलाए, तो किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने कॉल रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा।

दो घंटे तक लगा रहा वाहनों का लंबा जाम, पुलिस की समझौता वार्ता के बाद खुला रास्ता

सुबह करीब 9:30 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन सुबह 11:30 बजे तक यानी पूरे दो घंटे तक जारी रहा। इस दौरान मुख्य मार्ग पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिसमें कई एम्बुलेंस, स्कूली बसें और राहगीर भीषण गर्मी में फंसे रहे। हंगामे और आगजनी की सूचना मिलते ही बिदुपुर थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने आक्रोशित भीड़ को शांत कराया और बिजली विभाग के आला अफसरों से बात कर जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल कराने का पुख्ता आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने जाम हटाया।

ग्रामीणों का अल्टीमेटम; सप्लाई नॉर्मल नहीं हुई तो फिर होगा उग्र आंदोलन

जाम खोलने के बाद भी स्थानीय निवासियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन और बिजली कंपनी को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अगले दो घंटे के भीतर बिजली और पानी की आपूर्ति को सुचारू नहीं किया गया, तो वे दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। उपभोक्ताओं का साफ कहना है कि यदि उनकी जायज मांग को अब भी अनसुना किया गया, तो इस बार आंदोलन और ज्यादा उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी।

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