श्री राम मंदिर चंदा चोरी :सबूतों का पुलिंदा लेकर SIT के सामने पहुंचे संजय सिंह,हो सकते हैं बड़े खुलासे

Ram Mandir Donation Case : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh)  गुरुवार को विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष उपस्थित हुए और उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य हैं, जिन्हें जांच टीम को सौंप दिया गया है.

संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले भी राम मंदिर से जुड़े भूमि खरीद और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठाए थे. अब जब राज्य सरकार द्वारा गठित SIT इस मामले की जांच कर रही है, तो उन्होंने अपने पास उपलब्ध सभी दस्तावेज जांच एजेंसी को सौंप दिए हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके.

Ram Mandir Donation Case: चंदा चोरी मामले में जल्दी दर्ज हो FIR – आलोक कुमार, वीएचपी  

इस बीच चंदा चोरी को लेकर अब मंदर निर्माण समिति से जुड़े बड़े नेता और साधु संत भी सामने आ रहे हैं. विश्व हिंदु परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि , अब ऐसा समय आ गया है जब FIR दर्ज होनी चाहिए और हम चाहते हैं कि यह जल्द हो. हम यह भी चाहते हैं कि बिना किसी दबाव के दोषियों की जांच के लिए सबसे काबिल पुलिस अधिकारियों और ज़रूरी विशेषज्ञों को तैनात किया जाए…हम यह भी चाहते हैं कि यह मामला फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चले…ताकि चार महीने के भीतर दोषियों का खुलासा हो और उन्हें सजा मिले.”

मामले में संदिग्ध हर व्यक्ति की जांच हो , चाहे वो कोई भी हो- आलोक कुमार

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार कहना है  कि “अभी तक जांच शुरू नहीं हुई है और न ही FIR दर्ज की गई है. मेरा मानना ​​है कि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उन सभी की जांच होनी चाहिए. मैं चंपत जी और डॉ. अनिल मिश्रा को जानता हूं. वे भावुक और समर्पित लोग हैं. वे इस्तीफा दें या नहीं, इसके लिए उन्हें मेरी सलाह की ज़रूरत नहीं है. पुलिस पर भी दबाव डालने की ज़रूरत नहीं है. अगर ईमानदारी से जांच की जाए, तो सच सामने आ जाएगा. ”

राम मंदिर चंदा चोरी का पूरा मामला ?

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर हाल के दिनों में कई सवाल उठे हैं. इन आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया है. जांच टीम मंदिर प्रशासन, कर्मचारियों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है.

सूत्रों के अनुसार SIT ने अब तक मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई अधिकारियों से पूछताछ की है. जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, दान पेटियों की निगरानी व्यवस्था, धन गणना प्रक्रिया और वित्तीय रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है.

संजय सिंह ने क्या सौंपे साक्ष्य?

हालांकि संजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से दस्तावेजों की पूरी जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन उनका दावा है कि ये दस्तावेज जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं.  उन्होंने यह भी कहा कि मामले की पारदर्शी जांच जरूरी है ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े सवालों का जवाब मिल सके।

जांच के केंद्र में कई अहम सवाल

SIT की जांच इस बात पर केंद्रित है कि दान और चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा तथा लेखा-जोखा की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई. जांच टीम पहले ही अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है और अब विभिन्न पक्षों से मिले दस्तावेजों तथा साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है.

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है. विपक्षी दल लगातार जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि मंदिर ट्रस्ट और सरकार की ओर से जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही जा रही है. ऐसे में संजय सिंह द्वारा SIT को साक्ष्य सौंपे जाने के बाद इस मामले की राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से अहमियत बढ़ गई है.

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