Trump G-7 Summit : ईरान युद्ध के दौरान मन मुताबिक परिनाम ना मिलने से चिढे़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इसकी खीज इजराइल पर निकाल रहे हैं. ताजा मामला जी 7 शिखर बैठक का है जहां एक बार फिर राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की है. जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान दिए गए अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि हिज्बुल्लाह से निपटने के मामले में इजरायल की तुलना में सीरिया बेहतर भूमिका निभा सकता है. उनके इस बयान ने एक बार फिर से अमेरिका और इजराइल के बीच की कड़वाहट खुलकर सामने आ गई है.
Donald Trump at G7:
“Without me there would be no Israel…I have a great relationship with Bibi but he needs to be more responsible with respect to Lebanon.”
Israel needs to stop committing genocide and return all the land it has stolen, and the US needs to stop funding Israel. pic.twitter.com/r7aNvhszRb
— Power to the People ☭🕊 (@ProudSocialist) June 16, 2026
Trump G-7 Summit में सामने आई ट्रंप की नाराजगी
जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान कतर के अमीर के साथ हुई मुलाकात में ट्रंप ने इजरायल की सैन्य रणनीति की आलोचना की. उन्होंने कहा कि लेबनान में इजरायली कार्रवाई ने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों को नुकसान पहुंचाया है.
ट्रंप का मानना है कि मौजूदा सैन्य अभियान की वजह से ईरान के साथ चल रही बातचीत भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है. उन्होंने संकेत दिया कि हालात ऐसे बन गए थे कि शांति प्रक्रिया किसी भी समय पटरी से उतर सकती थी.
हिज्बुल्लाह पर कार्रवाई को लेकर तंज
ट्रंप ने इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हिज्बुल्लाह के खिलाफ अभियान चलाने के दौरान बड़ी संख्या में आम नागरिक भी प्रभावित हो रहे हैं. ट्रंप ने तंज भरे अंदाज में कहा कि इजरायल बिना व्यापक तबाही के यह काम नहीं कर सकता. इसलिए इस चुनौती से निपटने में सीरिया ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है. यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सीरिया लंबे समय से इजरायल का विरोधी देश रहा है.
ईरान से शांति वार्ता पर चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में तनाव कम करने और संवाद को आगे बढ़ाने के लिए जो प्रयास किए जा रहे थे, उन्हें इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने कमजोर कर दिया.
ट्रंप ने बताया कि बेरूत पर हुए हालिया हमले को लेकर उन्होंने इजरायल के सामने अपनी असहमति भी दर्ज कराई थी. उनके अनुसार, यह हमला उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आया.
अमेरिका के समर्थन का दिलाया एहसास
बातचीत के दौरान ट्रंप ने इजरायल को अमेरिका की भूमिका का भी एहसास कराया. उन्होंने कहा कि अमेरिका के समर्थन के बिना इजरायल की स्थिति आज जैसी नहीं होती.
ट्रंप ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि अमेरिका के सहयोग के बिना इजरायल का अस्तित्व और उसकी वर्तमान ताकत संभव नहीं थी. इस बयान को नेतन्याहू सरकार के लिए एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है.
क्यों अहम है ट्रंप का बयान?
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में इजरायल, हिज्बुल्लाह, लेबनान और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है. अमेरिका लंबे समय से इजरायल का सबसे बड़ा सहयोगी रहा है, लेकिन ट्रंप के हालिया बयान यह संकेत देते हैं कि वाशिंगटन में इजरायली रणनीति को लेकर मतभेद उभर रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक दृष्टिकोण में अंतर बढ़ता है, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है.
बैकग्राउंड: हिज्बुल्लाह, इजरायल और ईरान का विवाद
हिज्बुल्लाह लेबनान में सक्रिय एक शक्तिशाली संगठन है, जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त माना जाता है. इजरायल लंबे समय से हिज्बुल्लाह को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताता रहा है और उसके खिलाफ कई सैन्य अभियान चला चुका है.
दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच समय-समय पर तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बातचीत की कोशिशें होती रही हैं. ऐसे में यदि सैन्य कार्रवाई बढ़ती है, तो कूटनीतिक प्रयासों पर भी उसका सीधा असर पड़ता है. इसी संदर्भ में ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

