अमृतसर | शिरोमणि अकाली दल के कद्दावर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को लेकर मजीठा विधानसभा क्षेत्र में सियासी पोस्टर युद्ध बेहद तेज हो गया है। कुछ समय पूर्व ही पूरे इलाके में मजीठिया को कानून से भागा हुआ बताने वाले विवादित होर्डिंग्स और पोस्टर चस्पा किए गए थे। अब इस सियासी हमले का करारा जवाब देते हुए मजीठिया के समर्थकों ने समूचे क्षेत्र में “टाइगर अभी जिंदा है” के नारों वाले नए पोस्टर लगा दिए हैं। समर्थकों द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद से स्थानीय राजनीति का पारा अचानक चढ़ गया है और हर चौक-चौराहे पर इसकी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
समर्थकों और विरोधियों में छिड़ी जंग
अकाली दल के कार्यकर्ताओं और मजीठिया समर्थकों का साफ कहना है कि इन नए पोस्टरों के माध्यम से विरोधियों को यह कड़ा संदेश दिया गया है कि तमाम तरह की कानूनी अड़चनों और सियासी साजिशों के बाद भी बिक्रम सिंह मजीठिया की जमीनी पकड़ और जनाधार पूरी तरह मजबूत है। इसके विपरीत, प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल इन पोस्टरों को महज एक खोखली बयानबाजी और अपनी कमजोरी छिपाने का जरिया बता रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच जारी इस पोस्टरबाजी ने आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी सरगर्मियां बढ़ा दी हैं।
एफआईआर और पुलिसिया दबिश के बाद बढ़ी तल्खी
इस पूरे विवाद की जड़ मजीठा थाने से जुड़ी एक हालिया घटना है, जहां हिरासत में लिए गए एक अकाली कार्यकर्ता जोबनप्रीत सिंह को जबरन छुड़ाने के आरोप में बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इस मामले के दर्ज होने के बाद से ही पुलिस प्रशासन मजीठिया की धरपकड़ के लिए लगातार अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रहा है। पुलिस की इस कड़े रुख के बाद से ही मजीठिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, जिसे आधार बनाकर विरोधी खेमा लगातार उन पर जुबानी हमले बोल रहा है।
चुनावी गढ़ में वर्चस्व की लड़ाई
मजीठा क्षेत्र में चल रही यह होर्डिंग और पोस्टर वॉर असल में सियासी वर्चस्व की एक बड़ी लड़ाई का रूप ले चुकी है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष और विपक्षी दल मिलकर मजीठिया को चौतरफा घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अकाली समर्थक इन सार्वजनिक संदेशों के जरिए अपने नेता के प्रति एकजुटता और वफादारी का प्रदर्शन कर रहे हैं। फिलहाल, मजीठा हल्के की दीवारों पर सजे ये नए पोस्टर आम जनता के कौतूहल और राजनेताओं की रणनीतियों का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।

