चंडीगढ़ | पंजाब सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए दो पीसीएस (PCS) अधिकारियों, प्रोमिला और अमरदीप सिंह, को डिमोट यानी पदावनत कर दिया है। यह कार्रवाई निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य विभागीय परीक्षा पास न कर पाने के कारण की गई है। मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार, पदोन्नति रद्द होने के बाद अब इन दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने मूल विभागों में पुराने पदों पर वापस लौटकर सेवाएं देनी होंगी। कार्मिक विभाग ने इस फैसले की प्रतियां संबंधित विभागों को भेज दी हैं।
छह मौकों के बाद भी फेल रहीं महिला अधिकारी
सामान्य प्रशासन विभाग में बतौर निजी सचिव अपनी सेवाएं दे चुकीं प्रोमिला को फरवरी 2021 में तरक्की देकर पीसीएस अधिकारी बनाया गया था। नियमों के मुताबिक, उन्हें अपनी नियुक्ति के डेढ़ साल के भीतर 'सिविल सेवा (विभागीय परीक्षा) नियम, पंजाब-2014' के तहत अनिवार्य परीक्षा उत्तीर्ण करनी थी। इसके लिए उन्हें अगस्त 2021 से मई 2023 के बीच चार नियमित अवसर दिए गए, लेकिन वह इनमें सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद सरकार ने दरियादिली दिखाते हुए उन्हें दिसंबर 2023 और जून 2024 में दो विशेष 'मर्सी चांस' (दया के अवसर) भी दिए और साफ चेतावनी दी कि यह आखिरी मौका होगा। इसके बावजूद वह परीक्षा पास करने में नाकाम रहीं, जिसके चलते अब उन्हें उनके पुराने विभाग में वापस भेज दिया गया है।
चार बार परीक्षा देने ही नहीं पहुंचे दूसरे अफसर
इस मामले के दूसरे अधिकारी अमरदीप सिंह हैं, जिन्हें सितंबर 2022 में जिला राजस्व अधिकारी से पदोन्नत कर पीसीएस कैडर में शामिल किया गया था। उन्हें भी सेवा शर्तों के अनुसार तय समय में विभागीय परीक्षा पास करनी थी, जिसके लिए उन्हें अक्टूबर 2022, मई 2023, दिसंबर 2023 और जुलाई 2024 में कुल चार मौके मिले। बेहद चौंकाने वाली बात यह रही कि अमरदीप सिंह इन चारों ही अवसरों पर परीक्षा में शामिल होने के लिए केंद्र पर पहुंचे ही नहीं। परीक्षा से लगातार अनुपस्थित रहने के कारण प्रशासन ने उन्हें वापस उनके मूल विभाग—राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन विभाग में जिला राजस्व अधिकारी के पद पर भेजने का फरमान सुना दिया है।
चुनावी ड्यूटी में लापरवाही का भी रहा रिकॉर्ड
अमरदीप सिंह के खिलाफ जारी किए गए आदेश पत्र में न केवल परीक्षा छोड़ने की बात कही गई है, बल्कि उनके पिछले प्रशासनिक रिकॉर्ड का भी हवाला दिया गया है। पत्र में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी उन्हें शासकीय कार्यों और चुनावी ड्यूटी में गंभीर लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया था। उस वक्त इस अनुशासनहीनता के लिए सरकार द्वारा उन्हें सस्पेंड (निलंबित) भी किया गया था। अब लगातार विभागीय नियमों की अनदेखी करने पर सरकार ने उनके खिलाफ यह डिमोशन की बड़ी कार्रवाई की है।

