राबड़ी देवी को बंगला खाली करने के नोटिस के बाद RJD का सवाल- जब नीतीश- मांझी के लिए आवास उपलब्ध, तो लालू राबड़ी के लिए क्यों नहीं ? 

Rabri Devi Bungalow Dispute : बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस कार्रवाई को विपक्ष को निशाना बनाने की कोशिश बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

Rabri Devi Bungalow Dispute:राबड़ी देवी को 15 दिन में मकान खाली करने का नोटिस

भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को 15 दिनों के भीतर 10 सर्कुलर रोड आवास खाली कर 39 हार्डिंग रोड स्थित आवास में स्थानांतरित होने का निर्देश दिया है. वहीं यह आवास मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है.

राबड़ी देवी ने आवास खाली करने से किया इनकार

हलांकि राबड़ी देवी ने फिलहाल 10 सर्कुलर रोड का बंगला खाली करने से साफ इनकार कर दिया है. राबड़ीदेवी के बंगला ना छोड़ने के बया नके बाद बिहार में आरोप प्रत्यारोपों की झड़ी लगी हुई है.   सत्ता पक्ष और विपक्ष लगातार नूरा कुश्ती में व्यस्त है. सरकार के नोटिस पर RJD नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है.ऐसा करके विपक्षी नेताओं को परेशान करने की कोशिश की जा रही है.

RJD का सवाल- नीतीश और मांझी को आवास मिला तो लालू को क्यों नहीं?

सोमवार को RJD प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल और राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सरकार पर हमला बोला.

अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी को केंद्रीय पूल से आवास उपलब्ध कराया जा सकता है, तो फिर पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को वही सुविधा क्यों नहीं दी जा सकती.

उन्होंने सरकार से पूछा कि जिन नेताओं को सरकारी आवास आवंटित किए गए हैं, क्या उन्हें भी खाली करने का नोटिस जारी किया गया है. यदि ऐसा हुआ है तो सरकार इसके दस्तावेज सार्वजनिक करे.

हाई कोर्ट के फैसले से जुड़ा है पूरा मामला

इस विवाद की एक महत्वपूर्ण कानूनी पृष्ठभूमि भी है. दरअसल, बिहार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को पटना में आजीवन सरकारी आवास और सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए कानून बनाया था.

हालांकि, यह कानून बाद में अदालत में चुनौती का विषय बना. बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री आवास के रूप में चिह्नित 5 देशरत्न मार्ग को बचाने के लिए तेजस्वी यादव हाई कोर्ट पहुंचे थे. इसी मामले में न्यायालय ने बिहार सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास देने का प्रावधान था.

यही फैसला अब राबड़ी देवी के आवास विवाद की प्रमुख वजह माना जा रहा है.

विपक्ष को टारगेट करने का आरोप

RJD नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ताधारी NDA सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है. पार्टी का कहना है कि एक ओर सरकार विभिन्न सरकारी आवासों को अपने नियंत्रण में ले रही है, जबकि दूसरी ओर विपक्ष के नेताओं से उनके आवास छीने जा रहे हैं.

राजद नेताओं ने यह भी दावा किया कि उपमुख्यमंत्री के लिए निर्धारित 5 देशरत्न मार्ग और विधानसभा अध्यक्ष के आवास को 1 अणे मार्ग परिसर में मिला दिया गया है.

BJP-JDU ने कहा- नियम सबके लिए समान

वहीं भाजपा और जदयू के नेताओं ने RJD के आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि यदि अदालत के आदेश और सरकारी नियम लागू हैं तो राबड़ी देवी को भी आवंटित आवास खाली करना होगा.

सत्ताधारी दल के नेताओं का कहना है कि 10 सर्कुलर रोड अब किसी अन्य मंत्री को आवंटित किया जा चुका है, इसलिए नियमानुसार इसे खाली कराया जाना आवश्यक है.

क्या है आगे की स्थिति?

राबड़ी देवी के बंगले को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब कानूनी और राजनीतिक दोनों रूप ले चुका है. एक तरफ सरकार नियमों का हवाला दे रही है, तो दूसरी ओर RJD इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है, खासकर तब जब विधानसभा चुनावों की चर्चा तेज हो रही है.

Latest news

Related news