RaGa on CBSE Copy Scanning ,नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली (Online Evaluation System) को लेकर केंद्र सरकार और बोर्ड पर तीखा हमला बोला है. राहुल गांधी का गंभीर आरोप है कि छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं (Answer Sheets) को स्कैन करने के लिए आधुनिक और सुरक्षित मशीनों के बजाय साधारण मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया, जिसने लाखों छात्रों के भविष्य और उनके परीक्षा परिणामों को प्रभावित किया है.
RaGa on CBSE Copy Scanning: पीड़ित छात्रों से मुलाकात के बाद उठाया मुद्दा
यह पूरा मामला तब सामने आया जब राहुल गांधी ने खुद उन छात्रों से मुलाकात की, जिन्होंने सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में विसंगतियों को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं. छात्रों का पक्ष सुनने और उनकी परेशानी समझने के बाद कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस पूरे मामले को सार्वजनिक किया और इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि पीएम मोदी के पास आम खाने और उस पर बात करने का समय तो है, लेकिन छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर वे चुप हैं.
टेंडर की शर्तों में गुपचुप बदलाव का आरोप
राहुल गांधी ने साक्ष्यों का हवाला देते हुए बताया कि मई 2025 में जारी किए गए सीबीएसई के शुरुआती टेंडर में स्पष्ट शर्त थी कि उत्तर पुस्तिकाओं को ‘स्वचालित रोबोटिक स्कैनर’ (Automated Robotic Scanner) से स्कैन किया जाएगा. इसके साथ ही कॉपियों की बाइंडिंग को सुरक्षित रखने और कम से कम 300 DPI (डॉट्स प्रति इंच) की उच्च गुणवत्ता में स्कैनिंग करने का सख्त प्रावधान था.
कांग्रेस नेता का आरोप है कि अगस्त 2025 में इस टेंडर को दोबारा जारी किया गया और बिना किसी ठोस वजह के इन महत्वपूर्ण और सुरक्षात्मक शर्तों को हटा दिया गया, जिससे पूरी स्कैनिंग प्रक्रिया की गुणवत्ता और गोपनीयता से समझौता हुआ.
निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए मोबाइल से की गई स्कैनिंग?
राहुल गांधी ने उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में बदलने का ठेका लेने वाली निजी कंपनी पर सीधे आरोप लगाए हैं. उनके अनुसार:
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कॉपियों को स्कैन करने के लिए रोबोटिक स्कैनर के बजाय मोबाइल फोन का धड़ल्ले से इस्तेमाल हुआ.
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मोबाइल से फोटो खींचने के कारण कई उत्तर पुस्तिकाओं की तस्वीरें बेहद धुंधली (Blur) हो गईं.
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कुछ महत्वपूर्ण पन्ने पूरी तरह स्कैन होने से छूट गए.
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कई मामलों में तो छात्रों की पूरी की पूरी कॉपियां सही तरीके से पोर्टल पर अपलोड ही नहीं की जा सकीं.
“यह सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं है, बल्कि देश के होनहार छात्रों के साथ सरासर धोखा है। एक विशेष निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों को बदला गया और इसका खामियाजा उन मासूम छात्रों को भुगतना पड़ रहा है जिनके अंक इस गड़बड़ी के कारण कम हो गए।” — राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद
छात्र शोधकर्ता की रिपोर्ट ने खोला राज
इस विवाद को हवा देने में एक छात्र शोधकर्ता सार्थक सिद्धांत (Sarthak Siddhant) की रिपोर्ट की बड़ी भूमिका रही है. राहुल गांधी ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए इस रिपोर्ट का भी हवाला दिया. सार्थक सिद्धांत की इस रिपोर्ट में सीबीएसई के ऑनलाइन मूल्यांकन पोर्टल का ठेका देने की पूरी प्रक्रिया, नियमों की अनदेखी और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था की सुरक्षा पर कई गंभीर तकनीकी सवाल उठाए गए थे. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से ही यह विवाद लगातार गहराता जा रहा है.
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पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग तेज
राहुल गांधी के इन सनसनीखेज आरोपों के बाद सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता पर देशव्यापी बहस छिड़ गई है. जहां एक तरफ विपक्ष इस पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश भर के छात्रों और अभिभावकों के बीच अपने बच्चों के भविष्य और रिजल्ट को लेकर चिंता का माहौल बन गया है. अब देखना यह है कि इस बढ़ते विवाद पर सीबीएसई और केंद्र सरकार की तरफ से क्या स्पष्टीकरण आता है.

