कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक बड़ा बयान जारी करते हुए अमेरिका को देश और दुनिया की रक्षा प्रणाली के प्रति आगाह किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका में एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों का वर्तमान उत्पादन बेहद धीमा और कम है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि अमेरिकी हथियारों के उत्पादन में यह सुस्ती सिर्फ यूक्रेन के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी एक नया और गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा कर सकती है।
रूस के बढ़ते उत्पादन से मुकाबले में अमेरिका पीछे
जेलेंस्की द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, एक तरफ जहां रूस अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन को लगातार और तेजी से बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया की महाशक्ति कहा जाने वाला अमेरिका हर महीने केवल 60 से 65 एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों का ही निर्माण कर पा रहा है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में यूक्रेन और दुनिया के सामने जो युद्ध कालीन और रक्षात्मक चुनौतियां खड़ी हैं, उनके सामने अमेरिका का यह उत्पादन न के बराबर है, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।
यूक्रेन ने मांगी 'पैट्रियट' मिसाइल बनाने की अनुमति
इस गंभीर रक्षा संकट और हथियारों की कमी से निपटने के लिए राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सीधे व्हाइट हाउस और अमेरिकी कांग्रेस (संसद) को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने अमेरिका से मांग की है कि वह यूक्रेन को अपनी सबसे आधुनिक और अचूक 'पैट्रियट' मिसाइल रक्षा प्रणाली बनाने का तकनीकी लाइसेंस और अधिकार प्रदान करे। यूक्रेन का मानना है कि लाइसेंस मिलने के बाद वे अपने घरेलू स्तर पर ही इन मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर सकेंगे, जिससे अमेरिकी आपूर्ति पर उनकी निर्भरता कम होगी और वे रूसी हवाई हमलों का मजबूती से सामना कर पाएंगे।
दिसंबर 2025 से कमजोर पड़ा रूस, कूटनीति पर जोर
युद्ध के मैदान की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करते हुए जेलेंस्की ने एक सकारात्मक दावा भी किया। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 के बाद से रूसी सेना ने अग्रिम मोर्चों और युद्ध के मैदान में अपनी बढ़त खोनी शुरू कर दी है, जिससे यूक्रेन को अपनी रणनीतियां मजबूत करने का मौका मिला है। हालांकि, लंबे समय से खिंच रहे इस विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने के लिए उन्होंने दूरदर्शिता दिखाते हुए कहा कि सर्दियों का मौसम शुरू होने से पहले सभी संबंधित पक्षों को बातचीत की मेज पर आना चाहिए और आपसी संवाद के जरिए एक ठोस कूटनीतिक रास्ता तलाशना चाहिए।

