स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती (फिटनेस) को लेकर वैश्विक स्तर पर एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत देने वाली खबर आई है। खुद को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए अब आपको महंगे जिम की सदस्यता लेने या वहां घंटों पसीना बहाने की कोई आवश्यकता नहीं है। दैनिक जीवन की आम गतिविधियां—जैसे लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, पैदल तेज चलना और घर की साफ-सफाई जैसे काम भी आपके शरीर को पूरी तरह निरोगी रख सकते हैं। यह अध्ययन उन कामकाजी लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है, जो समय की कमी का बहाना बनाकर वर्कआउट नहीं कर पाते हैं। दिनचर्या के ये छोटे-छोटे शारीरिक श्रम आपकी सेहत को संवारने में रामबाण साबित हो सकते हैं।
कसरत शुरू करने से ज्यादा उसे जारी रखना असली चुनौती
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक नए शोध में फिटनेस से जुड़े कई व्यावहारिक पहलुओं पर रोशनी डाली गई है। 'जापान टुडे' में प्रकाशित एक विस्तृत लेख के अनुसार, व्यायाम की शुरुआत करना तो बेहद सरल है, मगर उसे नियमित रूप से अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए रखना सबसे दुष्कर काम है। ड्रेक्सेल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर लॉरा बेहर का मानना है कि सेहत के लिए कसरत के फायदों को केवल जान लेना ही पर्याप्त नहीं है। कोई व्यक्ति अपनी फिटनेस को लेकर कितना गंभीर है, यह उसके आत्म-विश्वास पर निर्भर करता है। दफ्तर के काम के तनाव और शारीरिक थकान के बावजूद अपने शारीरिक श्रम के नियम को न तोड़ना ही असली समझदारी है।
नियमित सक्रियता से दूर रहेंगी ये जानलेवा बीमारियां
लगातार शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से शरीर कई तरह की गंभीर और क्रोनिक बीमारियों की चपेट में आने से बच जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, शारीरिक गतिविधियों का सीधा और सकारात्मक प्रभाव हमारे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम (हृदय तंत्र) पर पड़ता है। इससे दिल मजबूत होता है और धमनियों में रक्त का संचार सुचारू रूप से चलता है। इसके अतिरिक्त, ढलती उम्र के साथ होने वाली मानसिक बीमारियां, जैसे याददाश्त का धुंधला होना या अल्जाइमर का खतरा भी काफी हद तक टल जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक्टिव रहने से शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल कर पाती हैं, जिससे मधुमेह (डायबिटीज) होने की आशंका न के बराबर हो जाती है।
कसरत का साप्ताहिक मानक पूरा करने में पिछड़ रही है दुनिया
अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था 'सीडीसी' (CDC) के तय मानकों के मुताबिक, एक वयस्क व्यक्ति को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट का मध्यम स्तर का एरोबिक व्यायाम (जैसे ब्रिक्स वॉक, हल्की दौड़ या तैराकी) अवश्य करना चाहिए। इसके साथ ही, हफ्ते में दो दिन मसल्स स्ट्रेंथनिंग यानी मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करना जरूरी है। हालांकि, इस रिपोर्ट से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। अमेरिका जैसे जागरूक देश में भी 50 फीसदी आबादी इस न्यूनतम लक्ष्य को हासिल नहीं कर पा रही है। सीडीसी के कड़े पैमानों पर चार में से महज एक नागरिक ही पूरी तरह खरा उतर पा रहा है।
रोज की सक्रियता से टल सकती है अकाल मृत्यु
एक व्यापक वैज्ञानिक विश्लेषण के निष्कर्ष बताते हैं कि जो लोग प्रतिदिन किसी न किसी रूप में शारीरिक मेहनत करते हैं, उनमें असमय मौत (अकाल मृत्यु) का जोखिम 30 से 40 प्रतिशत तक घट जाता है। ऐसे सजग लोगों में हृदय रोग और कैंसर जैसी घातक बीमारियों से होने वाली मृत्यु दर बेहद कम पाई गई है। चिकित्सा शास्त्रियों ने स्पष्ट किया है कि फिटनेस की डगर पर कदम रखने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती। आप जीवन के किसी भी मोड़ पर हों, आज से ही की गई शारीरिक सक्रियता आपके स्वास्थ्य को नया जीवन दे सकती है।

