नई दिल्ली | लगातार गिरती कीमतों और निर्यात में आ रही बाधाओं से बेहाल प्याज उत्पादकों के लिए राहत की एक बड़ी खबर आई है। केंद्र सरकार ने किसानों को वित्तीय संकट से उबारने के लिए सीधे उनसे प्याज खरीदने का एक बड़ा नीतिगत फैसला किया है। इसके तहत सरकार ₹1235 प्रति क्विंटल (यानी ₹12.35 प्रति किलोग्राम) के न्यूनतम भाव पर प्याज की सरकारी खरीद करेगी। इस महत्वपूर्ण योजना की घोषणा महाराष्ट्र के सतारा में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान की गई, जिससे संकट में घिरे किसानों को फौरी तौर पर आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है।
कूटनीतिक संकट से गिरे दाम, कृषि मंत्री ने किया खरीद का एलान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की गरिमामयी उपस्थिति में इस विशेष खरीद अभियान की आधिकारिक शुरुआत की। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया के मौजूदा कूटनीतिक संकट और ईरान पर अमेरिका व इस्राइल के हमलों के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्याज का निर्यात बुरी तरह ठप हो गया है। विदेशी बाजारों में आपूर्ति रुकने के कारण घरेलू मंडियों में प्याज के दाम औंधे मुंह गिर गए, जिससे किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा था। इसी नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने खुद ₹12.35 प्रति किलो की दर से प्याज खरीदने का जिम्मा उठाया है।
आज से ही शुरू होगी पूरी फसल की खरीद, 'नाफेड' को मिले निर्देश
कृषि मंत्री ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्याज की यह सरकारी खरीद आज से ही प्रभावी कर दी गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों के पास उपलब्ध प्याज का पूरा स्टॉक खरीदा जाएगा ताकि उन्हें मंडियों के चक्कर न काटने पड़ें। इस वृहद कार्य को पारदर्शिता और तेजी से पूरा करने के लिए सरकार ने 'राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ' (नाफेड) को तत्काल दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रतिबद्धता दोहराई कि राज्य के प्रत्येक जरूरतमंद किसान तक इस योजना का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकारी भाव से किसान नाखुश, ₹3000 क्विंटल की उठी मांग
सरकार की इस पहल के बावजूद, महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक इस घोषित मूल्य से संतुष्ट नहीं हैं। एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी 'लासलगांव' के 'महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ' ने सरकारी भाव पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। किसान संगठन का तर्क है कि ₹1,235 प्रति क्विंटल की यह दर फसल उत्पादन की वास्तविक लागत निकालने में भी नाकाफी है। संगठन ने मांग रखी है कि सरकार इस मूल्य को संशोधित कर कम से कम ₹3,000 प्रति क्विंटल करे और पिछले दिनों घाटे में फसल बेच चुके किसानों को उचित मुआवजा दे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं हुआ, तो वे जल्द ही एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।

