Bihar Private School Fees : बिहार में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है. राज्य सरकार ने सभी निजी स्कूलों को अपनी फीस संरचना सार्वजनिक करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही साफ कर दिया गया है कि बिना अनुमति 7 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ाई जा सकती.
पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम ने सभी निजी स्कूलों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि फीस से जुड़ी पूरी जानकारी अभिभावकों के लिए सार्वजनिक की जाए. आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
Bihar Private School Fees:7% से ज्यादा फीस बढ़ाने पर रोक
बिहार प्राइवेट स्कूल (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2019 के तहत निजी और गैर-सहायता प्राप्त स्कूल पिछले शैक्षणिक वर्ष की तुलना में अधिकतम 7% तक ही फीस बढ़ा सकते हैं.
यदि किसी स्कूल को इससे अधिक फीस बढ़ानी है तो उसे फीस रेगुलेटरी कमिटी से मंजूरी लेनी होगी. राज्य सरकार समय-समय पर इस सीमा में बदलाव कर सकती है.
इस नियम के तहत ट्यूशन फीस, एडमिशन फीस, वार्षिक शुल्क, डेवलपमेंट फीस, परीक्षा शुल्क और ट्रांसपोर्ट फीस समेत सभी प्रकार की फीस शामिल हैं.
फीस स्ट्रक्चर सार्वजनिक करना अनिवार्य
सरकार के आदेश के मुताबिक हर निजी स्कूल को अपनी फीस संरचना स्कूल परिसर और वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी. स्कूल किसी भी तरह के हिडन चार्जेस नहीं वसूल सकते.
यदि किसी अभिभावक को मनमानी फीस वसूली की शिकायत है तो वे इसकी शिकायत जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), डीएम कार्यालय या शिक्षा विभाग में दर्ज करा सकते हैं.
कई जिलों में प्रशासन की कार्रवाई तेज
हाल के महीनों में बिहार के कई जिलों में इस कानून को सख्ती से लागू किया गया है.
- मुजफ्फरपुर में 300 से अधिक स्कूलों को नोटिस जारी किया गया.
- पश्चिम चंपारण समेत अन्य जिलों में फीस बढ़ोतरी, जबरन किताब-यूनिफॉर्म खरीदवाने और अन्य अनियमितताओं पर प्रशासन सक्रिय हुआ है.
जबरन किताब-यूनिफॉर्म खरीदवाना भी गैरकानूनी
नियमों के अनुसार कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता. इसके अलावा री-एडमिशन या अन्य नामों पर अतिरिक्त मनमानी शुल्क वसूलना भी प्रतिबंधित है.
स्कूल बंद रहने पर ट्रांसपोर्ट फीस नहीं
गर्मी की छुट्टियों या अन्य बंद अवधि में स्कूल ट्रांसपोर्ट सेवा उपलब्ध नहीं होने पर फीस नहीं ले सकते। यदि ऐसा किया जाता है तो अभिभावक इसकी शिकायत कर सकते हैं।
पटना हाईकोर्ट ने कानून को बताया संवैधानिक
पटना हाईकोर्ट ने 2024 में बिहार प्राइवेट स्कूल (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2019 को संवैधानिक करार दिया था. कोर्ट ने कहा था कि शिक्षा का व्यावसायीकरण रोकना सरकार का अधिकार है और अभिभावकों के हितों की रक्षा जरूरी है.
अभिभावकों को क्या करना चाहिए?
अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चों के स्कूल का मौजूदा फीस स्ट्रक्चर पिछले साल से मिलान करें. यदि 7% से अधिक वृद्धि या कोई छिपा शुल्क दिखे तो तुरंत लिखित शिकायत दर्ज कराएं.
राज्य सरकार का यह कदम लाखों अभिभावकों को राहत देने वाला माना जा रहा है और इससे निजी स्कूलों की फीस मनमानी पर लगाम लगने की उम्मीद है.

