नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से राष्ट्रहित में एक साल तक सोना (Gold) न खरीदने की विशेष अपील की है। पश्चिम एशिया (ईरान-अमेरिका तनाव) में बढ़ते संकट और वैश्विक अस्थिरता के बीच पीएम का मानना है कि विदेशी मुद्रा बचाना और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना समय की मांग है। भारत, चीन के बाद सोने का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, इसलिए इस अपील के गहरे मायने हैं।
भारत में सोने का गणित: हम कहां से कितना मंगाते हैं?
भारत में हर साल करीब 800 से 900 टन सोने की खपत होती है, लेकिन देश में इसका उत्पादन न के बराबर है। इसी वजह से हमें लगभग पूरा सोना विदेशों से आयात (Import) करना पड़ता है।
-
स्विट्जरलैंड: सबसे बड़ा सप्लायर (40%)
-
UAE: 16%
-
साउथ अफ्रीका: 10%
-
पेरू: 8%
-
अन्य (हॉन्ग कॉन्ग आदि): 26%
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, भारत में हर दिन करीब 2.2 टन (2000-2200 करोड़ रुपये) का सोना खरीदा जाता है।
सोना क्यों बन रहा है अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती?
सोना खरीदना व्यक्तिगत रूप से 'शुभ' या 'निवेश' हो सकता है, लेकिन देश के लिए यह एक बड़ा आर्थिक बोझ है:
-
विदेशी मुद्रा का खर्च: वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-फरवरी) में भारत ने 69 अरब डॉलर (करीब 6 लाख करोड़ रुपये) का सोना आयात किया। यह पिछले साल के मुकाबले 29% ज्यादा है।
-
रुपये पर दबाव: सोने के बदले हमें डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। इससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कम होता है और डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर पड़ता है।
-
व्यापार घाटा (Trade Deficit): हम विदेशों से सामान ज्यादा मंगा रहे हैं (आयात) और बेच कम रहे हैं (निर्यात)। पिछले साल हमारा व्यापार घाटा 119.30 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसका एक बड़ा कारण सोना ही है।
-
CAD में बढ़ोतरी: चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने से देश की वित्तीय सेहत बिगड़ती है।
अगर एक साल सोना न खरीदा जाए, तो क्या होगा?
प्रधानमंत्री की अपील का असर अगर जमीन पर दिखता है, तो इसके कई बड़े फायदे होंगे:
-
व्यापार घाटा कम होगा: आयात में कमी आने से अरबों डॉलर देश के भीतर ही रहेंगे।
-
रुपये को मजबूती: डॉलर की मांग कम होने से रुपया स्थिर और मजबूत होगा।
-
उत्पादक निवेश: सोने में 'डेड इन्वेस्टमेंट' (तिजोरी में रखा सोना) के बजाय लोग पैसा बैंक, शेयर बाजार या बॉन्ड्स में लगाएंगे। यह पैसा देश के बुनियादी ढांचे और उद्योगों के काम आएगा।
-
महंगाई पर लगाम: विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होने से वैश्विक झटकों से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी।
भारत में शादियों और त्योहारों (धनतेरस, अक्षय तृतीया) पर सोना खरीदना एक परंपरा है, लेकिन आर्थिक स्थिति को देखते हुए पीएम ने इसे 'राष्ट्रहित' से जोड़ा है। यदि जनता इस अपील को मानती है, तो भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक अस्थिरता के बीच एक मजबूत कवच मिल सकता है।

