Mamata Banerjee’s Resignation : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद Mamata Banerjee ने मंगलवार को प्रेस काफ्रेंस के दौरान ऐसा दावा कर दिया को लोग हैरान रह गये. चुनाव में बुरी तरह के हारने के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि वो अपने पद से यानी मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा नहीं देंगी. उन्होंने कहा कि क्योंकि उन्हें इस चुनाव में साजिश के तहत हराया गया है, इसलिए वो अपनी हार स्वीकार नहीं करती हैं और पद से इस्तीफा नहीं देंगी.
#WATCH | Kolkata: Outgoing West Bengal CM Mamata Banerjee says, “After first round of counting, they started saying that BJP is getting 195-200. You didn’t wait for the final result. You didn’t even wait for 5-6 rounds. After that campaign with the press media, BJP went inside… pic.twitter.com/e72Bcs8Dpj
— ANI (@ANI) May 5, 2026
Mamata Banerjee’s Resignation-हारी नहीं ..हराई गई हूं…
उन्होने अपने और टीएमसी की हार के लिए बीजेपी और Election Commission of India पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जनादेश से नहीं, बल्कि साजिश के तहत हराया गया है. ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में पहली बार Bharatiya Janata Party सरकार बनाने की स्थिति में है और तृणमूल कांग्रेस के लंबे शासन का समापन हो गया है.
क्या इस्तीफा न देने से बच सकती हैं मुख्यमंत्री?
संवैधानिक तौर पर किसी मुख्यमंत्री का पद व्यक्तिगत इच्छा से नहीं, बल्कि विधानसभा के बहुमत और कार्यकाल से तय होता है. इसलिए इस्तीफा ना देने का फैसला अंतिम नहीं होता. अगर कोई मुख्यमंत्री हार के बाद भी पद पर बने रहने की कोशिश करता है, तो संविधान में इसके स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं.
विधानसभा में बहुमत ही सबसे बड़ा फैक्टर
अगर किसी मुख्यमंत्री के पास बहुमत नहीं है, और सरकार का कार्यकाल बाकी है तो राज्यपाल उन्हें फ्लोर टेस्ट के लिए कह सकते हैं.फ्लोर टेस्ट में असफल होने पर मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना ही पड़ता है. अगर वह ऐसा नहीं करते, तो राज्यपाल उन्हें पद से हटा भी सकते हैं.हालांकि बंगाल के मौजूदा मामले में नई विधानसभा का गठन होना बाकी है,इसलिए यह स्थिति फिलहाल सीधे लागू नहीं होती.
कार्यकाल खत्म होते ही खत्म हो जाएगी सरकार
संवैधानिक तौर पर पश्चिम बंगाल सरकार का कार्यकाल 7 मई तक ही है. इसके बाद मौजूदा सरकार का संवैधानिक अस्तित्व अपने आप खत्म हो जाएगा. यानी भले ही ममता बनर्जी इस्तीफा न दें, लेकिन तय समय के बाद उनका पद स्वतः समाप्त हो जाएगा.
इसके बाद राज्यपाल नई सरकार बनाने के लिए सबसे बड़े दल को आमंत्रित करेंगे और नई सरकार के शपथ लेते ही पुरानी सरकार पूरी तरह समाप्त हो जाएगी.
क्या बन सकता है संवैधानिक संकट?
अगर किसी राज्य में ऐसी स्थिति बनती है जहां कोई भी दल स्पष्ट बहुमत में न हो और मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार करे, तो मामला संवैधानिक संकट में बदल सकता है.
ऐसी स्थिति में राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकते हैं और Article 356 of the Constitution of India के तहत राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है.
इस दौरान राज्य की सत्ता सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में चली जाती है.
छह महीने वाला नियम क्या कहता है?
संविधान के अनुसार अगर कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बनता है लेकिन वह विधानसभा का सदस्य नहीं है, तो उसे 6 महीने के भीतर सदस्य बनना जरूरी होता है. अगर ऐसा नहीं होता, तो उसे पद छोड़ना पड़ता है. हालांकि मौजूदा स्थिति में यह नियम सीधे तौर पर लागू नहीं होता.
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जानकारों की राय: इस्तीफा न देना सिर्फ राजनीतिक बयान?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का इस्तीफा न देने वाला बयान ज्यादा राजनीतिक संदेश देने के लिए है, न कि संवैधानिक चुनौती देने के लिए. क्योंकि संविधान के प्रावधान इतने स्पष्ट हैं कि कोई भी मुख्यमंत्री तय समय और बहुमत के बिना पद पर नहीं टिक सकता.
ममता बनर्जी का इस्तीफा न देने का फैसला भले ही राजनीतिक रूप से चर्चा में हो, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया के आगे यह ज्यादा समय तक टिक नहीं सकता. इसलिए ऐसा लगता है कि बतौर मुख्यमंत्री ये जानते हुए भी अगर उन्होंने ऐसा बयान दिया है तो ये केवल राजनीतक खीज हो सकती है, संवैधानिक चुनौती नहीं. कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही सत्ता परिवर्तन तय है और पश्चिम बंगाल में नई सरकार का गठन होना निश्चित है. बीजेपी ने नई सरकार के गठन के लिए 9 मई की तारीख तय कर ली है.

