CPI ,CPI(M) और कांग्रेस ने की चुनाव आयोग से पीएम की शिकायत, देश के नाम संदेश को बताया आचार संहिता का उल्लंघन

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के सांसद पी. संदोष कुमार, जनरल सेक्रेटरी एम.ए. बेबी और कांग्रेस नेता अनिल अक्कारा ने रविवार को Election Commission को पतर लिख आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिए देश के नाम संदेश में आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन है, जो अभी पांच इलाकों में लागू है. अपनी शिकायत में सभी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ शिकायत की मांग की.

Election Commission की निष्पक्षता पर लोगों का भरोसा कम होने का खतरा है- पी. संदोष कुमार

CPI के सांसद पी. संदोष कुमार ने रविवार को चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) को लिखे एक लेटर में तर्क दिया कि, “यह भाषण दूरदर्शन और संसद टीवी जैसे नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर पर दिखाया गया था. सरकारी संसाधनों और सरकारी पैसे से चलने वाले प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल, जो असल में एक राजनीतिक भाषण है, उसे फैलाने के लिए करना चुनावी नियमों का गंभीर उल्लंघन है. यह उस बराबरी के मौके को कमज़ोर करता है, जिसे चुनाव आयोग को उस समय बनाए रखने का संवैधानिक अधिकार है जब मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होता है.”
संसद ने चुनाव आयोग से प्रधानमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो इलेक्शन कमीशन की निष्पक्षता पर लोगों का भरोसा कम होने का खतरा है. उन्होंने लिखा, “ऐसे किसी भी मामले पर ध्यान न देने से इंस्टीट्यूशनल मिलीभगत का संकेत मिलने और इलेक्शन कमीशन की निष्पक्षता पर लोगों का भरोसा कम होने का खतरा है. मैं कमीशन से आग्रह करता हूं कि वह इस मामले में तुरंत और ईमानदारी से कार्रवाई करे, जांच शुरू करे, और जवाबदेही सुनिश्चित करे ताकि इलेक्शन प्रोसेस की पवित्रता बनी रहे.”

CPI(M) जनरल सेक्रेटरी एम.ए. बेबी ने की पीएम के खिलाफ कार्रवाई की मांग

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) ने भी कहा है कि जब मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू है और तमिलनाडु और बंगाल में विधानसभा चुनाव पास आ रहे हैं, तब पॉलिटिकल मैसेजिंग के लिए पब्लिक ब्रॉडकास्टर दूरदर्शन का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है.
पार्टी ने इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया में शिकायत दर्ज कराई है और इस उल्लंघन के लिए प्रधानमंत्री और दूसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
ECI को लिखे एक लेटर में, पार्टी के जनरल सेक्रेटरी एम.ए. बेबी ने कहा, “एड्रेस के कंटेंट, टोन और मैसेज को किसी भी तरह से सरकारी कम्युनिकेशन नहीं कहा जा सकता. यह साफ तौर पर पॉलिटिकल था, जिसमें विपक्षी पार्टियों को टारगेट किया गया था – उनमें से कई का नाम लिया गया था – और तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के वोटरों सहित पब्लिक ओपिनियन को रूलिंग पार्टी के पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश की गई थी.
“यह सेक्शन 4 में “पार्टी इन पावर” हेडिंग के तहत दिए गए MCC प्रोविज़न का खुला उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है:
“चुनाव के समय अखबारों और दूसरे मीडिया में सरकारी खजाने के खर्च पर विज्ञापन देना और सत्ता में बैठी पार्टी की जीत की उम्मीदों को बढ़ाने के लिए राजनीतिक खबरों और उपलब्धियों के बारे में प्रचार के लिए सरकारी मास मीडिया का गलत इस्तेमाल करने से पूरी तरह बचना चाहिए.”

पीएम ने चुनावी राज्यों वाली पार्टियों का नाम लिया- कांग्रेस

वहीं, कांग्रेस नेता अनिल अक्कारा, जिन्होंने एक अलग शिकायत दर्ज कराई है ने भी पीएम पर आरोप लगाया कि भाषण के दौरान चुनाव वाले राज्यों में चुनाव लड़ रही राजनीतिक पार्टियों का नाम लेकर अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और इसे “चुनाव प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन” कहा.
पूर्व CEC OP ने कहा, “असल में, मेरा मानना है कि चल रहे चुनावों को देखते हुए, विपक्ष को अपनी चिंताएं और नज़रिया बताने के लिए सभी ऑफिशियल मीडिया चैनलों पर बराबर समय मिलना चाहिए था. लेकिन MCC अपने मौजूदा रूप में केंद्र या दूसरी राज्य सरकारों को ऐसा कुछ भी करने की इजाज़त देता है जो खास तौर पर चुनाव वाले राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के लिए टारगेटेड न हो.”
ECI ने केंद्र सरकार पर भी लागू किया था MCC
आपको बता दें, 16 मार्च को जब चुनाव शेड्यूल की घोषणा हुई थी, तब ECI के अपने नोटिफिकेशन में कहा गया था कि चुनाव वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश से जुड़ी घोषणाओं या पॉलिसी फैसलों के लिए MCC केंद्र सरकार पर भी लागू होगा.

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