Iran Hormuz Firing : होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. ईरान की ताजा सैन्य कार्रवाई ने न केवल समुद्री व्यापार को बाधित किया है, बल्कि भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा जहाजों पर की गई गोलीबारी के बाद, भारतीय झंडे वाले दो विशाल टैंकरों को अपना रास्ता बदलकर बीच समुद्र से ही वापस लौटना पड़ा है.
According to two Channel 16 audio recordings captured today, two Indian vessels were forced back west out of the Strait of Hormuz by Iran’s Sepah (IRGC) Navy. Firing was involved. One of the vessels is an Indian-flagged VLCC supertanker carrying 2 million barrels of Iraqi oil.… pic.twitter.com/c1uOvmKDNO
— TankerTrackers.com, Inc. (@TankerTrackers) April 18, 2026
Iran Hormuz Firing की आक्रामक कार्रवाई
शनिवार को ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में सख्त पाबंदियां लागू करने का ऐलान किया था. ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने उसके बंदरगाहों और जहाजों की नाकेबंदी कर रखी है, जिसके जवाब में उसने यह कदम उठाया. इस घोषणा के कुछ ही देर बाद, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की दो हथियारबंद गनबोट्स एक टैंकर के करीब पहुंचीं और उस पर गोलियां चलाना शुरू कर दिया. इस अचानक हुए हमले ने पूरे समुद्री मार्ग में दहशत फैला दी.
सुरक्षित बचा क्रू लेकिन मिशन अधूरा
ब्रिटेन की सैन्य इकाई यूके मेरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर (UKMTO) ने इस हमले की पुष्टि की है. राहत की बात यह है कि जिस टैंकर पर गोलीबारी की गई, उसका पूरा स्टाफ सुरक्षित है. हालांकि, सुरक्षा कारणों से ब्रिटेन ने उस जहाज के नाम और गंतव्य का खुलासा नहीं किया है लेकिन वैश्विक शिपिंग ट्रैकर्स के अनुसार, इन जहाजों में भारत का एक बड़ा टैंकर भी शामिल है जो हमले के समय वहीं मौजूद था.
भारतीय सुपरटैंकर और 20 लाख बैरल तेल
शिपिंग ट्रैकिंग वेबसाइट ‘टैंकर ट्रैकर्स’ ने जानकारी दी है कि दो भारतीय जहाज होर्मुज की खाड़ी से गुजरने की कोशिश कर रहे थे. जैसे ही गोलीबारी की खबर आई, दोनों जहाजों ने तुरंत अपनी दिशा बदली और वापस मुड़ गए. इनमें से एक भारतीय झंडे वाला ‘वेरी लार्ज क्रूड कैरियर’ है, जिसमें इराक से खरीदा गया 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा हुआ था. यह तेल किसी अन्य देश को पहुँचाया जाना था, जो अब अधर में लटक गया है.
खाड़ी में गहराता युद्ध का साया
ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी जहाज इस रास्ते से नहीं गुजर सकता. वर्तमान में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के कारण क्षेत्र में सैन्य तनाव चरम पर है. बुधवार, 22 अप्रैल को दो सप्ताह का युद्धविराम समाप्त होने वाला है. यदि इस अवधि तक कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो स्थिति और भी विस्फोटक हो सकती है.
दुनिया की ‘लाइफलाइन’ पर मंडराता खतरा
होर्मुज की खाड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है. फारस की खाड़ी को शेष विश्व से जोड़ने वाला यह संकरा रास्ता दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है. अगर ईरान इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर देता है, तो एक बार फिर से वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मच सकता है. सप्लाई चेन टूटने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की जेब पर पड़ेगा.

