भरी संसद में भाजपा नेता का बयान-‘अगर कुलदीप सेंगर,बृजभूषण शरण का नाम लेंगे तो आदित्य ठाकरे का भी नाम आयेगा’

Loksabha:लोकसभा में गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 को महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर चर्चा के दौरान राजनीतिक मर्यादा की सीमाएं लांघ दी गईं. सदन में उस समय तनाव चरम पर पहुंच गया जब शिवसेना (UBT) और भाजपा के सांसदों के बीच व्यक्तिगत छींटाकशी शुरू हो गई. इस दौरान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आदित्य ठाकरे को लेकर एक ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे सदन में विपक्ष के भड़का दिया.

Loksabha में अरविंद सावंत के बयान से शुरू हुई बात

विवाद की शुरुआत शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत के भाषण से हु. सावंत ने सत्तापक्ष पर हमला बोलते हुए पूर्व सांसद कुलदीप सिंह सेंगर और बृजभूषण शरण सिंह का नाम लिया. उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने वाली भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके दल से ऐसे नेता जुड़े रहे हैं जिन पर गंभीर आरोप हैं. सावंत के इस बयान पर सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया और स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों को व्यक्तिगत आरोप न लगाने की हिदायत दी.

 निशिकांत दुबे का ने किया पलटवार

अरविंद सावंत के आरोपों का जवाब देने के लिए झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे मैदान में उतरे. उन्होंने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि अगर विपक्ष कुलदीप सेंगर और बृजभूषण की बात करेगा, तो फिर आदित्य ठाकरे का नाम भी आएगा. दुबे ने बिना सीधे नाम लिए दिशा सालियन मामले की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि “उसने भी एक हीरोइन को मार दिया.” उन्होंने कहा कि अगर पुराने मामलों की फाइलें खुलेगी, तो चर्चा सबकी होगी.

विपक्ष का पलटवार और ‘कुत्ते’ वाला बयान

निशिकांत दुबे के इस बयान के बाद सदन में भारी नारेबाजी और हंगामा हुआ. शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस बयान को ‘बेबुनियाद और बेहूदा’ करार देते हुए माफी की मांग की. वहीं, सदन के बाहर संजय राउत ने भाजपा पर तीखा हमला बोला. राउत ने विवादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि भाजपा ने “भोंकने वाले कुत्ते” पाल रखे हैं जो मराठी नेताओं को निशाना बना रहे हैं. उन्होंने महाराष्ट्र के भाजपा नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए.

विवाद का पुराना इतिहास

गौरतलब है कि कुलदीप सेंगर और बृजभूषण शरण सिंह पर यौन अपराधों के गंभीर आरोप रहे हैं, जिन पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है. वहीं, आदित्य ठाकरे पर निशिकांत दुबे द्वारा लगाया गया आरोप साल 2020 के दिशा सालियन मौत मामले से प्रेरित नजर आता है. हालांकि, इस मामले में आदित्य ठाकरे के खिलाफ कोई अदालती दोषसिद्धि नहीं हुई है और इसे अक्सर सोशल मीडिया पर साजिश की थ्योरी के रूप में देखा जाता रहा है.

महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान इस तरह की व्यक्तिगत बयानबाजी ने सदन की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वर्तमान में महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) और भाजपा के बीच चल रहे तनाव का असर अब दिल्ली की संसद में भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है.

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