US-Iran Peace talks fail वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: दुनिया की नजरें इस्लामाबाद में चल रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर टिकी थीं, लेकिन 21 घंटों की लंबी जद्दोजहद के बाद नतीजा सिफर रहा. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) बिना किसी समझौते के अमेरिका लौट गये हैं. वार्ता विफल होते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेवर कड़े कर लिए हैं और ईरान को अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी दे डाली है.
US-Iran Peace talks fail : ट्रंप करेंगे समुद्र से ईरान की नाकेबंदी
शांति वार्ता के नतीजे सामने आने के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक लेख साझा किया. इस आर्टिकल के जरिए संकेत दिए गए हैं कि अब अमेरिका के पास ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) करने का विकल्प खुला है.
ट्रंप ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि ईरान सीधे रास्ते पर नहीं आता, तो उसे वेनेजुएला की तरह आर्थिक रूप से पंगु बनाया जा सकता है. ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि वे ईरान को ‘पाषाण युग’ में वापस भेजने की ताकत रखते हैं.
वेंस का बड़ा बयान: “ईरान के लिए यह बुरी खबर है”
वापसी के बाद जेडी वेंस ने मीडिया को बताया कि वॉशिंगटन ने ईरान के सामने अपना “आखिरी और सबसे अच्छा” प्रस्ताव रखा था, जिसे तेहरान ने ठुकरा दिया. वेंस ने कहा, “यह अमेरिका के लिए जितनी बुरी खबर है, उससे कहीं ज्यादा बुरी ईरान के लिए है.”
21 घंटे की बातचीत में क्या फंसा पेंच?
-
परमाणु प्रतिबद्धता: अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबी अवधि के लिए लिखित गारंटी दे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.
-
संवर्धन क्षमता: वेंस के अनुसार ईरान की संवर्धन (Enrichment) सुविधाएं पहले ही कमजोर की जा चुकी हैं, लेकिन अब मुद्दा ‘क्षमता’ का नहीं बल्कि ईरान की ‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’ का है.
-
प्रतिबंधों पर असहमति: आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन ईरान अमेरिकी शर्तों पर राजी नहीं हुआ.
हॉटलाइन पर थे ट्रंप
दिलचस्प बात यह है कि जब इस्लामाबाद में जेडी वेंस और उनकी टीम ईरान के साथ मेज पर बैठी थी, राष्ट्रपति ट्रंप लगातार हॉटलाइन के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के संपर्क में थे. वे पल-पल की अपडेट ले रहे थे. वेंस ने साफ किया कि अमेरिका ने शर्तों में लचीलापन दिखाया और पूरी ईमानदारी से प्रयास किए, लेकिन ईरान का जवाब सकारात्मक नहीं रहा.
अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप वाकई ईरान की समुद्री घेराबंदी का आदेश देते हैं या यह केवल दबाव बनाने की एक कूटनीतिक चाल है.

