“Goodwill but no trust”: इस्लामाबाद में शांति वार्ता से पहले ईरान ने अमेरिका को बताई शर्तें,पीड़ितों की याद में भावुक हुए ग़ालिबफ़

Islamabad Iranian Delegation :मध्य पूर्व (West Asia) में जारी तनाव के बीच शांति की उम्मीदें अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली शांति डील पर टिकी हैं. अमेरिका के साथ होने वाली इस महत्वपूर्ण शांति वार्ता के लिए ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुँच चुके हैं. हालांकि उन्होने बातचीत से पहले ही  ईरान के इरादे साफ कर दिए हैं.

Islamabad Iranian Delegation:’अमेरिका ने बार-बार तोड़ा वादा’

इस्लामाबाद पहुँचने पर पत्रकारों से बात करते हुए ग़ालिबफ़ ने अमेरिका के प्रति गहरे अविश्वास को जाहिर किया. उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, कि अमेरिकियों के साथ हमारा अनुभव हमेशा असफलता और वादे तोड़ने वाला रहा है. उन्होंने बातचीत के दौरान ही हम पर दो बार हमला किया. हमारे मन में मानवता के प्रति सद्भावना तो है, लेकिन अमेरिका पर भरोसा बिल्कुल नहीं है.” ग़ालिबफ़ का यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस की हालिया टिप्पणियों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है.

वार्ता से पहले ईरान की 2 बड़ी शर्तें

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब उनकी मांगों पर अमल होगा. ग़ालिबफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि दोनों पक्षों के बीच सहमत हुए दो प्रमुख बातें अभी भी अधूरी हैं:

  1. लेबनान में संघर्ष-विराम: इज़राइल द्वारा लेबनान में चलाए जा रहे सैन्य अभियानों पर तत्काल रोक.

  2. फ्रीज फंड की रिहाई: विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंक खातों में रोकी गई ईरान की संपत्तियों को वापस करना.

ग़ालिबफ़ ने जोर देकर कहा कि इन दोनों मुद्दों पर जब तक कोई हल नहीं निकलता है, आधिकारिक चर्चा शुरू होना मुश्किल है.

मिनाब पीड़ितों को लेकर भावुक क्षण

इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच एक मार्मिक दृश्य भी देखने के लिए मिला. ग़ालिबफ़ जब इस्लामाबाद पहुंचे तो वो अपने साथ  मिनाब घटना के पीड़ितों की तस्वीरें भी लेकर आये.  उन्होंने सोशल मीडिया X पर इन तस्वीरों को साझा करते हुए लिखा, “इस उड़ान में मेरे साथी.” इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ईरान की संवेदनशीलता और अपने नागरिकों के प्रति जवाबदेही दिखाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं दिग्गज चेहरे

ईरान इस वार्ता को कितनी गंभीरता से ले रहा है, इसका अंदाजा उसके प्रतिनिधिमंडल से लगाया जा सकता है. इसमें शामिल हैं:

  • सैयद अब्बास अराघची: विदेश मंत्री

  • अली अकबर अहमदीन: रक्षा परिषद के सचिव

  • अब्दोलनासेर हेम्मती: केंद्रीय बैंक के गवर्नर

  • इसके अलावा सुरक्षा, सैन्य और कानूनी क्षेत्रों के कई विशेषज्ञ भी इस दल का हिस्सा हैं.

क्या सफल होगा संघर्ष-विराम?

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्तों का अस्थायी संघर्ष-विराम प्रभावी है. तेहरान का तर्क है कि इस समझौते में लेबनान में इज़रायली हमलों को रोकना भी शामिल था. अब देखना यह होगा कि क्या इस्लामाबाद की यह बैठक पश्चिम एशिया में महीने भर से चल रहे रक्तपात को रोकने में सफल होती है या अविश्वास की खाई इस प्रयास को भी विफल कर देगी.

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