Strait of Hormuz tol tax : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने जिस एक मुद्दे पर पूरी दुनिया की सांसें थाम दी थीं, वह था Strait of Hormuz. यही वह अहम जलमार्ग है, जहां से दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल गुजरता है. ईरान की घेराबंदी और बढ़ते सैन्य तनाव के चलते तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता फैल गई.
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा दो हफ्ते के युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा के बाद हालात में कुछ राहत जरूर दिखी है. ईरान ने भी इस अस्थायी समझौते को स्वीकार करते हुए कहा है कि वह अगले दो हफ्तों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग देगा. ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने पुष्टि की कि यह कदम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को राहत देने के लिए उठाया गया है.
Strait of Hormuz tol tax : अब फ्री नहीं रहा ये रास्ता
लेकिन इस राहत के पीछे एक बड़ा आर्थिक खेल भी छिपा है.दरअसल, होर्मुज अब पूरी तरह ‘फ्री पास’ नहीं रहा, बल्कि ‘टोल-नाका’ बनता नजर आ रहा है.रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से प्रति जहाज लगभग 20 लाख डॉलर तक का शुल्क वसूल रहा है.
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह सीजफायर स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि एक अस्थायी व्यवस्था है. इसके साथ ही अमेरिका के साथ बातचीत की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है, जिसमें होर्मुज की भविष्य की व्यवस्था अहम मुद्दा होगी.
इस नई व्यवस्था के तहत होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए एक विशेष प्रोटोकॉल तैयार किया जा रहा है. इसमें ईरान की नियंत्रण भूमिका को मान्यता देने और उसकी भू-राजनीतिक स्थिति को स्वीकार करने की बात शामिल है. वहीं, खबरें यह भी हैं कि Oman इस व्यवस्था में ईरान के साथ साझेदार बन सकता है.
ईरान को होगी 70 से 100 अरब डॉलर की कमाई !
अगर यह मॉडल पूरी तरह लागू होता है, तो होर्मुज अब एक मुक्त अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग नहीं रहेगा. इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है. जानकारों का मानना है कि अगर ईरान को आधिकारिक तौर पर टोल वसूलने का अधिकार मिल जाता है, तो वह हर साल 70 से 100 अरब डॉलर तक की कमाई कर सकता है—जो कि Suez Canal के टोल मॉडल जैसा होगा.
भारत के लिए हालांकि स्थिति अपेक्षाकृत राहत भरी रही है. भारत के ईरान और ओमान दोनों से अच्छे संबंध होने के कारण भारतीय जहाजों को इस दौरान भी कोई टोल नहीं देना पड़ा. हाल ही में भारत के 8 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज से गुजरे और उन पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया. ऐसे में भविष्य में भी भारत को इस व्यवस्था से विशेष छूट या फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
कुल मिलाकर, होर्मुज संकट ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति अब सिर्फ भू-राजनीति नहीं, बल्कि ‘टोल इकोनॉमी’ के नए दौर में प्रवेश कर रही है.

