Parliament Session: संसद के सत्र का एक दिन और सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध की भेंट चढ़ गया. जहां विपक्ष सदन के अंदर और बाहर US-India trade deal पर चर्चा और नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने दो को लेकर विरोध प्रदर्शन करता रहा, वहीं सत्ता पक्ष ने सदन का इस्तेमाल कर विपक्ष बहुत ही घटिया हमला करने की कोशिश की. सत्ता पक्ष के सांसद में न सिर्फ देश के पहले प्रधानमंत्री बल्कि देश की महिला प्रधानमंत्री पर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की.
Parliament Session:धन्यवाद प्रस्ताव पर नहीं बोलने आए पीएम मोदी
जैसी की उम्मीद थी कि शाम पांच बजे लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री मोदी अपनी बात रखेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. शाम पांच बजे सदन की बैठक विपक्ष के हंगामे के साथ शुरू हुई और फिर एक मिनट के भीतर ही गुरुवार 5 फरवरी सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई.
मैं खुद जाकर उन्हें (पीएम मोदी) को यह किताब थमा दूंगा-Rahul Gandhi
राहुल गांधी ने मीडिया के सामने जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब को दिखाते हुए कहा, (जिसे खुद कांग्रेस पार्टी ने अपनी सोशल मीडिया साइट एक्स पर शेयर किया है), “वे कहते हैं कि यह किताब मौजूद नहीं है, लेकिन यह किताब यहाँ है. भारत के हर युवा को यह देखना चाहिए कि यह किताब मौजूद है. यह मिस्टर नरवणे की किताब है. ये जनरल मनोज मुकुंद नरवणे जी की किताब है, लेकिन मुझे कहा गया है कि मैं इसे Quote नहीं कर सकता हूं. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कही एक लाइन है- ”जो उचित समझो, वो करो” जब चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ नरवणे जी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी को फोन कर बताया- बॉर्डर पर चीन के टैंक आ गए हैं, हमें क्या करना है? लेकिन तब राजनाथ सिंह जी का कोई रिप्लाई नहीं आया. नरवणे जी ने उन्हें फिर फोन किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने कहा- मैं ‘ऊपर’ से पूछता हूं. ‘ऊपर’ से ऑर्डर आया कि जब चीन की सेना हमारे बॉर्डर के अंदर आए तो बिना हमसे पूछे फायर न करें. हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वो भारत की सीमा में घुस आए थे. लेकिन इस मुश्किल समय में नरेंद्र मोदी जी ने मैसेज दिया- “जो उचित समझो, वो करो” मतलब प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की और सेना से कहा- ‘आपको जो करना है करो, मेरे बस की नहीं है’ आर्मी चीफ नरवणे जी ने अपनी किताब में साफ लिखा है- “मुझे सच में अकेलापन महसूस हुआ, मुझे पूरी व्यवस्था ने छोड़ दिया था.”
इसके बाद नेता विपक्ष रीहुल गांधी ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि PM में आज लोकसभा आने की हिम्मत है. क्योंकि अगर वह आते हैं, तो मैं खुद जाकर उन्हें यह किताब थमा दूंगा.”
बीजेपी सांसद निशीकांत दूबे ने दिखाई किताब, हुआ लाइव प्रसारण
बुधवार को लोकसभा की बैठक पहले 11 बजे और फिर 12 बजे दो बार स्थगित होने के बाद जब तीसरी बार 2 बजे फिर शुरु हुई तो स्पीकर ने विपक्ष के हंगामे के बीच बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने का मौका दिया. अपने भाषण में बीजेपी सांसद ने एक नहीं कई किताबें संसद में दिखाई, जिसका लोकसभा टीवी पर लाइव प्रसारण भी किया गया जबकि आम तौर पर कुछ पोस्ट तस्वीर या किताब दिखाने पर स्क्रीन पर स्पीकर तो दिखाया जाता है. लेकिन इस बार स्पीकर नो-नो बोलते रहे और कैमरा निशिकांत दूबे पर रहा जो एक के बाद एक किताब दिखा रहे थे.
इतना ही नहीं बीजेपी सांसद ने देश के पहले प्रधानमंत्री और महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया. निशिकांत दुबे ने कहा कि राहुल गांधी ने बिना छपी किताब को लेकर तीन दिनों से संसद को बंधक बनाकर रखा है. उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी के एक किताब के बदले 100 किताबें लेकर संसद भवन आया हूं. नेहरु-गांधी परिवार के मक्कारी का इतिहास देश के सामने आना चाहिए.’
इसके बाद सदन की कार्रवाई को शाम 5 बजे तक स्थगित कर दिया गया.
12 बजे चर्चा से इनकार के बाद लोकसभा में US-India trade deal पर दिया भाषण
बुधवार को 11 बजे हुए स्थगन के बाद जब लोकसभा की बैठक 12 शुरू हुई तो फिर भारी हंगामा हुआ. सबसे पहले स्पीकर ने मनीष तिवारी समेत सभी विपक्षी सांसदों के US-India trade deal पर दिए स्थगन प्रस्ताव को नामंजूर करने की बात कही, फिर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के US-India trade deal पर भाषण दिया. केंद्रीय मंत्री के भाषण के दौरान स्पीकर ओम बिरला के सामने बैनर दिखाए और नारे लगाए. जिसके बाद लोकसभा को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
US-India trade deal पर क्या बोले पीयूष गोयल
केंद्रीय वाणिज्य एंव उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कहा, “2 फरवरी 2026 को, PM और US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कई बाइलेटरल और इंटरनेशनल महत्व के मामलों पर टेलीफोन पर बातचीत की. इसके बाद, प्रेसिडेंट ट्रंप ने टैरिफ को घटाकर 18% करने की घोषणा की. मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहूंगा कि यह टैरिफ कई कॉम्पिटिटर देशों पर US टैरिफ से कम है…”
उन्होंने आगे कहा,”… दोनों पक्षों के हितों को देखते हुए स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे… भारतीय पक्ष अपने संवेदनशील क्षेत्रों विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है. अमेरिकी पक्ष के भी कुछ ऐसे क्षेत्र थे जो उनके दृष्टिकोण से संवेदनशील थे. 1 साल तक चली कई दौर के विचार विमर्श के बाद व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे… यह समझौता विशेष रूप से श्रम प्रदान क्षेत्रों और विनिर्माण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है… खाद और कृषि क्षेत्र में भारत की संवेदनशीलता का पूर्ण ध्यान रखा गया है.”
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