UP Cabinet Expansion : उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव 2027 में होने वाले हैं लेकिन सियासी गोटियां अभी से बिसात पर फिक्स होनी शुरु हो गई हैं. वैसे भी माना जाता है कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा चुनावी मोड में रहती है और आने वाले चुनावों की रणनीति समय से पहले ही बनाना शुरु कर देती है. ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश में देखने के लिए मिल रहा है.
UP Cabinet Expansion से पहले ओबीसी को बनाया अध्यक्ष
यूपी में भले ही अगड़ी जातियों का वर्चस्व है, मुख्यमंत्री खुद राजपूत समाज से आते हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी की नजर सबसे अधिक आबादी वाले पिछड़ी और ओबीसी से आने वाले वोटर्स पर है. यही कारण है कि पार्टी ने प्रदेश में जाट समुदाय से आने वाले चौधरी भूपेंद्र सिंह के स्थान पर ओबीसी समुदाय से आने वाले पंकज चौधरी को प्रदेश का नया अध्यक्ष बनाया गया है. संख्या से हिसाब से देखा जाये तो उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय की 2 से 4 प्रतिशत भागीदारी है , वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग की बात की जाये तो पूरे राज्य में इनकी आबादी 40 से 50 प्रतिशत के बीच है.ऐसे में बीजेपी ने पंकज चौधरी को अपना प्रदेश अध्यक्ष बनाकर समाजवादी पार्टी के पीडीए और अन्य राजनीतिक पार्टियों पर बढ़त बनाने की कोशिश की है.
यूपी कैबिनेट में विस्तार की बारी
नये प्रदेश अध्यक्ष के बाद उत्तर प्रदेश में अब योगी कैबिनेट के विस्तार की बारी है. तो ऐसे में सवाल उठता है कि यहां किस तरह के समीकऱण देखने के लिए मिल सकते हैं ? माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में नये प्रदेश अध्यक्ष के चयन के बाद अब नये साल में योगी कैबिनेट में भी विस्तार देखने के लिए मिलेगा. सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक यूपी में 14 जनवरी के बाद योगी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है.
उत्तर प्रदेश में 6 मंत्री पद खाली
कुल 403 सीटों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय 54 मंत्री हैं, जबकि विधानसभा की संख्या के मुताबिक 60 मंत्री बनाये जा सकते हैं. योगी कैबिनेट में इस समय 6 नये मत्रियों के लिए जगह खाली है. ऐसे में अब ये मान जा रहा है कि योगी सरकार 13 महीने के बाद 2027 में होने वाली विधानसभा चुनाव से पहले इन खाली मंत्रीपदों को भर कर सियासी समीकऱण को साधने की कोशिश करेगी. सियासी गलियारों मे खबर है कि इस विस्तार में प्रदेश को एक नया उप मुख्यमंत्री मिल सकता है, जो विपक्षी पार्टियों के वोट बैंक पर भारी पड़े.
भूपेंद्र चौधरी बन सकते हैं मंत्री ?
जाट समुदाय से आने वाले वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह चौधरी को लेकर माना जा रहा है कि उनका मंत्रिमंडल में शामिल होना लगभग तय है. भूपेंद्र चौधरी बीजेपी के अध्यक्ष बनने से पहले 2022 में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं. भूपेंद्र चौधरी को पश्चिमी यूपी के जाट बहुल इलाके में प्रभावशाली माना जाता है. माना जा रहा है कि उन्हें कैबिनेट में मंत्री पद देकर उनके संगठनात्मक पद छोड़ने की भरपाई भी की जायेगी.
यूपी को मिलेगा तीसरा डिप्टी सीएम?
प्रदेश में समाजिक समीकऱणों के देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार एक नया डिप्टी सीएम भी बनाया जा सकता है. ओबीसी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को प्रदेश की कमान सौंपने के साथ ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा जातिगत समीकऱण को साधने के लिए अनुसूचित जाति (एससी) आने वाले किसी नेता को कैबिनट में ला सकती है. इस समय की योगी सरकार में दोनो उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (ओबीसी) और बृजेश पाठक (ब्राह्मण) समाज से आते हैं. ऐसे में राज्य की सबसे अधिक जनसंख्या को योगी सरकार में एक नया उपमुख्यमंत्री बनाकर प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है.
सपा छोड़कर आये विधायकों को मिल सकता है मौका
सूत्रों की माने तो इस बार योगी सरकार का निशाना अखिलेश यादव के वोटरो पर सबसे ज्यादा है. ऐसे में कैबिनेट विस्तार में उन नेताओं को भी तवज्जो मिल सकती है, जो समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में आये हैं. इसके अलावा दलित पिछड़े और आदिवासी (PDA) को साधने की कोशिश भी की जा सकती है.

